Normal delivery : अब नॉर्मल डिलीवरी में गहरे जख्म का खतरा नहीं रहेगा, पीजीआई ने तैयार की नई डिवाइस
नॉर्मल डिलीवरी के दौरान महिलाओं को होने वाली अंदरूनी चोटों और टांकों के दर्द से बचाने के लिए चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों ने एक खास डिवाइस तैयार की है। पीजीआई के गायनी विभाग के डॉ. गिरिजा शंकर मोहंती ने 6 साल की मेहनत के बाद एक खास मेडिकल टूल- 'पेरिनियल रीट्रैक्टर' तैयार किया है।
इस डिवाइस की मदद से डिलीवरी के समय लगाए जाने वाले कट (एपिसियोटॉमी) का एंगल सटीक रहेगा, जिससे महिलाओं को प्रसव के बाद होने वाली गंभीर दिक्कतों से राहत मिलेगी। पीजीआई में 2-3 मरीजों पर इसका वॉलंटरी ट्रायल सफल रहा है। फॉर्मल एथिकल ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। पीयू के टेक्नोलॉजी एनेब्लिंग सेंटर ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
90% केसों में कट एंगल गलत होने का खतरा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक अक्सर नॉर्मल डिलीवरी के समय रास्ता चौड़ा करने के लिए डॉक्टरों को एक छोटा सा कट लगाना पड़ता है। मेडिकल भाषा में इसे 'एपिसियोटॉमी' कहते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर कट 45 डिग्री से कम रह जाए तो जख्म गहरा होने का रिस्क रहता है। एक अनुमान के मुताबिक, बिना डिवाइस के लगभग 90% मामलों में यह एंगल परफेक्ट नहीं लग पाता।
अभी क्या दिक्कत है?
अभी तक डॉक्टर यह कट अंदाजे (आईबॉलिंग) से लगाते हैं। अगर यह कट सही एंगल (60 डिग्री) पर न लगे, तो इंफेक्शन, ज्यादा ब्लीडिंग या यूरिन कंट्रोल खोने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
नया डिवाइस क्या करेगा?
पीजीआई का यह नया टूल डिलीवरी के वक्त शरीर के उस हिस्से को स्थिर रखेगा और डॉक्टर को बिल्कुल सटीक 60 डिग्री का एंगल दिखाएगा। इससे गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
रियूजेबल डिवाइस : इसे स्टर्लाइज करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
छोटे अस्पतालों के लिए बेस्ट
इसे गांव की डिस्पेंसरी और छोटे सरकारी अस्पतालों का स्टाफ भी आसानी से चला सकेगा।
चंडीगढ़ पीजीआई के गायनी विभाग की हेड डा. वनीता जैन ने बताया कि इस डिवाइस का मकसद डिलीवरी को सुरक्षित बनाना है। इससे न सिर्फ मरीजों को गहरी चोट से बचाया जा सकेगा, बल्कि डिलीवरी करा रहे डॉक्टरों को भी सुई चुभने जैसी चोटों से सुरक्षा मिलेगी।