RSS : संभाग प्रचारक संभालेंगे संगठन का मूल काम, नई व्यवस्था, प्रान्त की जगह संभाग बनेगी प्रमुख इकाई
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( आरएसएस ) अपनी संगठनात्मक व्यवस्था में बदलाव के साथ प्रचारकों की जिम्मेदारियां नए सिरे से तय करने जा रहा है। नई व्यवस्था में संभाग प्रचारक संघ के नियमित संग्घनात्मक काम, जागरण व शारीरिक गतिविधियां संभालेंगे। वहीं राज्य प्रचारकों की जिम्मेदारी विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े संगठनों के साथ संपर्क, समन्वय और उनके कामकाज पर ध्यान देने की होगी।
इस तरह दोनों स्तरों पर काम का बंटवारा स्पष्ट किया जाएगा। संघ की प्रस्तावित नई व्यवस्था में प्रान्त की जगह संभाग संगठन की प्रमुख ईकाई होंगे। संभाग स्तर पर संघ के मूल कार्यों पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि राज्य प्रचारक विविध क्षेत्रों से जुड़े संगठनों के कामकाज व उनके बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
ये संगठन आते हैं विविध क्षेत्रों में
संघ के विविध क्षेत्रों में 32 प्रमुख संगठन काम करते हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी ( राजनीतिक ), विश्व हिंदू परिषद ( धार्मिक एवं सामाजिक ), भारतीय मजदूर संघ ( श्रमिक ), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( शिक्षा एवं छात्र ), भारतीय किसान संघ ( कृषि ), राष्ट्र सेविका समिति ( महिला ), विद्या भारती ( शिक्षा ) और वनवासी कल्याण आश्रम ( वनवासी क्षेत्र ) प्रमुख हैं।
अब तक यह थी व्यवस्था
अभी तक प्रान्त प्रचारकों के पास संघ के नियमित संगठनात्मक कामकाज के साथ विविध क्षेत्रों से जुड़े संगठनों की गतिविधियों और उनके साथ समन्वय की जिम्मेदारी रहती थी। प्रान्त स्तर पर काम बढ़ने से राजनीतिक और अन्य से संगठनों से जुड़े संपर्क, समीक्षा और समन्वय में काफी समय लगने लगा था। विभाग स्तर पर भी इन गतिविधियों को लेकर चर्चा व समन्वय होने लगा। अब मूल कार्यों पर प्रभावी ढंग से ध्यान देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। नई संगठनात्मक व्यवस्था को नवम्बर में इंदौर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद लागू करने की प्रक्रिया शुरु होगी। मार्च 2027 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।