Sleep Apnea Center : नींद में ज्यादा खर्राटे आने से इस गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो रहे लोग, इलाज के लिए खुलेगा देश का पहला स्लीप एपनिया सेंटर
स्लीप एपनिया का खतरा को देखते हुए चंडीगढ़ में खुलेगा मल्टी-डिसिप्लिनरी स्लीप एपनिया सेंटर
खरटिदार नींद को अधिकतर लोग चैन की नींद मानते हैं, लेकिन खरटि आने पर स्लीप एपनिया होने का खतरा बढ़ जाता है। नींद में सांस रुकने की गंभीर बीमारी 'स्लीप एपनिया' के बढ़ते मामलों को देखते हुए पीजीआई में देश का पहला सरकारी मल्टी-डिसिप्लिनरी स्लीप एपनिया सेंटर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव को जल्द स्वास्थ्य मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
अगर यह सेंटर मंजूर हो जाता है तो सरकारी क्षेत्र में यह अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जहां स्लीप एपनिया के मरीजों को एक ही छत के नीचे पूरा इलाज मिल सकेगा। प्रस्तावित सेंटर में ईएनटी, पल्मोनरी और डेंटल विशेषज्ञों के साथ-साथ वजन कम करने, मशीन थैरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी जैसे सभी उपचार एकसाथ उपलब्ध कराए जाएंगे।
वीरवार को पीजीआई की न्यू ओपीडी में स्लीप एपनिया के बारे में जागरूक किया गया। वर्ल्ड स्लीप एपनिया डे के मौके पर पीजीआई के ईएनटी डिपार्टमेंट के प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि स्लीप एपनिया के मरीजों को अक्सर रात में बार-बार सांस रुकने की समस्या होती है, जिसे माइक्रो अराउजल कहा जाता है।
बच्चों में भी बढ़ रही समस्या
डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या केवल बड़ों में ही नहीं, बल्कि 2-3 साल के बच्चों में भी देखने को मिल रही है। जो बच्चे मुंह खोलकर सांस लेते हैं या रात में खरटि लेते हैं, उनमें पीडियाट्रिक स्लीप एपनिया की संभावना हो सकती है। समय पर इलाज न होने पर बच्चों में दांतों की बनावट और चेहरे के विकास पर भी असर पड़ सकता है।
जांच करवाना जरूरी
डॉ. संदीप ने बताया कि 13 मार्च को स्लीप एपनिया डे मनाया जाता है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि अगर लगातार खरटि आते हैं, दिन में थकान रहती है या नींद पूरी होने के बावजूद ताजगी महसूस नहीं होती तो जांच जरूर करवाएं। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी नींद ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है। स्लीप एपनिया को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर बीमारियों को न्योता देने जैसा हो सकता है।
मरीज को इसका एहसास नहीं होता, लेकिन इससे शरीर में ऑक्सीजन कम होती रहती है। अगर इसका इलाज न कराया जाए तो आगे चलकर ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई लोग इन बीमारियों का इलाज तो कराते रहते हैं, लेकिन असली कारण यानी स्लीप एपनिया की जांच नहीं कराते।