{"vars":{"id": "127470:4976"}}

ममता के करीबी पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव मिला, सुसाइड नोट में लिखा- ‘राजनीति में आना सबसे बड़ी भूल’

 


Rudra News Express Kolkata.


बीरभूम। पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौके से एक पन्ने का कथित सुसाइड नोट बरामद किया है। इस नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन राजनीतिक जीवन को लेकर गहरी निराशा जाहिर की।

रिपोर्टों के मुताबिक, नोट में आशीष बनर्जी ने लिखा कि राजनीति में आना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने अपने परिवार की युवा पीढ़ी को राजनीति से दूर रहने और अपने-अपने पेशे पर ध्यान देने की सलाह दी।

TRDA के भ्रष्टाचार आरोपों पर क्या लिखा?

सुसाइड नोट में आशीष बनर्जी ने तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (TRDA) से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने दावा किया कि TRDA में उनके पास कोई प्रत्यक्ष जिम्मेदारी या अधिकार नहीं था और उनकी भूमिका केवल बैठकों में शामिल होने तक सीमित थी।

उन्होंने कथित तौर पर कहा कि टेंडर कमेटी, चेक पर हस्ताक्षर, किसी योजना को मंजूरी देने या NOC जारी करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उनका यह भी दावा था कि इन मामलों में उनसे सलाह तक नहीं ली जाती थी। इसके बावजूद उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की गई।

राजनीति छोड़ने के बाद बढ़ी थी दूरी :

आशीष बनर्जी लंबे समय तक रामपुरहाट की राजनीति में टीएमसी का प्रमुख चेहरा रहे। वह 2001 से लगातार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे और बाद में राज्य सरकार में मंत्री तथा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार ध्रुब साहा से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के बाद जून में उन्होंने बीरभूम जिला टीएमसी के चेयरमैन और जिला कोर कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने उस समय कहा था कि जिला कोर कमेटी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही थी।

शिक्षक से मंत्री और डिप्टी स्पीकर तक का सफर :

राजनीति में आने से पहले आशीष बनर्जी शिक्षक और शिक्षाविद के रूप में काम कर चुके थे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और रामपुरहाट से लगातार कई चुनाव जीते।

टीएमसी सरकार के दौरान उन्होंने स्कूली शिक्षा और कृषि सहित महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी बने। चुनावी राजनीति में करीब 25 वर्षों तक रामपुरहाट का प्रतिनिधित्व करने के बाद 2026 में उनका राजनीतिक सफर चुनावी हार के साथ थमा।

पुलिस कर रही मामले की जांच :

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। कथित सुसाइड नोट की प्रामाणिकता और उसमें लिखी बातों की भी जांच की जा रही है। इसलिए नोट में लगाए गए आरोपों और मौत के कारणों को फिलहाल जांच का विषय माना जा रहा है।