US-Iran Peace Agreement : "जहाजों के इंजन चालू कर, तेल ले जाओ" हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा, सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रुकेगी
अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता, युद्धविराम पर सहमति
RNE New Delhi.
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण शांति समझौते पर सहमति बना ली है। दोनों देशों के बीच रविवार को हुई गहन वार्ताओं के बाद सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनी है। इस समझौते में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का भी प्रावधान शामिल है।
ट्रम्प ने समझौते की जानकारी साझा की :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की पुष्टि करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धुरी हॉर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
समझौते के प्रारूप के अनुसार अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाएगा और ईरानी तेल एवं पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में राहत पर बातचीत आगे बढ़ेगी। साथ ही लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य गतिविधियों को स्थायी रूप से रोकने का प्रस्ताव रखा गया है।
ईरान ने ये कहा :
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि 60 दिनों के युद्धविराम काल के दौरान एक व्यापक समझौते पर बातचीत होगी, जिसमें प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे शामिल रहेंगे। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी घोषणा की है कि सोमवार रात से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान स्थायी रूप से समाप्त कर दिए जाएंगे।
इजरायल को आपत्ति :
हालांकि इस समझौते को लेकर इज़राइल ने कुछ आपत्तियां जताई हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि इज़राइल लेबनान में अपनी सुरक्षा संबंधी कार्रवाई की स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है, जबकि ईरान लेबनान में पूर्ण युद्धविराम को समझौते का अहम हिस्सा मान रहा है।
स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। समझौते की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
पीएम मोदी बोले- पश्चिम एशिया में शांति-स्थिरता लौटेगी :
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और कई देशों में जनहानि भी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समझौते के क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होगी तथा समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर बनी समझ का वह स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है और अनेक देशों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है।
उन्होंने कहा कि भारत को आशा है कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली होगी तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों पर आवागमन निर्बाध रूप से जारी रह सकेगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शेष मुद्दों पर होने वाली बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी और अंततः एक स्थायी एवं व्यापक समझौते का मार्ग प्रशस्त करेगी।
US-Iran Peace Agreement : दुनिया में स्वागत, नेता बोले-ऐतिहासिक कदम :
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का दुनिया भर के नेताओं ने स्वागत किया है। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता बताया है। नेताओं ने युद्धविराम को लागू करने, आगे की वार्ताओं को सफल बनाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित एवं निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान को शांति समझौते पर बधाई देते हुए इसे संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में "महत्वपूर्ण कदम" बताया। उन्होंने कतर, पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्किये और अन्य क्षेत्रीय देशों की मध्यस्थता और सहयोग की भी सराहना की।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि आगामी वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ेंगी।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने समझौते को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह और स्थायी रूप से खुला रखना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए।
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने समझौते का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और स्वतंत्र नौवहन व्यवहारिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को संयम और रचनात्मक संवाद बनाए रखना होगा। वहीं न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे तनाव कम करने और वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने वाला कदम बताया।
यूरोप के प्रमुख देशों—ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली—ने संयुक्त बयान जारी कर समझौते को कूटनीतिक सफलता बताया और इसके शीघ्र एवं व्यापक क्रियान्वयन की अपील की। इन देशों ने कहा कि यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का अवसर है।
4% से ज्यादा गिरे कच्चे तेल के दाम, शेयर बाजारों में तेजी :
अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर हुए शांति समझौते का असर वैश्विक बाजारों पर तुरंत देखने को मिला। समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई।
सोमवार को कारोबार के दौरान वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की कीमत 4.39 प्रतिशत गिरकर 81.15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद से निवेशकों की चिंताएं कम हुई हैं।
एशियाई बाजारों में राहत की लहर :
शांति समझौते की खबर के बाद एशियाई शेयर बाजारों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 4 प्रतिशत तक उछल गया।
पिछले कई दिनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई थी। समझौते के बाद निवेशकों ने राहत की सांस ली और जोखिम वाले निवेशों की ओर रुख बढ़ा।
डॉलर भी हुआ कमजोर :
अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का असर विदेशी मुद्रा बाजार में भी देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले 0.31 प्रतिशत गिरकर 99.492 पर पहुंच गया, जो पिछले 10 दिनों का सबसे निचला स्तर है। विश्लेषकों के अनुसार युद्ध समाप्ति की संभावना और तेल कीमतों में गिरावट से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता कम हुई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
भारत को भी मिल सकती है राहत :
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। यदि तेल कीमतों में नरमी बनी रहती है तो पेट्रोलियम आयात बिल कम होने के साथ महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।