05 प्रसूताओं की मौत: प्रसूताओं को लगाए गए इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन ही नहीं था
RNE Kota.
कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल और जेके लोन अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि जिन महिलाओं का उपचार किया गया था, उन्हें लगाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता बेहद खराब थी और जांच में इंजेक्शन में ऑक्सीटोसिन की मात्रा शून्य पाई गई।
मामले में अब तक 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जबकि 6 महिलाओं का इलाज जारी है। एक महिला को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार दोनों अस्पतालों में इस इंजेक्शन की करीब 16 हजार डोज सप्लाई की गई थीं। जांच के बाद 3501 इंजेक्शन जब्त कर लिए गए हैं, जबकि 12 हजार 499 इंजेक्शन पहले ही मरीजों को लगाए जा चुके थे। जब्त इंजेक्शनों की अनुमानित कीमत करीब 1.60 लाख रुपये बताई गई है।
नए अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि संबंधित इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज के रेट कॉन्ट्रैक्ट में शामिल था और वार्डों में नियमित रूप से सप्लाई किया गया था। जांच के लिए भेजे गए सैंपलों में एक बैच फेल पाया गया। यही इंजेक्शन नए अस्पताल और जेके लोन अस्पताल दोनों में उपयोग किया जा रहा था।
निलंबित डॉक्टर बी.एल. पाटीदार ने बताया कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल प्रसव पीड़ा शुरू कराने और सिजेरियन डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने के लिए किया जाता है। ऐसे में दवा की गुणवत्ता में गड़बड़ी गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग ने बताया कि ड्रग कंट्रोल ऑफिसर दिनेश कुमावत ने इंजेक्शन के नमूने लिए थे। रिपोर्ट में दवा फेल पाए जाने के बाद उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई और कार्रवाई शुरू की गई। ड्रग कंट्रोल टीम ने छापेमारी कर इंजेक्शन जब्त कर लिए हैं। सभी इंजेक्शन औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 के तहत सीज किए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार मंगलवार को न्यायालय से कस्टडी ऑर्डर लेने के बाद दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने मृत प्रसूताओं की पहचान प्रिया, पिंकी महावर, ज्योति, पूजा और शिरीन के रूप में की है। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दवा सप्लाई में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।