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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब राजस्थानी को लेकर देरी क्यों, अब तो विरोध की बात भी नहीं रही भाषा को लेकर

प्राथमिक स्तर से पढ़ाई शीघ्र शुरू करने का सुवसर
शिक्षा नीति की भी पालना हो जायेगी
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Network.

राजस्थानी भाषा को लेकर अब तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर दिया। हर बाधा कोर्ट के आदेश के बाद कानूनी तौर पर दूर हो चुकी है। अब केवल कोर्ट के आदेश की पालना पूर्ण ईच्छाशक्ति से करने की जरूरत है। राज्य विधानसभा सत्वसम्मति से पहले ही राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देने का प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित कर चुकी है। कोर्ट भी मुहर लगा दी।

अब केंद्र व राज्य सरकार के हाथ में ही है कि वो 12 करोड़ से अधिक राजस्थानियों के मुंह पर लगे ताले को खोलकर उन्हें भाषाई आजादी दे सकती है। उनको उनका हक दे सकती है। राजस्थानियों की भाषा और संस्कृति की रक्षा कर सकती है। देश - दुनिया मे रहने वाले राजस्थानियों की अस्मिता की रक्षा कर सकती है। 60 साल के संघर्ष को सफल कर सकती है। स्वर्ग में बैठे वे सभी राजस्थानी सरकार को दुआएं देंगे। उस पर पुष्प वर्षा करेंगे। उनके जीते जी न सही, अब तो उनकी मायड़ भाषा राजस्थानी को मान्यता मिली। पीढियां माननीय न्यायालय के साथ सरकार की जय जयकार करेगी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने भी अनेकों बार इस बात की पैरवी की है कि बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उसकी मातृ भाषा मे देनी चाहिए ताकि उसका विकास जल्दी हो। वो अपनी संस्कृति व संस्कार की भी फिर आसानी से रक्षा कर सकेगा। यूएनओ के सर्वे ने भी यह प्रमाणित किया था कि जिस बच्चे को प्राथमिक शिक्षा उसकी भाषा मे मिलती है, वह आगे जाकर बहुत सफल होता है। न्यूटन, आइंस्टीन इसके उदाहरण है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि राजस्थान के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा राजस्थानी में ही दी जानी चाहिए। यह एक सुनहरा अवसर है राजस्थानियों को खुश करने का सरकार के पास। वैसे यह सोचने की भी बात है कि यदि राजस्थान में राजस्थानी प्राथमिक शिक्षा से लागू नहीं होगी तो अन्य भाषाई प्रदेश में तो होने से रही।

अब देर न हो बस.....

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सितम्बर तक इस भाषा में पढ़ाई शुरू करने की अनुपालना रिपोर्ट भी मांगी है। राज्य सरकार को अब इस काम में देरी नहीं करनी चाहिए। अविलंब प्राथमिक शिक्षा की स्कूलों में राजस्थानी को अनिवार्य कर देना चाहिए। जनता का श्रेय लेने का सरकार के पास बड़ा अवसर है, उसे गंवाना नहीं चाहिए। 
डाइट व एनसीएईआरटी इसके लिए पाठ्यक्रम पर पहले ही श्रम कर चुकी है। उनके साथ साहित्य मनीषियों को जोड़कर तुरंत पाठ्यक्रम तय कर लागू कर देना चाहिए। भाजपा की राज्य सरकार है और भाजपा ने चुनाव के समय राजस्थानी को मान्यता देने का वादा भी किया हुआ है। अब अवसर है, स्थितियां भी है और लोग भी तैयार है .... तत्काल कोर्ट का आदेश लागू कर देना चाहिए।

विरोध की स्थितियां भी समाप्त है:

माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद तमाम तरह के विरोध भी अब बेमानी हो गए है। कोर्ट के निर्णय के विरोध का जोखिम कोई उठाने की स्थिति में भी नहीं है।
बोलियां और उनको लेकर खड़ी की जाने वाली भ्रामक बातें भी अब तो कोर्ट के निर्णय के बाद समाप्त हो गयी है। इस मामले में अब पहल केवल सरकार को करनी है। उसे बिना समय गवाएं राजस्थानियों के हित में निर्णय लेना है। सरकार के निर्णय के विरोध की भी कोई स्थिति अब तो नहीं बची, फिर सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए। 

पढ़ाई शुरू करने का सुअवसर:

राज्य सरकार के पास प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई शुरू करा देने का सुअवसर है। क्योंकि शिक्षा सत्र 2026 - 27 यूं तो शुरू हो गया मगर विधिवत शिक्षण जून के अंत में प्रारंभ होगा, तब तक पाठ्यक्रम लागू किया जा सकता है। इससे मोदी सरकाए द्वारा बनाई गई शिक्षा नीति की भी पालना हो जायेगी