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बीकानेर में बड़ा आध्यात्मिक आयोजन : चार मुमुक्षुओं ने छोड़ा गृहस्थ जीवन, ली भगवती दीक्षा

 
बीटेक, बीएससी और इंटीरियर डिजाइनिंग तक पढ़े युवाओं ने अपनाया संयम का मार्ग; आचार्यश्री रामलालजी व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के सान्निध्य में दीक्षा महोत्सव

 

 

Rudra News Express Bikaner. 

बीकानेर के छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में अनूठा आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिल। यहां चार लोगों ने एक साथ गृहस्थ जीवन छोड़ा, लेकिन यह सिर्फ दीक्षा का आयोजन नहीं था—यह वैराग्य, तप और संयम की उस परंपरा का सार्वजनिक दृश्य था, जिसमें आधुनिक शिक्षा और करियर के बीच भी युवा सांसारिक जीवन से अलग रास्ता चुन रहे हैं।

दरअसल यहां आचार्यश्री रामलालजी और उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के सान्निध्य में चार मुमुक्षुओं ने गृहस्थ जीवन त्यागकर भगवती दीक्षा ग्रहण की। देशभर से आए करीब तीन हजार श्रावक-श्राविकाएं, मुनि और साध्वीवृंद  की मौजूदगी देशनोक मूल के बैंगलुरु प्रवासी 50 वर्षीय नवरतन कोठारी अब नवदीक्षित श्री रामनव मुनि बने हैं। पाली के 31 वर्षीय शुभम श्रीश्रीमाल ने राम शुभम मुनि के रूप में दीक्षा ली। छत्तीसगढ़ के गातापार की 23 वर्षीय काजल नाहर अब साध्वी श्री राम कंजम श्रीजी और बीकानेर मूल की सूरत प्रवासी 22 वर्षीय दिया सुराणा साध्वी श्री राम दिव्यम् श्रीजी बनीं।

पढ़ाई और करियर के रास्ते से संयम की ओर : 

चारों मुमुक्षुओं की पृष्ठभूमि भी अलग-अलग रही है। राम शुभम मुनि ने बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स की शिक्षा हासिल की है। साध्वी श्री राम कंजम श्रीजी बीएससी तक पढ़ी हैं, जबकि साध्वी श्री राम दिव्यम् श्रीजी ने इंटीरियर डिजाइनिंग में बीए तक शिक्षा ग्रहण की है। 50 वर्षीय रामनव मुनि ने दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की है। रामनव मुनि पिछले दो वर्षों से वैराग्यकाल का पालन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने धार्मिक अध्ययन किया और करीब 600 किलोमीटर की पैदल यात्रा भी की। उन्होंने परिजनों की सहमति और साक्षी में दीक्षा ग्रहण की।

तीन हजार लोगों की मौजूदगी, बिना माइक सुने प्रवचन : 

दीक्षा महोत्सव में गुरु भक्ति और वैराग्य चेतना के गीतों के साथ जयकारे गूंजे। कार्यक्रम में विशेष अनुशासन देखने को मिला। बिना माइक के ‘पिन ड्रॉप साइलेंस’ माहौल में श्रावक-श्राविकाओं ने मुनिवृंद-साध्वीवृंद के प्रवचन और आचार्यश्री रामलालजी का मंगलपाठ सुना। आयोजन की व्यवस्थाओं में साधुमार्गी जैन सेवा समिति, महिला मंडल, समता युवा संघ, समता बहू मंडल और कन्या मंडल की स्थानीय तथा देश-प्रदेश की इकाइयों के पदाधिकारी व सदस्य जुटे रहे।

बीकानेर में इस साल 13 ने अपनाया संयम : 

साधुमार्गी जैन संघ के अनुसार, आचार्यश्री रामलालजी ने इसी वर्ष बीकानेर में 13 श्रावक-श्राविकाओं को पांच महाव्रत का संकल्प दिलाकर मुनि और साध्वी रूप में दीक्षित किया है। इससे पहले 28 जनवरी को उदासर, 2 और 23 अप्रैल को नोखा तथा 22 जून को नोखा में भी दीक्षा कार्यक्रम हुए। संघ के अनुसार नवदीक्षितों को शामिल करने के बाद वर्तमान संघ में 96 संत मुनिराज और 549 साध्वीजी हैं।

आचार्यश्री के नाम 494 दीक्षाओं का उल्लेख : 

आयोजकों के अनुसार आचार्यश्री रामलालजी युवाचार्य बनने के बाद अब तक 494 दीक्षाएं दे चुके हैं। उन्होंने 7 मार्च 1992 को बीकानेर के जूनागढ़ किला परिसर में आचार्यश्री नाना लालजी से युवाचार्य पद की जिम्मेदारी ग्रहण की थी। वर्ष 2001 में अक्षय तृतीया के अवसर पर आचार्यश्री ने एक साथ 11 मुमुक्षुओं को दीक्षा दी थी।