भाजपा प्रभारी राधेमोहन ने किया प्रहार, जवाब में गहलोत ने किया मानेसर का जिक्र
भाजपा के कई नेता पायलट पर सॉफ्ट कैसे ?
राज्य की राजनीति में यही सबसे बड़ा सवाल
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
राज्य की राजनीति में इस समय दो नेता दोनों ही पार्टियों के केंद्र में है। भाजपा की नेता व पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कांग्रेस के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट। राजे अभी भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है तो पायलट इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव। इन दोनों को ही लेकर नेताओं के बयान लगातार आते रहते है।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत व पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा सार्वजनिक व विधानसभा के फ्लोर पर अपने बयानों में भाजपा, राज्य सरकार पर तो करारा प्रहार करते है, मगर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के प्रति सदा सॉफ्ट रहते है। उनके पक्ष में बयान देते नजर आते है। और तो और, राज्य के दौरे पर आए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी भाजपा की आलोचना मगर राजे की तारीफ कर गये।
अब ऐसी ही कुछ स्थिति कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की दिखने लगी है। भाजपा नेताओं व पूर्व सीएम गहलोत के बयानों में पायलट को जगह मिलती है। मगर भाजपा के कई नेता उनको लेकर सॉफ्ट बयान भी देते दिखते है। पिछली सरकार में वे सीएम होने चाहिए थे, यह कहकर सॉफ्टनेस दिखाते है। उनके इस तरह के बयानों पर टिप्पणी करते हुए गहलोत फिर ' मानेसर ' राग छेड़ देते है। इतना तो दिख रहा है कि इन दिनों भाजपा नेताओं के व गहलोत के केंद्र में पायलट है।
भाजपा प्रभारी ने की शुरुआत:
भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन पहली बार टोंक के दौरे पर आए। कुछ जिला कार्यालयों के उद्घाटन व कुछ का शिलान्यास किया। टोंक में उनकी आम सभा भी रखी गयी। जिसमे उनके साथ सीएम भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ व भाजपा के राज्य प्रभारी राधेमोहन भी शामिल थे।
टोंक सचिन पायलट का विधानसभा क्षेत्र है। यहां से लगातार दो बार वे विधायक है और भारी अंतर से चुनाव जीते हुए है। जाहिर है, उन पर ही अधिक राजनीतिक प्रहार होंने थे। प्रभारी राधेमोहन ने पायलट को बहरूपिया बता दिया और कहा कि वे यहां के लोगों को ठगते है। एक पांव टोंक में और एक पांव दूसरी जगह रखते है।
राधेमोहन के बयान से भूचाल:
भाजपा प्रभारी के इस बयान से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया। पायलट समर्थकों ने राज्य में जगह जगह प्रभारी के पुतले जलाए और विरोध किया। पूर्व सीएम गहलोत कहां चुकने वाले थे, उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया दी।
गहलोत ने कहा कि पायलट की दोनों टांगे कांग्रेस में है। उनको मानेसर के बाद सब समझ आ गया है। अब भाजपा हमारे लोगों को कहीं नहीं भटका सकती। हम सब साथ है। गहलोत भाजपा प्रभारी के बयान का विरोध करते हुए एक बार फिर मानेसर राग छेड़ गये।
सचिन का संतुलित जवाब:
इस पूरे एपिसोड में सचिन पायलट का जवाब व व्यवहार राजनीतिक रूप से बहुत ही संतुलित था। उन्होंने कहा कि भाजपा की फूट डालने की राजनीति सफल नहीं होगी। टोंक की जनता का मुझ पर भरोसा है और मुझे वहां के लोग अपने परिवार के लगते है।
उनका कहना था कि मैने राजनीति में ओछे बयान कभी नहीं दिए है। न मैं अपनी भाषा व बयान के संस्कार को छोड़ना चाहता हूं। भाजपा सत्ता में उनको बयान देते समय सोचना चाहिए कि लोकतंत्र में विपक्ष का अपना एक स्थान होता है, उसे भी सम्मान देना चाहिए। मानेसर वाले गहलोत के बयान पर वे कुछ भी नहीं बोले। मगर पूरे राज्य में पायलट समर्थक अब भी राधेमोहन के बयान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है।
मदन राठौड़ का अजब प्रस्ताव:
इसी बीच भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पायलट को एक अजब प्रस्ताव देकर राजनीति को ज्यादा गर्मा दिया है। जिस तरह गहलोत व डोटासरा हमेशा वसुंधरा राजे को लेकर सॉफ्ट बयान देते है, उसी तरह राठौड़ ने बयान दिया।
उन्होंने पायलट को सीधे भाजपा में आने का निमंत्रण दे दिया। कहा कि उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा। गहलोत ने कहा कि दोनों टांगे कांग्रेस में है, पूरा शरीर कांग्रेस में है यह नहीं कहा। पायलट सच्चे राष्ट्रवादी है, उनको भाजपा में आने के लिए सोचना चाहिए।
राज्य की राजनीति का बड़ा सवाल:
अभी राज्य की राजनीति का बड़ा सवाल यही हो गया है कि भाजपा के खिलाफ पूरे देश मे स्टार प्रचारक के रूप में कड़ें प्रहार करने वाले सचिन पायलट पर राजस्थान के भाजपा नेता सॉफ्ट कैसे हो गए है। यह प्रश्न अभी राज्य की राजनीति का यक्ष प्रश्न बना हुआ है।