मराठी नहीं सीखी तो कैब ड्राइवरों का लाइसेंस रद्द होगा, महाराष्ट्र सरकार ने नियम बदल के आदेश जारी किया
RNE Network.
महाराष्ट्र सरकार ने एक बार फिर अपनी मातृभाषा मराठी के प्रति गहरा अनुराग दिखाया है। महाराष्ट्र में अब ओला, उबर और रैपीडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों को भी मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान रखना होगा, अन्यथा उनका लाइसेंस रद्द हो सकता है।
महाराष्ट्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1989 में किये संशोधनों के तहत सार्वजनिक सेवा वाहन चलाने की अनुमति , परमिट और उसके नवीनीकरण से जुड़ी शर्तों में मराठी के व्यावहारिक ज्ञान का शामिल किया गया है।
यह नियम इलेक्ट्रॉनिक मीटर से चलने वाली ऐप मोटर कैब पर भी लागू होगा। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने यह जानकारी दी है।
एक लाख को ट्रेनिंग:
सरकार ने पहले गैर मराठी भाषी ओटो और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा। करीब 1 लाख से ज्यादा ड्राइवरों के प्रशिक्षण पूरा करने की जानकारी भी सामने आई है।
राजस्थान में कब राजस्थानी ?
महाराष्ट्र सरकार के इस मातृभाषा प्रेम के बाद राजस्थान के लोगों के मन में एक बार फिर यह सवाल जाग गया है कि इस तरह से राजस्थान में मातृभाषा राजस्थानी के लिए प्रेम कब जागृत होगा। सबसे पुरानी राजस्थानी भाषा को न तो अभी तक संवैधानिक मान्यता मिली है और न ही इसे राज्य में दूसरी राज भाषा का दर्जा मिला है।
राजस्थानी के वरिष्ठ रचनाकार कमल रंगा ने कहा है कि राज्य सरकार को अब तो जागना चाहिए। राजस्थानी को महत्त्व देकर प्रदेश की अस्मिता की रक्षा करनी चाहिए। राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता मिलने और दूसरी राजभाषा बनाने से ही हमारी संस्कृति बचेगी। हर राजस्थानी के स्वाभिमान की रक्षा होगी।