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Bikaner से Rishikesh तक : चतुर्दशी को कुछ यूं तर्पण हुआ कि सैकड़ों लोगों की आँखों में नमी दिखी

 
सर्व पितृ अमावस्या को आखिरी तर्पण, इस दिन सभी को दे सकते हैं जलांजलि 

 

 

 

 

Rudra News Express Bikaner. 

कमर तक पानी में खड़े लोग अपने पूर्वजों को जलांजलि दे रहे थे। अचानक अनुष्ठान के मुख्य पंडित की आवाज गूंजी "काले तिल गीले कपड़े में डालो, इस कपड़े को सरोवर से बाहर की तरफ हाथ करके निचोड़ दो।" जो लोग इसका अर्थ जानते हैं उनके लिये यह भावुक कर देने वाला क्षण था। यह क्रिया करते हुए कइयों की आँखें भी नम थी। 

यह दृश्य श्राद्धपक्ष में चल रहे तर्पण के बीच आज यानी चतुर्दशी तिथि को विशेष तर्पण का है। दरअसल यह खास तर्पण देश की रक्षा के लिये काम आए शहीदों के लिये था। इसके साथ ही अपने उन परिचितों-परिजनों के लिये भी था जिनकी दुर्घटना या अन्य कारणों से अकाल मृत्यु हो गई। जाहिर है ऐसा करते वक्त वे चेहरे और मंजर आँखों के सामने घूमने लगते हैं। यही वजह है लगातार 14 दिन से चल रहे पितृ पक्ष के तर्पण में यह भावुक कर देने वाला क्षण था। 

बीकानेर के धरणीधर में तड़के 04 बजे से पितरों का मेला : 
 

बीकानेर के धरणीधर तालाब में पिछले 14 दिनों से अपने पूर्वजों, मृतक परिजनों और परिचितों की आत्मा की शांति के लिये तर्पण-अर्पण हो रहा है। एक तरफ पंडित नवरतन व्यास की अगुवाई में सुबह 04 से 08 बजे तक तीन पारियों में लगभग 200 लोग हर दिन जलांजलि दे रहे हैं। तिल, जौं, चावल, पुष्प आदि के साथ पितरों, देवताओं का अलग-अलग पूजन और ध्यान हो रहा है।

अंगुलियों में पवित्रा यानी कुशा की अंगूठी, हाथों में कुशा, शरीर पर भस्म और श्रद्धा से झुके सिर। मन ही मन चलती है प्रार्थना "हे पूर्वजों, हे पितृदेवों, तृप्त होवो, प्रसन्न होवो, शांत रहो और सुख-शांति समृद्धि प्रदान करो।" मनमोहन शर्मा, किशोर आचार्य, मांगीलाल व्यास, जेठमल,  उदय व्यास, राम बोहरा सहित सैकड़ों लोग अलग-अलग बैच में जलांजलि दे रहे हैं। इसी तालाब के दूसरे घाट पर नाथमलजी पंडित के शिष्य और उनकी टीम के सान्निध्य में इसी तरह तीन बेच में सैकड़ों लोग तर्पण कर रहे हैं। 

नाथसागर के कुंड में ममू महाराज का अनुष्ठान : 

हालांकि शहर के लगभग प्रत्येक सरोवर से लेकर वाटरपूल तक तर्पण के ऐसे अनुष्ठान हो रहे हैं लेकिन इनमें एक नाथसागर के कुंड में होने वाले अनुष्ठान की खास चर्चा हैं। यहां ज्योतिर्विद पंडित राजेन्द्र व्यास "ममू महाराज" की अगुवाई में पितरों के आह्वान, पूजन से लेकर भोग-अर्पण तक के आयोजन चल रहे हैं। यहां चतुर्दशी को बाकायदा शहीदों के तस्वीरों सहित उनके नाम लेकर तर्पण किया गया। 

..ऋषिकेश में शतायु नथमलजी करवा रहे अनुष्ठान :
 

पितरों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के ये अनुष्ठान पश्चिमी राजस्थान के धोरों से निकलकर ऋषिकेश के गंगातट तक चल रहे हैं। बीकानेर के बीसियों लोग पिछले 15 दिनों से ऋषिकेश में गंगातट पर तर्पण कर रहे हैं। यहां प्रकांड विद्वान पंडित नथमल जी पुरोहित के सानिध्य में हो रहे अनुष्ठान की चर्चा देशभर में हैं। महेश आचार्य, गणेश आचार्य सहित बीसियों लोग अलसुबह गंगा के बहते पानी में पितरों को जलांजलि दे रहे हैं। 

कल सबसे बड़ा तर्पण अनुष्ठान :
 

इन सबड़े बीच कल यानी 10 अक्टूबर को पितृ पक्ष का सबसे बड़ा तर्पण अनुष्ठान होने जा रहा है। दरअसल सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी पितरों के लिये एक ही दिन तर्पण किया जा सकता है, जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है उनके लिये भी इस दिन तर्पण होता है। ऐसे में यह पितृ पक्ष का आखरी और सबसे बड़ा तर्पण अनुष्ठान होगा। इस तर्पण के बाद यज्ञ भी होगा जिसमें आहुतियाँ दी जाएगी। 

अगर अब तक नहीं कर पाए तर्पण तो कल शामिल हो जाएं :

ऐसे में अब तक पितृ पक्ष के 14 दिनों में जो लोग किसी कारणवश पूर्वजों को तर्पण नहीं कर पाए हैं वे इस दिन सभी के एक साथ जलांजलि और तिल का भोग दे सकते हैं। इसके लिये किसी भी ऐसे नजदीकी अनुष्ठान स्थल पर जा सकते हैं जहां नियमित तर्पण हो रहे हैं। विशेष परिस्थिति में विद्वान पंडित को बुलाकर घर पर भी तर्पण किया जा सकता है।