शादियों में बैंड, खाना, सजावट जुटाने से मुश्किल लग रहा नोटों की नई गड्डी लाना!
RNE Network.
शादियों का जबरदस्त सीजन चल रहा है। चारों और बैंड-डीजे की धुन पर नाचते-बढ़ते बाराती नजर आ रहे हैं। शादीवाले घरों में उत्साह है लेकिन कमोबेश ऐसे हर शादी वाले घर में मुखिया को एक बात की चिंता सता रही है वह है शगुन के लिए नए नोटों की गड्डी। इसके लिए लोग बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं। अधिकांश बैंकों ने शादी वालों को नए नोट देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि नए नोट उपलब्ध नहीं है।
शादी वाले घर के एक मुखिया ने दुखी होते हुए कहा, जिस बैंक में खाता है वहीं गया था। पेमेंट लिया तो नए नोटों की गड्डी मांगी लेकिन यह कहते देने से मना कर दिया कि अभी नए नोट उपलब्ध नहीं है। एक अन्य व्यक्ति का अनुभव तो इससे भी बुरा है। वह बोले, मुझे पता चला कि बैंक में नए नोट उपलब्ध हैं। जब मैंने जिरह की तो जवाब मिला ‘मोदीजी छापते हैं नए नोट, जाओ उन्हीं से ले आओ।’
बीकानेर के बाजार में बिक रही नये नोटों की मालाओं का जिक्र करते हुए एक शख्स बोला, इन दुकानदारों को नए नोट कहां से मिलते हैं। ये नोटों की माला बनाकर उन्हें ऊंची कीमत पर बेचते हैं। यह एक तरह से नोटों की कालाबाजारी है। इसके अलावा मुद्रा नियमों का भी उल्लंघन है।
पहले शादी का कार्ड दिखाते ही मिलती थी गड्डी:
जानकारों का कहना है, कुछ समय पहले तक बैंक वाले उस परिवार को नए नोट की गड्डी आसानी से देते थे जिनके घर में शादी होती। इसके लिए शादी का कार्ड दिखाते और यह बताना होता कि यह शादी मेरे ही परिवार मंे हैं। इसे देखकर उपलब्धता और जरूरत के आधार पर नए नोट मुहैया करवा दिये जाते।
दूसरी ओर आरोप ये भी लग रहे हैं कि नए नोटों की ब्लैक मार्केटिंग हो रही है। आरोप है कि दलालों के पास नोटों का भंडार है। ये नए नोटों की गड्डियां ऊंचे दामों पर बेचते हैं। कहा जाता है कि हर नोट की गड्डी की कीमत फिक्स है लेकिन शादियों में डिमांड के साथ यह कीमत भी बढ़ जाती है। ऐसे मंे आशंका जताई जा रही है कि इसमें कहीं न कहीं बैंककर्मियों की मिलीभगत भी हो सकती है।