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जय मां : कड़ी साधना की ये तस्वीर देख, बड़े-बड़े तपस्वी नतमस्तक!

Rupa Devi : कीलों की सेज, पेट पर कलश, कलश पर दीपक, 09 दिन यूं ही निर्जल अनुष्ठान!

 

Rudra News Express.

पूरा देश इस समय नवरात्रा के चलते मां दुर्गा की भक्ति में लीन है। कहीं गरबा चल रहा है तो कहीं भव्य पंडालों में भगवती की आराधना हो रही है। घरों में घट स्थापित कर पूजन किया जा रहा है वहीं माता के मंदिरों में भक्तों की कतारें लगी। कोई व्रत-उपवास से मां को रिझाने का प्रयास कर रहा है तो कहीं पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार से माताजी को मनाया जा रहा है। इन सबके बीच झारखंड के एक छोटे से गांव की छोटी से झोंपड़ी से भक्ति और श्रद्धा की हैरान करने वाली तस्वीर आई है। तस्वीर ऐसी है जिसे देख लोग तपस्या करने वाली तपस्विनी को भी नमन कर रहे हैं।

रामगढ़ के बरकाकाना में भक्ति की शक्ति : 

ये तस्वीर झारखंड के रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र के पोचरा स्थित झोपड़ी टोला गांव से आई है। यहां रूपा देवी नाम की महिला नुकीली लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर मां भगवती की आराधना कर रही हैं। बात सिर्फ नुकीली कीलों पर लेटने की नहीं है वरन लेटने के बाद उनके पेट पर पीतल का कलश स्थापित है और कलश के ऊपर दीपक प्रज्वलित है। यह एक-दो घंटे का अनुष्ठान नहीं वरन नौ दिनों तक निर्जला व्रत रखकर की जा रही साधना है। 

 

12 किलो वजनी कीलों की सेज, 09 दिन : 

रूपा देवी नवरात्रा की स्थापना के दिन से ही इस अनुष्ठान में हैं। वे करीब 12 किलोग्राम वजन की नुकीली लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना कर रही हैं। उनके पेट पर स्थापित पीतल के कलश के ऊपर रखा दीपक लगातार 24 घंटे जलता रहता है।

03 सालों से कर रही ऐसा अनुष्ठान : 

तपस्विनी की पड़ोसी शीला देवी कहती है, रूपा देवी पहले पेट पर कलश रखकर और अग्नि के समक्ष बैठकर साधना करती थी। करीब 15 वर्षों तक इस तरह की साधना करने के बाद पिछले तीन वर्षों से वे नुकीली कीलों की सेज पर लेटकर मां भगवती की आराधना कर रही हैं। रूपा देवी की ननद मोनिका कहती है, वे पूरे क्षेत्र के कल्याण की भावना से साधना करती है।

पति, ससुराल वाले, बच्चे सभी जुटे : 

लगभग 13 साल पहले रूपा देवी की शादी राजेश राम से हुई थी। इनकेआठ वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार और छह वर्षीय बेटी अनन्या कुमारी हैं। परिवार के सभी सदस्य पूजा की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के सहयोग में जुटे हैं। साधना को देखने और माता के दर्शन करने के लिए महिलाएं, बुजुर्ग और युवा पहुंच रहे हैं। पूजा स्थल पर भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से भक्तिमय माहौल बना हुआ है।