जनरंजन : बीकानेर पुराना संभाग मगर अब भी कई सुविधाओं से महरूम, जन प्रतिनिधियों के प्रयास काफी, बजट नाकाफी, याद रहे, यह जिला नहीं संभाग मुख्यालय है, वैसा दिखे भी
मधु आचार्य ' आशावादी '
सुनो सरकार ! हम नगरवासियों का सौभाग्य है कि आप इस बार स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह के लिए दो दिन हमारे बीकानेर शहर में है। सरकार शहर में रहे, यह सौभाग्य की बात है। नहीं तो सरकार काम से आती है और निकल जाती है। सरकार जब किसी शहर में ठहरती है तो वो वहां की सुध भी अवश्य लेती है। इतना तो भरोसा इस लोकतंत्रीय व्यवस्था में हर बीकानेर वासी को है।
बीकानेर को बसे कितने साल हो गए, यह इतिहास बताने की जरूरत भी नहीं। धोरों के बीच जब राव बीका ने अपने पुरुषार्थ से इस शहर को बसाया तब उन्होंने भी एक बड़ा सपना देखा था। जोधपुर से चले और इस घोर रेगिस्तानी इलाके में आकर बीकानेर की थरपणा की। मुश्किलें, कठिनाईयों का अंबार था। पर परवाह नहीं की, क्योंकि मन में एक जज्बा था।
यहां पानी बहुत गहरे में है, यह एक समस्या हो सकती है, मगर यहां के आदमी भी गहरे हैं, यह बहुत बड़ी बात है। रेत के समंदर से लोग तेल निकाल लेते हैं, बीकानेर वासियों ने पानी निकाला है। अपना और अपनों का जीवन बचाया है। यहां हरियाली लाये, जिसकी कल्पना भी सम्भव नहीं थी। इस पश्चिमी सीमा के शहर को दुनिया के मानचित्र पर अंकित कराया, यह यहां के जिजीविषा रखने वाले नागरिकों का प्रताप है। कठिनाईयों को झेलना और उसे झेलते हुए रास्ता बनाना यहां के निवासी का नैसर्गिक धर्म है।
हमारा राजतंत्र भी सर्वप्रिय था
रियासतकाल में बीकानेर का राजघराना खूब चर्चा में रहा। यहां के उस समय के राजा बड़े दयालु और जनोन्मुखी थे। गंग नहर इसका जीता जागता प्रमाण है। पानी को तरसने वाले इस भूभाग में वे गंग नहर लाये, उस समय श्रीगंगानगर बीकानेर का ही हिस्सा था। वो बड़ा काम यहां के राजतंत्र ने किया, तभी तो आजादी के बाद देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां इंदिरा गांधी नहर लेकर आई।
यहां के राजतंत्र ने पीबीएम अस्पताल के लिए विशाल भूभाग छोड़ा। आज की सरकारें उसी पर तो स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही है। अकाल राजतंत्र में भी आता था, मगर राजघराना किसी को भूख से मरने नहीं देता था। उनके भोजन का स्वाभिमान से प्रबन्ध करता था। उस काल को सुकाल में बदलकर एक तरफ लोगों की रोटी की व्यवस्था करता था तो दूसरी तरफ इस शहर के लिए इमारतों का निर्माण करता था।
लोकतंत्र आया, तब भी उसमें उन लोगों ने विश्वास जताया। डॉ करणीसिंह जी 5 बार सांसद चुने हुए और अब उनकी पौत्री सिद्धि कुमारी जी 4 बार से विधायक है। यह बात इस बात का भी प्रमाण है कि यहां के पूर्व राजघराने का लोकतंत्र में भी पूरा विश्वास है।
अब आपका जिम्मा है सरकार
इन सब के बाद यह भी सत्य है कि आजादी के 75 साल बाद भी बीकानेर संभाग का वो विकास नहीं हुआ, जिसका वो हक रखता है। अब भी यह संभाग मुख्यालय अन्य संभागों से काफी पिछड़ा हुआ है। अनेक सुविधाओं का यहां अब भी अभाव है। जिनका हक़ यहां के बाशिंदों को विरासत में मिला है।
बीकानेर सरकार से बहुत अपेक्षा रखता है, भले ही वह किसी भी दल की सरकार हो। सरकार तो सरकार होती है। लोकतंत्र में राज भले ही पार्टी के नाम का होता है, मगर सरकार तो राज्य के 200 विधायकों, 25 लोकसभा सदस्यों व 10 राज्यसभा सदस्यों का होता है। बीकानेरी व्यक्ति इसी तरह सोच का सकारात्मक भाव रखकर जीता है। यह खासियत कम शहरों में ही देखने को मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों के प्रयास काफी थे, बजट नाकाफी था
बीकानेरवासी जानते हैं और मानते हैं कि उनके जनप्रतिनिधियों ने पूरे दम से बीकानेर को आगे ले जाने के प्रयास किये। दलीय सीमाओं को तोड़कर भी इस शहर के विकास के काम को तत्पर रहे। कुछ राज्य सरकार में मंत्री बने, तब उन्होंने भी प्रयास भरपूर किये। विधायकों ने खूब प्रयास किये। सांसदों ने भी अथक प्रयास किये। केंद्र सरकार में तो हमारी भागीदारी कम ही रही है।
हमारे 4 बार के सांसद अर्जुनराम मेघवाल ही केंद्र में बड़े मंत्री बने हैं। उनके भी बीकानेर के विकास के अथक प्रयास है। कांग्रेस, भाजपा, सीपीएम, समाजवादी पार्टी, निर्दलीय यहां के जनप्रतिनिधि चुने गए, उन सबने अपनी क्षमता से अधिक बीकानेर में विकास लाने का प्रयास किया। मगर सच यह भी है कि अब भी हम और हमारा बीकानेर बहुत पिछडा हुआ हैं।
सरकार ! हमारी अपेक्षाएं ये है
1.. हमारे यहां अब भी परिवहन एक समस्या है। यहां से रेल सेवाएं बहुत कम है। उनका विस्तार अब बहुत जरूरी है। बीकानेर जोधपुर, कोटा, जयपुर की तरह देश के हर बड़े शहर से रेल सेवा से जुड़ें, यह नागरिकों की अपेक्षा है।
2.. हवाई सेवा भी यहां न्यून है। जबकि यहां के लोग कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, असम, हैदराबाद आदि में रहकर व्यापार करते हैं। आना जाना लगा रहता है। हवाई सेवाओं का विस्तार होगा तो बीकानेर में व्यापार आएगा, उद्योग आएंगे, विकास होगा। शैक्षिक संस्थान खुलने की संभावनाएं बढ़ेगी।
3.. उधोगों की दृष्टि से बीकानेर अब भी बहुत पिछड़ा हुआ है। यहां उद्योग कम है। उद्यमी तभी यहां अपने संस्थान स्थापित करेंगे, जब उनको पूरी सुविधाएं मिलेंगी। उद्योग आएं, इस दृष्टि से बीकानेर के लिए अलग से मास्टर प्लान तैयार किया जाना चाहिए।
4.. आर्थिक दृष्टि से हमारे यहां का नगर निगम, विकास प्राधिकरण अभी तक भी पूरी तरह से सशक्त नहीं है। इनको आर्थिक मजबूती मिलेगी तो लाभ बीकानेर को होगा। लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होगी।
5.. बीकानेर ऐतिहासिक नगरी है। हैरिटेज की दृष्टि से खास। ऐतिहासिक इमारतों, तालाबों, मंदिरों व अन्य धार्मिक स्थलों, पार्कों आदि का संरक्षण जरूरी है। इस विषय पर सरकार ने पृथक से विभाग भी बनाया हुआ है। बीकानेर के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट बनाने की जरूरत है।
बीकानेर वासियों की बहुत से उम्मीदें सरकार के आने से जगी है, उन सबका उल्लेख तो सम्भव नहीं। मगर सरकार ! आप हमारे सांसद व देश के कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, लूणकरणसर विधायक व राज्य में मंत्री सुमित गोदारा बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास, बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी जी, खाजूवाला विधायक डॉ विश्वनाथ मेघवाल, नोखा विधायक सुशीला रामेश्वर डूडी, कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी और श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत से चर्चा करें, बीकानेर विकास को लेकर। साथ ही पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला, पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी, पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी, पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल, पूर्व विधायक बिहारी विश्नोई, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा आदि से भी बीकानेर विकास के सुझाव लें और भागीरथ बनकर बीकानेर संभाग को विकसित कर इसे अन्य संभागों के बराबर लाएं। ये शहर, यहां खुदगर्ज लोग आपको सदैव याद रखेंगे। सुनो ना सरकार !
विशेष पैकेज की जरूरत
सुनो सरकार ! जिस तरह केंद्र सरकार बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के कमजोर राज्यों के विकास के लिए विशेष पैकेज देती है, उसी तरह आज भी कमजोर संभाग मुख्यालयों व जिलों के लिए विशेष पैकेज की योजना बना सकते हैं। इससे अंतोतगत्वा विकास तो राजस्थान का ही होगा। सरकार के मुखिया भजनलाल शर्मा को बीकानेर सहित राजस्थान सदा याद रखेगा। सुनो हमारी सरकार !!