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नवरात्रा : जानें घटस्थापना का मुहूर्त, यूं करे मां शैलपुत्री की पूजा!

शारदीय नवरात्रा : सुबह घटस्थापना नहीं कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त श्रेष्ठ, पहले दिन मां शैलपुत्री का पूजन!

 

Rudra News Express Bikaner. 

शारदीय नवरात्रा आज 11 अक्टूबर रविवार से शुरू हो गए हैं। शक्ति और भक्ति के साथ समृद्धि लाने वाले इस उत्सव का शुभारंभ घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना से होगा। कलश स्थापना और देवी शक्ति का आह्वान करके पूजन प्रारंभ करने से शुभ फल मिलने की मान्यता है।

घटस्थापना का मुहूर्त एवं महत्व : 

  • मुख्य घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:35 बजे से 10:27 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:47 बजे तक

दरअसल घटस्थापना को नौ दिवसीय उत्सव के आरम्भ का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है। गौरतलब है कि शास्त्रों में घटस्थापना के समय का विशेष महत्व बताया गया है। अनुचित समय पर घटस्थापना करने से देवी शक्ति का प्रकोप होने की आशंका भी जताई जाती है। अमावस्या तथा रात्रिकाल में घटस्थापना करना वर्जित होता है।

प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक-तिहाई भाग घटस्थापना के लिए विशेष शुभ माना जाता है। यदि इस अवधि में घटस्थापना संभव न हो, तो अभिजित मुहूर्त का उपयोग किया जाता है।

कौन है मां शैलपुत्री जिनकी पहले दिन पूजा : 

नवरात्र प्रतिपदा यानी पहले दिन देवी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। चूंकि देवी सती ने आत्मदाह के बाद पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित रहता है। उन्हें मां पार्वती और मां हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। मां शैलपुत्री का संबंध चंद्रमा से है। उनकी आराधना से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

प्रिय पुष्प और मंत्र : 

 मां शैलपुत्री का प्रिय पुष्प चमेली है। ऐसे में पहले दिन पूजन के समय चमेली का पुष्प अर्पित करने से देवी प्रसन्न होती है। देवी का पूजा मंत्र "ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥" इसके साथ ही इस मंत्र से प्रार्थना की जाती है : 
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥