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100 ट्रेनों में 55 किमी की रफ्तार नहीं, फिर भी वसूला सुपरफास्ट सरचार्ज

 

RNE Network.

भारतीय रेल में सीट रिजर्व कराते समय हम अक्सर सुपर फास्ट जुड़ा हुआ देखते हैं। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ( सीएजी ) की रिपोर्ट से पता चला है कि रेलवे ने यात्रियों से 168 करोड़ रुपये का सुपरफास्ट सरचार्ज वित्त वर्ष 2022 - 23 में वसूला था।
 

जबकि जांच में पता चला है कि रेलवे की 100 ट्रेनें ऐसी है जो सुपरफास्ट का दर्जा पाने की तय औसत गति ही पूरी नहीं करती। 
 

यह चार्ज रेलवे उन ट्रेनों के लिए लेता है जिनकी ओसत गति कम से कम 55 किमी प्रति घंटा तक होती है। इससे कम  ओसत गति से चलने वाली ट्रेनें मेल या एक्सप्रेस श्रेणी में आती है। सीएजी ने रेलवे के इंटीग्रेटेड कोच मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों की जांच की। पता चला कि चिन्हित 190 से ज्यादा ट्रेनों में से 100 ट्रेनें मार्च 2026 तक भी 55 किमी प्रति घंटा की औसत गति प्राप्त नहीं कर सकी। 
 

उसके बाद भी इन ट्रेनों में यात्रा करने के लिए यात्रियों से सुपरफास्ट सरचार्ज वसूला गया। ट्रेनों में फर्स्ट से लेकर थर्ड एसी, स्लीपर क्लास और जनरल कैटेगरी के लिए अलग अलग सुपरफास्ट सरचार्ज होता है। यह 15 से 75 रुपये तक होता है।