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नये साल पर नागरिक शहर के खेवनहारों से मन से कुछ चाहता है, वो मिलेगा तो ये शहर माननीयों को सदा याद रखेगा।

जिम्मेदार नागरिक की तरफ से है ये पाती, उन सबके नाम जो शहर के अलग अलग क्षेत्रों को चलाते है। साल के पहले दिन विनम्र भाव से उन सबसे हम्बल रिक्वेस्ट। 🙏🙏
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.

हे मेरे शहर के संचालकों। इस छोटी काशी बीकानेर में मैंने भी जन्म लिया है। मेरी भी अपेक्षाएं है, उसे तो जानिए। उनको अब तो मानिए। मैं साधारण नागरिक, आप शहर के नियंता, इस कारण आपसे ही गुहार। साल के पहले दिन एक साधारण नागरिक की हर नियंता के नाम संवेदना से भरपूर रिक्वेस्ट।

माननीयों, नेताओं से गुजारिश:

मेरे शहर के हे माननीयों! आजादी को 75 साल बीत गए। हम संभागीय मुख्यालय में रहते है, मगर सुविधाएं एक तहसील जितनी भी नहीं। वोट, कुर्सी पर तो आपने बहुत गौर कर लिया, अब इस तरफ भी गौर कीजिए। हमने आपको चुनाव जीता दिए, उस कारण से आप में से कई मंत्री बन गए। हम अब भी वहीं के वहीं खड़े हुए हैं।

हम नागरिकों की गुजारिश है कि आप चुनाव में आमने - सामने रहें, मगर विकास में जोधपुर व कोटा के माननीयों की तरह साथ आयें। अगर आप साथ आये तो शहर के बीच के रेलवे फाटक हटेंगे, ओवरब्रिज - अंडर ब्रिज बनेंगे, बीकानेर को हाईकोर्ट की बैंच मिलेगी, नई गाड़ियां मिलेगी, हवाई सेवा मिलेगी, अच्छी सड़कें मिलेगी, कल कारखाने मिलेंगे, लोगों को रोजगार मिलेंगे, ये शहर भी सिंगापुर जैसा होगा। आप हम नागरिकों की भावना के अनुरूप चुनाव में राजनीतिक लड़ाई लड़ते हुए भी चुनाव के बाद कोटा, जोधपुर के नेताओं की तरह साथ तो आईए। हम भी साथ देंगे, बीकानेर को समृद्ध करेंगे।
 

हे ब्यूरोक्रेशी, इसेअपना शहर मानिए:

ब्यूरोक्रेशी के सिरमौर माननीयों, जानता हूं आप यहां स्थायी रहने के लिए नहीं आये। सरकारें आपको अपने हिसाब से बारबार स्थानांतरित करती रहती है। आगे भी करेगी। मगर आपने पाया होगा कि बीकानेर जैसा शांत, शालीन शहर कोई नहीं। आप रिटायर होकर यहां बसें, ये हम नागरिकों की अपील है।

 

जब तक एक ब्यूरोक्रेट के रूप में बीकानेर में है, इसे अपना ही शहर मानने की कृपा करें। तभी ये शहर आगे बढ़ेगा, यहां के लोग आपको दुआ देंगे। आपके बिना माननीय नहीं चल सकते, उनकी हर सफलता में आप निहित है। आप इसे अपना शहर मान स्थायी विकास की योजनाएं इन नेताओं को देकर स्वीकृत कराइये, ये शहर आपको सदा याद करेगा। उसी से प्रेरित हो आपको रिटायरमेंट के बाद यहीं बसने की मार्मिक अपील करेगा।

कानून के रखवालों से भी अपील:

बीकानेर धर्म भीरू है। यहां हर मोहल्ले में मंदिर मिलेगा। अनेक मस्जिदें मिलेंगी। गुरुद्वारा और चर्च भी यहां पर है। फिर भी साम्प्रदायिक सद्भाव है। तभी तो इस शहर ने कभी कर्फ्यू नहीं देखा। मगर दुख है कि पिछले कुछ समय से यहां अपराध बढ़े है, नशा बढ़ा है, सट्टा बढ़ा है। कुछ नए अपराध भी बढ़े है।

 

विश्वास रखिये, यहां का आम नागरिक इन अपराधों को नहीं चाहता। इनसे नफरत करता है। आप पुलिस है, आपकी वर्दी के प्रति भले लोगों के दिल में सम्मान है। हम सीधे नागरिक आपसे अपील करते है कि इन अपराधों को नेस्तनाबूत करिए। नेताओं की सिफारिशें आएगी, धमकाया जाएगा, तबादले का डर दिखाया जायेगा, भरोसा रखिये ईश्वर आपके साथ होगा, कोई आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा। हम जैसे नागरिक आपके साथ रहेंगे। यदि आपने जज्बे से अपराधियो पर नकेल डाल दी तो बीकानेर सदा सदा आपको याद रखेगा।

सेहत के रखवालों से अपील:


बीकानेर के लोगों की या यूं कहें कि बीकानेर की सेहत का जिम्मा आपके पास है माननीय चिकित्सकों। आपसे गुजारिश है कि गरीबों की मदद कीजिये। सॉफ्ट रहकर हर मरीज को दिलासा दीजिए। आप भगवान का रूप है, दया और माफी का वरण कीजिये। लोग गुस्से में जो अनुचित व्यवहार करते है, उनको भी शर्म आयेगी। वे भी अपनी बुरी आदत छोड़ेंगे। आप बीकानेर के लोगों को, शहर को सेहतमंद बनाइये, लोग आपकी सम्मान के साथ पूजा करेंगे।

श्रोताओं पर रहम करो सरस्वती पुत्रो:

बीकानेर को कला, सहित्य व संस्कृति की विरासत माना जाता रहा है। क्योंकि यहां बड़े बड़े हिंदी, उर्दु और राजस्थानी के साहित्यकार हुए है। मगर इन दिनों तीनों भाषाओं में समर्पित भाव से काम करने वालों के साथ कुछ बहरूपिये, चिंदी चोर, बुरे लोग, पैसे के बल पर अदब को हथियाने वाले लोग इन क्षेत्रों में आ गए है। जो श्रोताओं पर जुल्म करते है। साहित्य के साथ बलात व्यवहार करते है। केवल अखबारों में छपने की जुगत भिड़ाते है। इनसे बचिए, इनसे बचाइए। अच्छे और सच्चे अदबी लोगों को तवज्जो दीजिए। तभी हम पुराने गौरव को प्राप्त कर सकेंगे।