एक बार फिर फ्लोर मैनेजमेंट रहेगी बड़ी समस्या, मंत्रियों की अधूरी तैयारी उलझायेगी सरकार को
सत्र हंगामेदार रहने के आसार
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
राज्य विधानसभा का बजट सत्र आरम्भ हो रहा है। इस सत्र में उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री दिया कुमारी भजनलाल सरकार का तीसरा बजट पेश करेगी। इस लंबे सत्र में बजट से पहले कुछ दिनों का अवकाश भी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने बजट से पहले अलग अलग वर्गों से चर्चा कर उनके सुझाव लिए है। ठीक इसी तरह सभी प्रभारी मंत्रियों को उनके जिलों में भेजकर वहां की अपेक्षाओं को जाना है। सभी विधायकों से संभागवार चर्चा कर उनकी मांगों व आवश्यकताओं को जाना है। यह कवायद इसलिए है ताकि राज्य के बजट में इनको शामिल किया जा सके। जन भावनाओं को बजट परिलक्षित करे।
भजनलाल सरकार इस बजट से ताकड़ी पर रहेगी। क्योंकि एक तरह से सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। क्योंकि अंतिम वर्ष तो चुनावी होता है। इस कारण यह बजट खास होगा। जनता अपनी ताकड़ी में अब से सरकार को तौलना शुरू कर देगी। सरकार को लेकर परसेप्शन इस समय से ही बनना शुरू होता है। इस कारण अब से भजनलाल सरकार ताकड़ी पर रहेगी।
फ्लोर मैनेजमेंट फिर बड़ी समस्या:
इस सरकार के कार्यकाल में विधानसभा के भीतर सरकार के सामने जो बड़ी समस्या रही है, वह है फ्लोर मैनेजमेंट की। अब भाजपा के पास राजेन्द्र राठौड़, सतीश पूनिया जैसे नेता सदन में नहीं है। इस कारण अक्सर समस्या होती है। वहीं विपक्ष के पास गोविंद डोटासरा, टीकाराम जुली, श्रवण चौधरी, रीटा चौधरी, वोहरा, रफीक खान जैसे दिग्गज है। मंत्री अक्सर उनके सवालों में उलझकर रह जाते है। विपक्ष के पास संख्या बल भी ज्यादा है, उसका अपना दबाव रहता है।
इस वजह से ही भाजपा विधायक दल की बैठक में विधायकों को इस बात के लिए तैयार किया गया कि वे विपक्ष के हमलों का जवाब मिलकर दें। विपक्ष को घेरे। अब बैठक का नतीजा क्या रहता है, यह तो फ्लोर पर पता चलेगा।
मंत्रियों को पूरी तैयारी रखनी होगी:
सदन में पिछले 2 सालों में देखा गया है कि मंत्री अक्सर विपक्षी और कई बार तो सत्ता पक्ष के विधायकों तक के जवाब सही रूप में नहीं दे पाते। घिर जाते है। तब बीच में संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल व मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग को बीच बचाव करना पड़ता है। कई बार तो जवाब पूरा न मिलने पर जबरदस्त हंगामा होता है और विपक्ष हावी हो जाता है। इस बार मंत्रियों को पूरी तैयारी के साथ सदन में रहना होगा। हर बार विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी उनको बचा नही पाएंगे।
एक खेमे की चुप्पी सतायेगी:
विधानसभा में सत्ता पक्ष के विधायकों का एक खेमा है जो अक्सर चुप रहता है और टकराहट को देखता भर रहता है। कई बार इस खेमे के विधायक अपने सवालों से भी सरकार के सामने समस्या पैदा करते है। ये सभी वरिष्ठ विधायक है। कालीचरण सर्राफ, बाबूसिंह राठौड़, श्रीचंद कृपलानी आदि अक्सर चुप रहते है। यदि वे इस सत्र में भी चुप रहे तो सरकार के सामने संकट आएगा। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे वैसे भी सदन में नहीं आती। उनके साथी विधायक भी चुप ही रहते है। ये बड़ी समस्या है।
सत्र हंगामेदार रहने के आसार:
विधानसभा का बजट सत्र खासा हंगामेदार रहने के आसार है। क्योंकि अंता उप चुनाव भाजपा हारी है। सीएम व वसुंधरा के सक्रिय होने के बाद भी इस उप चुनाव में भाजपा को हार मिली थी।
इसके अलावा कांग्रेस मनरेगा को बदलने से भी हमलावर रहेगी। केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध विधानसभा में होता दिख रहा है। इस बार का बजट सत्र कई नए राजनीतिक मुद्दे भी खड़े करेगा।