Panchana Bandh : वार्ता बेनतीजा, बढ़ रहा तनाव, आज फिर होगी बैठक, किसानों का आंदोलन जारी
RNE Karauli-Rajasthan.
पूर्वी राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई स्रोतों में शामिल पाँचना बांध को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पानी की निकासी और वितरण को लेकर आमने-सामने आए कमांड एरिया के किसान और गुड़ला पाँचना संघर्ष समिति के बीच मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय वार्ता भी किसी अंतिम समाधान तक नहीं पहुंच सकी। संभागीय आयुक्त नलिनी कठौतिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न—बांध से पानी छोड़े जाने—पर सहमति नहीं बन पाई। अब बुधवार को फिर बैठक बुलाई गई है।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
पाँचना बांध करौली जिले की जीवनरेखा माना जाता है। इस बांध का पानी वर्षों से सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए उपयोग किया जाता रहा है। वर्तमान विवाद इस बात को लेकर है कि बांध में उपलब्ध पानी का उपयोग किस प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
एक पक्ष कमांड एरिया के किसान हैं, जिनका कहना है कि खरीफ सीजन शुरू हो चुका है और फसलों की बुवाई के लिए तत्काल नहरों में पानी छोड़ा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि समय पर सिंचाई नहीं मिली तो हजारों किसानों की फसलें प्रभावित होंगी।
दूसरी ओर गुड़ला पाँचना संघर्ष समिति का कहना है कि बांध क्षेत्र और आसपास के गांवों की दीर्घकालिक जरूरतों, पेयजल सुरक्षा तथा प्रस्तावित लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को ध्यान में रखे बिना पानी छोड़ना भविष्य में संकट खड़ा कर सकता है।
अब तक क्या-क्या हुआ?
* किसानों ने नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।
* प्रशासन ने विवाद सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत की।
* मंगलवार को संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
* बैठक में दोनों पक्षों ने विस्तार से अपना पक्ष रखा।
* कुछ तकनीकी और विकास संबंधी मुद्दों पर सहमति बनी।
* लेकिन पानी छोड़ने के मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
किसान क्यों हैं आक्रोशित?
कमांड एरिया के किसानों का कहना है कि मानसून की अनिश्चितता के बीच सिंचाई के लिए बांध का पानी बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि लंबे समय से उनकी मांगों को टाला जा रहा है।
किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई का समय निकल रहा है। नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला। जब तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। इसी कारण क्षेत्र में किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
सरकार का रुख क्या है?
सरकार फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। बैठक में प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि लिफ्ट सिंचाई योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। क्षेत्र से जुड़े लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। 15 सितंबर तक कई लंबित कार्यों में प्रगति सुनिश्चित करने का प्रयास होगा। सभी पक्षों की सहमति से समाधान निकालने की कोशिश जारी रहेगी। सरकार का जोर फिलहाल टकराव की बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने पर है।
आज की बैठक क्यों महत्वपूर्ण?
बुधवार को प्रस्तावित बैठक को निर्णायक माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि दोनों पक्ष कुछ साझा बिंदुओं पर सहमत होकर समाधान का रास्ता निकाल सकते हैं। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल आश्वासनों से बात नहीं बनेगी। उनका कहना है कि उन्हें पानी छोड़ने का स्पष्ट निर्णय चाहिए।
क्या हैं संभावित असर?
यदि विवाद लंबा खिंचता है तो खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। क्षेत्र में किसान आंदोलन और उग्र हो सकता है। प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है। सिंचाई और पेयजल प्रबंधन दोनों चुनौती बन सकते हैं। फिलहाल पूरे करौली और आसपास के कृषि क्षेत्र की नजर आज होने वाली बैठक पर टिकी हुई है। यह बैठक तय करेगी कि पाँचना बांध का विवाद बातचीत से सुलझता है या किसानों का आंदोलन और तेज होता है।