काशी में बीकानेर के पंडितों के साथ गायत्री पुरश्चरण करते पंडित नारायण व्यास ने मोक्ष के मंत्र पढ़ते यूं देह त्याग दी, वीडियो नहीं होता तो भरोसा नहीं होता!
सतीश ओझा-नापासर।
Rudra News Express Bikaner-Kashi.
ये वीडियो सही है या नहीं इसकी पुष्टि करने में तीन दिन लग गए और जब पता चला कि यह पूरी तरह सही है तो मुंह से निकला-अद्भुत, इसे कहते हैं महाप्रयाण!
पहले जानें क्या है वीडियो में :
बड़ा हॉल। बीसियों विद्वान पंडित कर रहे मंत्रोच्चार। इन सबके बीच मुख्य पंडित की तरह मौजूद एक शख्स पंडित नारायण व्यास। चेहरे पर तेज। हाथ में माइक। आवाज में आस्था का विश्वास और भक्ति में लीन लय। तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
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पंडित व्यास मंत्रोच्चार करते हुए उस श्लोक तक पहुंच गए जिसमें मोक्ष की आकांक्षा की जाती है। मंत्र पढ़ा, माइक पास बैठे दूसरे युवा पंडित को थमाया। गर्दन आगे झुकाई मानो भगवान के श्रीचरणों में दंडवत कर रहे हो। इस दौरान मंत्रोच्चार चलता रहा और कुछ क्षण तक पास बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे दूसरे पंडितों को भी अहसास नहीं हुआ कि नारायणदास जी की आत्मा ने देह को त्याग दिया है।
प्रत्यक्षदर्शी से जानिए - कहाँ, क्या हुआ घटनाक्रम :
दरअसल यह वीडियो काशी (बनारस) के अस्सी घाट स्थित दक्षिणामूर्ति मठ से आया है। इस मठ में गायत्री पुरश्चरण के पाठ चल रहे थे। इस अनुष्ठान में बीकानेर के पंडित काफी संख्या में मौजूद थे और मंत्रोच्चार कर रहे थे। इन्हीं में एक वरिष्ठ और विद्वान पंडित नारायण दास व्यास पूरी तल्लीनता के साथ मंत्रोच्चार किये जा रहे थे।
इसमें उनके साथ मौजूद नापासर के पंडित प्रह्लाद आसोपा ने "Rudra News Express" को पूरा घटनाक्रम बताया। कहा, वीडियो पूरी तरह सही है, मैं उस पुरश्चरण में शामिल था और नारायणदास जी के सामने ही बैठ मंत्रोच्चार कर रहा था।
मोक्ष का मंत्र पढ़ते ही प्राण त्यागे, आदि शंकराचार्य से जुड़ी कथा :
अनुष्ठान में शामिल प्रत्यक्षदर्शी प्रह्लाद आसोपा इस घटना के साथ आदि शंकराचार्य की कथा का जुड़ाव करते हैं। वे कहते हैं कि जो मंत्रोच्चार चल रहा था ये बिल्कुल वही था जो आदि शंकराचार्य ने अपनी माता के लिए किया था और मोक्ष मिला था। कहते हैं आदि शंकराचार्य को उनकी माता ने इस शर्त पर संन्यास धारण की इजाजत दी कि जब अंत समय आए तो बेटा सामने हो। इसी शर्त को पूरा करने आदि शंकराचार्य मां के पास पहुंचे। सात श्लोक पढे। आठवें श्लोक में मोक्ष की कामना की। देवधिदेव रूप में दर्शन करवाए लेकिन मां की इच्छा के अनुरूप बैकुंड से गरुड पर स्वयं भगवान विष्णु आए। उनके दर्शन के साथ प्राण त्यागे और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कब हुआ ये आत्मा का परमात्मा से मिलन :
ये घटना 05 अक्टूबर की है। श्राद्धपक्ष की दशमी को मंत्रोच्चार करते हुए देह का त्याग करने वाले नारायण दास व्यास मूल रूप से सोलापूर के हैं और वहीं से बनारस आए थे। बीकानेर में उनकी रिश्तेदारी है और यहां के रिश्तेदार और परिचित पंडितों के साथ ही गायत्री पुरश्चरण का पाठ कर रहे थे।