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PBM Trauma Centre : 28 इंच लंबी लोहे की एंगल घुटने से आर-पार, डॉ. खजोटिया-डॉक्टर सर्वेश की टीम ने ऑपरेशन कर बचाई जान!

 

आर-पार हुई लोहे की एंगल निकाली,मरीज सुरक्षित, पैर की नसें पूरी तरह काम कर रहीं

Rudra News Express Bikaner. 

पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बीती रात दुर्घटना में घायल एक मरीज ऐसी हालत में पहुंचा कि देखने वालों के होश उड़ जाएं। वजह- लोहे का 28 इंच लंबा तिकोना एंगल जांघ के नीचे होते हुए घुटने में से आर-पार था। खून बह रहा था और मरीज की हालत गंभीर थी। इमरजेंसी सर्जरी की जरूरत थी लेकिन मामले केवल एक एंगल घुसने या उससे हड्डी टूट जाने तक का नहीं था। चिंता यह भी थी कि घुटने में फंसी रॉड से पैर की नसों और रक्तवाहिकाओं को नुकसान पहुँच है या नहीं। इतना ही नहीं अगर अब तक नुकसान नहीं भी पहुंचा है तो सर्जरी कर लोहे का एंगल निकालते समय भी यह नुकसान हो सकता है। 

 

ऐसे में मरीज के लिए जितना तकलीफदेह ऑपरेशन था उतना ही डॉक्टर्स के लिए चुनौती भरा काम। यही वजह है सिर्फ ऑर्थो की टीम की बजाय विशेषज्ञों की बड़ी टीम बनी। ट्रॉमा सेंटर निदेशक एवं अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एल. खजोटिया अपनी टीम के साथ जुटे वहीं  सीटीवीएस सर्जन डॉ. सर्वेश भी नेतृत्व में साथ रहे। डॉ. विक्रांत, डॉ. कमल और डॉ. राजेंद्र मीना के साथ एनेस्थीसिया से डॉ. हर्षिता और डॉ. अनीश को शामिल किया गया। सारी तैयारियां कर ऑपरेशन शुरू किया गया जो लगभग दो घंटे तक चला। इसके बाद जब डॉक्टर OT से बाहर आए तो उनके चेहरों पर सफलता की चमक थी। 

 

कौन मरीज, कैसा ऑपरेशन : 

ट्रॉमा सेंटर निदेशक एवं अस्थिरोग विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एल. खजोटिया ने बताया कि घड़साना (श्रीगंगानगर) के 12 एमएलडी निवासी पप्पी खान गुरुवार दोपहर करीब एक बजे सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें दोपहर बाद पीबीएम ट्रॉमा सेंटर की आपातकालीन इकाई में लाया गया। उनके बाएं घुटने के पार्श्व हिस्से में त्रिकोणीय आकार की लोहे की रॉड धंसी हुई थी। इसकी लंबाई करीब 28 इंच और चौड़ाई लगभग 4 सेंटीमीटर थी। मरीज होश में था, लेकिन घाव से रक्तस्राव हो रहा था। घुटने में सूजन और विकृति भी थी।

 

नसों और रक्तवाहिकाओं को सुरक्षित रखना थी बड़ी चुनौती : 

डॉ. खजोटिया के अनुसार, मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए आवश्यक तैयारियों के बाद रात करीब 8:30 बजे उसे आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया। घुटने में फंसी रॉड को निकालते समय पैर की नसों और रक्तवाहिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का खतरा था। इस चुनौती को देखते हुए कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सर्वेश को भी ऑपरेशन में शामिल किया गया।

ऑपरेशन से पहले हड्डियों, लिगामेंट, रक्तवाहिकाओं और नसों की जांच कर आवश्यक प्रबंधन किया गया। इसके बाद करीब दो घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में लोहे की रॉड को सुरक्षित रूप से निकाल लिया गया। घाव की पूरी जांच और उपचार के बाद ड्रेसिंग की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्वस्थ बताई गई है। पैर की नसें पूरी तरह कार्य कर रही हैं और घुटने को सुरक्षित रखने में सफलता मिली है।

 

याद आया बीकानेर का वो हादसा : 

कुछ ऐसा ही हादसा बीकानेर में कई साल पहले हुआ। एक लोहे की रोड बाइक पर जा रहे शख्स के कमर में से होते हुए बाजू के आर-पार निकल गई। मतलब यह कि उसका बाजू और काम को लोहे की रोड से पिरो दिया गया। लगभग 12 साल पुराने इस मामले में भी PBM Hospital के पुराने परिसर में ऑपरेशन हुआ। तब भी डॉक्टर खजोटिया के साथ वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर मोहम्मद सलीम और उनकी टीम जुटी। सुखद यह हुआ कि ऑपरेशन सफल रहा और मरीज पूरी तरह ठीक हो गया।