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पंचायत चुनाव की धीमे धीमे कमान संभाल रहे पायलट, डोटासरा व हरीश चौधरी से नजदीकियां, हेमाराम जी की भूमिका

गहलोत का मौन भी शोर से कम नहीं, अभी और बदलेगी स्थितियां
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
 

राजस्थान कांग्रेस के भीतर की राजनीति कड़ाके की ठंड के मध्य भी गर्म है। बाहर से ठंड के कारण ठिठुरती दिख रही राजनीति के पीछे अलाव जलता सा प्रतीत हो रहा है। कांग्रेस नेताओं की घर वापसी भी उसी राजनीति का एक हिस्सा है, जिसके लिए गोपनीय स्तर पर खूब प्रयास हुए है। यदि राजनीति के जानकारों की मानें तो अभी तो बड़ी संख्या में वे कांग्रेसी नेता वापस घर वापसी करेंगे, जो पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव के समय पार्टी छोड़ के गये थे।

इन नेताओं को सप्रयास वापस लाया जा रहा है, जबकि परसेप्शन ये बनाया जा रहा है कि भाजपा के भीतर नेताओं की कोई कद्र नहीं हो रही। ये नेता वहां जाकर घुटन महसूस कर रहे है। ये परसेप्शन बन भी रहा है, जो भाजपा के लिए चिंता की बात है।

वागड़ के कद्दावर आदिवासी नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीय की घर वापसी एक बड़ा अलर्ट है भाजपा के लिए। भाजपा इस आदिवासी नेता के जरिये वागड़ में आदिवासी पार्टी को शिकस्त देने की बड़ी रणनीति बना रही थी, वो धूमिल की है मालवीय ने। अभी तो कुछ और नाम भाजपा को चकित करेंगे, भीतर ही भीतर उनको कांग्रेस में लाने की तैयारी हो चुकी है। कांग्रेस में वापसी करने वाले अधिकतर नेता पूर्वी राजस्थान से है, इसमें कई नाम तो ऐसे है जो हरेक को चकित कर देंगे। 

पूर्वी राजस्थान पर जोर है:

कांग्रेस सबसे पहले उन नेताओं की सप्रयास घर वापसी करा रही है जो पूर्वी राजस्थान के है। ये नहीं भूलना चाहिए कि 2019 में कांग्रेस की सरकार पूर्वी राजस्थान में बड़ी सफलता के कारण बनी थी। जिसमें सचिन पायलट की बड़ी भूमिका थी। ठीक इसी तरह 2024 में भाजपा सरकार बनी तब उसे पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस से ज्यादा सफलता मिली थी। ये वो दौर था जब कांग्रेस में गहलोत v/s पायलट का संघर्ष चल रहा था और चुनाव की कमान गहलोत के पास थी।

पूर्वी राजस्थान में गुर्जर, मीणा, जाट, आदिवासी बेल्ट पूरी तरह से सचिन पायलट के साथ था। वही समीकरण वापस 2029 के चुनाव के लिए बनाए जा रहे है। इससे ये भी लगता है कि इस काम मे पायलट ही लगे है और उनको साथ गोविंद डोटासरा व हरीश चौधरी का है। ये नया समीकरण ही कांग्रेस के भीतर की राजनीति में गर्मी लाये हुए है।

पंचायत चुनाव की कमान की बात !

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य में जो पंचायत चुनाव होने वाले है, उसकी कमान धीरे धीरे सचिन पायलट अपने हाथ में ले रहे है। इस काम में उनको जरूरत डोटासरा व हरीश चौधरी की है, जिनको उन्होंने हेमाराम जी चौधरी के जरिये साधा है। धोरीमन्ना के आंदोलन में अगुवाई हेमाराम जी कर रहे थे और उन्होंने श्रेय पूरा पायलट व उनके साथ आये डोटासरा व हरीश चौधरी को दे दिया। इसी स्टेप से ये माना जा रहा है कि पायलट इस बार पंचायत चुनाव की कमान संभाल रहे है। धोरीमन्ना से पूरी तरह से इन नेताओं ने अशोक गहलोत व उनके समर्थक मेवाराम जैन व अमीन खान को किनारे कर नेपथ्य में डाल दिया। ये भी बदलते राजनीतिक समीकरण के रूप में देखा जा रहा है।

गहलोत का मौन सामान्य तो नहीं:

इन सब हालातो के मध्य पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चुप है। सब जानते है कि वे राजनीति में चुप भी रहते है तो उसका कोई अर्थ होता है। इस बार की चुप्पी के पीछे भी कोई तो शोर छिपा हुआ है। वो समय पर ही गहलोत सामने लाएंगे।

हालांकि ये भी सही है कि काफी दिनों से केंद्र की कांग्रेस राजनीति में भी वे सक्रिय नहीं दिख रहे। मगर सब जानते है कि गहलोत को नजरअंदाज करना इतना आसान भी नहीं है। गहलोत समय पर ही अपने पत्ते खोलते है।

पंचायत चुनाव सब साफ करेगा:

राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनाव में ही कांग्रेस के भीतर की राजनीति पर पड़ा पर्दा साफ होगा। उससे ही पता चलेगा कि अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कमान किस नेता के हाथ मे रहेगी।