बैंगनी आलू : Hidden Hunger का समाधान यह बायोफोर्टिफाइड आलू, ICAR के रंगीन आलू की किस्मों में कुफरी जामुनिया खास!
Rudra News Express New Delhi.
खाने से पेट तो भर जाता है लेकिन कई बार पोषक तत्व उतने नहीं मिल पाते जितनी शरीर को जरूरत है। इस स्थिति को "Hidden Hunger" कहा जाता है जो वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस हिडन हंगर का समाधान तलाशने की दिशा में ही इंडियन कौंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) ने पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की कई किस्में विकसित की हैं। इनमें से एक ICAR के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) की ओर से विकसित बैंगनी गूदे वाला कुफरी जामुनिया खास है। इसमें विटामिन C, एंथोसायनिन, कैरोटीनॉयड, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
पहले जानें क्या है हिडन हंगर?
भरपेट खाने के बाद भी शरीर को जरूरी विटामिन और खनिज नहीं मिलना छिपी हुई भूख है। इसका समाधान करने के लिए जैव-संवर्धन (बायोफोर्टिफिकेशन) के जरिए फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जाती है। यानी पौधों की प्रजनन तकनीकों से ऐसी किस्में विकसित होती हैं, जिनमें पोषण बेहतर होता है।
तीन तरह का रंगीन आलू, क्या खूबियाँ, कहां उगाया जा सकता :
1. कुफरी नीलकंठ : बैंगनी छिलके वाले आलू की यह किस्म एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है।
2. कुफरी माणिक : गहरे लाल छिलके और पीले गूदे वाले इस आलू में एंथोसायनिन, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
3. कुफरी जामुनिया: इस आलू का छिलका और गूदा दोनों बैंगनी होते हैं। इसमें विटामिन C, एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड की उल्लेखनीय मात्रा है। चटक बैंगनी रंग भी इसे खास आकर्षक बनाता है।
बैंगनी आलू क्यों है खास :
कुफरी जामुनिया या बैंगनी आलू में कुछ प्रमुख पोषक तत्व सामान्य आलू की तुलना से ज्यादा होते है। मसलन, बैंगनी आलू में विटामिन C- 42.75 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम है जबकि सामान्य आलू में 23.15 मिलीग्राम होता है। सामान्य आलू में जिंक 0.28 मिलीग्राम होता है जबकि इसमें 2.28 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम मिलता है। बैंगनी आलू में आयरन 3.22 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम है जबकि सामान्य आलू में 0.57 मिलीग्राम। वैज्ञानिकों के मुताबिक बैंगनी रंग देने वाला एंथोसायनिन एक प्राकृतिक पिगमेंट है, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। यह शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक होता है।
किसानों के लिए क्या फायदा :
बैंगनी आलू खेती के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। ICAR के मुताबिक इसकी औसत उपज 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। प्राथमिक तौर पर 90 दिन के परीक्षणों में लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर उपज दर्ज की गई। इसमें 6 से 8 सप्ताह की सुप्तावस्था होती है जिससे भंडारण में जल्दी अंकुरण की समस्या कम होती है। मतलब यह कि लंबे समय तक टिक सकता है।