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Rajasthani Language : जयपुर में 'सालीणो-उछब' का भव्य आयोजन, राजस्थानी भाषा की मान्यता और साहित्य संरक्षण पर मंथन

 

 

 

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राजस्थानी लेखिका संस्थान (रालेस) द्वारा आयोजित 'सालीणो-उछब' शनिवार को प्रौढ़ शिक्षण समिति, झालाना, जयपुर में साहित्य, संस्कृति और सृजन के उत्सव के रूप में गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। 
 

कार्यक्रम संयोजक व संस्था सचिव वरिष्ठ साहित्यकार मोनिका गौड़ ने बताया कि दिनभर चले इस  भव्य आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों, युवा रचनाकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सम्मान समारोह के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में बीज भाषण देते हुए लोकप्रिय इतिहास शिक्षक व राजस्थानी मान्यता की  युवा आवाज़ राजवीर सिंह चळकोई ने  मायड़ भाषा की मान्यता व साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला तथा  युवा वर्ग को जोड़ने पर बल दिया। राजस्थानी भाषा  हमारी सभ्यता की आत्मा है इसे मान्यता मिलनी ही चाहिए।


 

अध्यक्ष के रूप में सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार  सत्यदेव संवितेन्द्र ने कहा कि राजस्थानी भाषा रहेगी तो राजस्थान की सभ्यता ,संस्कृति बचेगी.  विशिष्ट अतिथि के रूप में दिनेश कुमार जांगिड़ 'सारंग' (आईआरएस) उपस्थित थे। संस्थान की अध्यक्ष डॉ. शारदा कृष्ण ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्था का परिचय भी  दिया। 
 

द्वितीय सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा की अध्यक्षता में डॉ शारदा कृष्ण के कविता संग्रह   घर कीं कैवणों चावै' तथा जीनस कंवर के काव्य संग्रह  'रेत नै बणा आरसी' का लोकार्पण हुआ इस सत्र में मनीषा आर्य सोनी विशिष्ट अतिथि रहीं। पुस्तकों पर सुनीता बिश्नोलिया एवं डॉ. दर्शना कंवर 'उत्सुक ने समीक्षात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किए। संचालन भगवती पारीक मनु ने किया।


 'राजस्थानी युवा कविताई रा सुर' सत्र में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए युवा हस्ताक्षरों—अक्षिता (बीकानेर), अनीता सैनी (सीकर), अवंतिका (ब्यावर), जेठानंद पंवार (बाड़मेर), कपिला पालीवाल (जयपुर), गजराज कंवर (नागौर), मीनाक्षी पारीक, सपना वर्मा (रिंगस) तथा कृष् गौड़, विप्लव व्यास (जयपुर) ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं का पाठ किया। संचालन कामना राजावत ने किया।
समापन सत्र में  साहित्यकार मांन कंवर मैना, डॉ गोरिशंकर् निमीवाल तथा हस्तीमल आर्य हस्ती का सान्निध्य रहा।


वक्ताओं ने राजस्थानी भाषा के संरक्षण, महिला लेखन की सशक्त उपस्थिति और नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर प्रमोद शर्मा सतीश शर्मा अंशु व्यास, पवन कुमार, ,लोकेश कुमार साहिल आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।