Vijayadashmi : जोधपुर में रावण दहन पर शोक, कानपुर में दशानन की पूजा!
Rudra News Express Jodhpur-Kanpur.
विजयादशमी के मौके पर देशभर में जहां रावण दहन कर खुशियां मनाई जाती है वही राजस्थान के जोधपुर में एक जगह ऐसी भी हैं जहां रावण का दहन पर शोक यानी मातम मनाया जाता है। यूपी के एक शहर में दशहरे के दिन रावण का मंदिर खुलता है। पूजा होती है। फिर साल भर के लिए मंदिर को बंद कर देते हैं।
जोधपुर में क्यों मानते हैं शोक :
जोधपुर के मंडोर में रावण की मृत्यु को उत्सव नहीं, बल्कि शोक के रूप में देखा जाता है। मंडोर में रावण का मंदिर है, जहां दशहरे के दिन रावण की मौत का मातम मनाने की परंपरा बताई जाती है। इसकी वजह रावण का मंदोदरी से विवाह और मंडोर उनका पीहर यानी रावण का ससुराल था।
जोधपुर के जमाई राजा रावण :
मान्यता के अनुसार, मंदोदरी जोधपुर स्थित मंडोर के राजा मयूरध्वज की पुत्री थीं और रावण से उनका विवाह हुआ था। इसी रिश्ते के चलते यहां के दवे गोधा ब्राह्मण समाज के लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। मान्यता है कि रावण और मंदोदरी का विवाह मंडोर में हुआ था और विवाह में दवे गोधा ब्राह्मण समाज के लोग भी शामिल हुए थे। कहा जाता है कि विवाह के बाद इनमें से कुछ लोग यहीं बस गए। यही वजह है कि मंडोर स्थित रावण मंदिर में दशहरे के दिन रावण की मृत्यु पर शोक मनाने की परंपरा बताई जाती है। रावण दहन के बाद मंदिर को धोया जाता है। धूप-दीप और आरती करते हैं तथा खीर-चूड़ी का भोग लगाते हैं। कुछ श्रद्धालु धुएं को देखकर स्नान भी करते हैं।
कानपुर : साल में एक बार खुलता है 200 साल पुराना दशानन मंदिर
कानपुर नगर के शिवाला स्थित करीब 200 साल पुराना दशानन मंदिर साल में केवल एक बार दशहरे के दिन खोला जाता है। मंदिर के कपाट खुलते ही लंकापति रावण की मूर्ति का विधिवत स्नान कराकर पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु रावण के दर्शन कर ज्ञान, बल, बुद्धि और विवेक की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण भगवान शिव का परम भक्त और वेद-शास्त्रों का महान ज्ञाता था। इसी वजह से मंदिर में रावण की पूजा की जाती है। इस मंदिर की खास बात यह है कि दशहरे के दिन पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना होने के बाद शाम को इसके कपाट फिर से बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद मंदिर के कपाट अगले दशहरे पर ही खोले जाते हैं।