नारी शक्ति वंदन अधिनियम : 33% महिला आरक्षण के लिये लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव, कहाँ, कैसे बढ़ेगी, 2011 की जनगणना के फार्मूले पर विपक्ष हमलावर!
Apr 16, 2026, 16:08 IST
महिला आरक्षण बिल पर सहमति, लागू करने के तरीके पर सवाल!
RNE New Delhi.
Narendra Modi सरकार के कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने गुरुवार को संसद में 33% महिला आरक्षण वाला "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" पेश किया। इसके साथ ही हंगामा और बहस छिड़ गई। विपक्ष इस बिल पर तो सहमत है लेकिन इसे लाने और लागू करने के तरीके पर जमकर हमला बोल रहा है। परिसीमन, कोटा और सीटों के फार्मूले को लेकर जबरदस्त टकराव सामने आया है। बिल को इन्ट्रोड्यूस करने के प्राथमिक चरण में ही इसका जमकर विरोध हुआ।
दरअसल सरकार की ओर से 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए विशेष सत्र में तीन अहम विधेयक पेश किए गए हैं। इसमें परिसीमन, जनगणना और सीटों के बंटवारे को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।
पहले जानिए क्या और कैसे हैं विधेयक :
संसद के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किया गया। इन प्रस्तावों के तहत वर्ष 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। संशोधन विधेयक में लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि वर्तमान में यह संख्या 543 है। प्रस्ताव के अनुसार, राज्यों में अधिकतम 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं। सीटों के अंतिम निर्धारण के लिए परिसीमन प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। नए प्रावधानों के तहत लोकसभा की 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इन विधेयकों पर संसद में 18 अप्रैल तक विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
विपक्ष बनाम सरकार : टकराव के 5 बड़े मुद्दे :
विपक्ष का आरोप है कि OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा क्यों नहीं? SC/ST महिलाओं को आरक्षण के भीतर आरक्षण मिलता है, लेकिन OBC महिलाओं के लिए कोई अलग कोटा नहीं। तर्क है कि इससे फायदा सीमित वर्ग तक सिमट सकता है।
परिसीमन का फॉर्मूला अस्पष्ट :
आरोप है कि सरकार ने परिसीमन की बात तो कही है, लेकिन सीटें कैसे तय होंगी, इसका स्पष्ट फॉर्मूला नहीं बताया। कौन सी सीट महिला आरक्षित होगी—यह भी साफ नहीं!
उत्तर बनाम दक्षिण का विवाद :
दक्षिण के राज्यों (तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना) की चिंता है कि आबादी के आधार पर सीटें बढ़ीं तो UP-बिहार को फायदा होगा। दक्षिण के राज्यों की सीटें घट सकती हैं। विपक्ष इसे संघीय ढांचे पर असर बता रहा है।
2011 की जनगणना पर आपत्ति :
विपक्ष का सवाल है कि जब नई जनगणना आने वाली है, तो पुराने डेटा (2011) पर फैसला क्यों? आरोप है कि सरकार राजनीतिक फायदे के लिए जल्दबाजी कर रही है।
जल्दबाजी बनाम पारदर्शिता :
विपक्ष का कहना है कि 2023 के कानून में साफ था कि नई जनगणना के बाद ही लागू होगा। अब शर्त बदलना “नियमों से समझौता” है।
सरकार का जवाब :
- बिना परिसीमन के आरक्षण लागू करना संभव नहीं।
- 2011 डेटा का इस्तेमाल देरी रोकने के लिए।
- लक्ष्य : 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना।