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कृषि मंत्री किरोड़ी बाबा ने उठाया है अब यह मुद्दा, पिछली सरकार के पेपर लीक की डिटेल अमित शाह को दी

गहलोत व डोटासरा के माध्यम से राहुल को घेरने की कोशिश
जंतर मंतर आंदोलन की हार से तिलमिलाई हुई है केंद्र सरकार
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.


पेपर लीक मुद्दा अब भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर के आंदोलन से 12 साल से अजेय मोदी सरकार को भी पराजित कर दिया। जब से देश में मोदी सरकार बनी है, तब से न तो विपक्ष का और न ही किसी अन्य संगठन का आंदोलन सफल हुआ है। हर आंदोलन आरम्भ होकर दो फाड़ होता रहा और सत्ता तक आंच भी नहीं पहुंच पाई।

सम्भवतः इसके ही गुमान में एक बार मीडिया से जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बात कर रहे थे और एक पत्रकार ने मंत्री के इस्तीफे पर सवाल किया तो उन्होंने उपहास करते हुए कहा कि इस्तीफे यूपीए सरकार में होते थे, यह एनडीए सरकार है, इसमें मंत्रियो के इस्तीफे नहीं होते। अभी जब धर्मेंद्र प्रधान को छात्र आंदोलन के दबाव में जब इस्तीफा देने को विवश होना पड़ा तो रक्षा मंत्री का वो बयान खूब वायरल हुआ। जिसको लेकर यह कहा गया कि झुकते हैं सब, झुकाने वाला चाहिए।
 

सच में, छात्र यानी जेन - जी ने केंद्र की अजेय सरकार को न केवल झुका दिया, अपितु हिला भी दिया। अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद 12 साल बाद देश में एक ऐसा आंदोलन खड़ा हुआ, जिसने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा। युवाओं का यह आंदोलन कितना गंभीर था, उसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पीएम मोदी के सबसे विश्वसनीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

शिक्षा व छात्र बने आंदोलन का आधार:

दरअसल, नीट पेपर लीक इस आंदोलन का आधार बना। केंद्र की वर्तमान सरकार के तीसरे कार्यकाल में यह कोई पहला पेपर लीक नहीं था, सब जानते हैं। केंद्र के साथ साथ भाजपा शाषित अनेक राज्यों में भी इस अवधि में पेपर लीक खूब हुए। कांग्रेस शाषित राज्यों में भी हुए। इस वजह से ही जब नीट पेपर लीक के खिलाफ जब कांग्रेस सहित विपक्ष के अनेक दलों ने विरोध व आंदोलन किया, तो केंद्र सरकार ने उसे हल्के में लिया। नजरअंदाज किया।

फिर अचानक से कॉकरोच जनता पार्टी बनी और अमेरिका में नोकरी कर रहे भारतीय छात्र अभिजीत दिपके ने छात्र आंदोलन की घोषणा कर दी और वे भारत आये। छात्रों को जोड़ा और पूरे देश के छात्रों तक सोशल मीडिया के जरिये पहुंचे। उसको भी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया।
 

जब बड़ा छात्र वर्ग दिपके व कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ा तो इन छात्रों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर डेरा डाल दिया। देश भर से छात्र यहां पहुंच गए। अनेक राज्यों में आंदोलन शुरू हो गया। पुलिस व छात्रों में टकराहट हो गयी और सोशल मीडिया के जरिये आंदोलन मजबूत हो गया। देश का छात्र वर्ग एकजुट हो गया। उनकी मांग थी कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे। विपक्षी दल भी इस आंदोलन से जुड़ गए। आंदोलन की गंभीरता तब सरकार को समझ आयी। मजबूरी में प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा। केंद्र की सरकार को 12 साल बाद झुकना पड़ा। क्योंकि छात्र आन्दोलन की आड़ में कई विरोधी शक्तियां भी सक्रिय हो गयी थी।

अब राजस्थान से पलटवार:

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की छांव में राजस्थान में भी कांग्रेस ने पेपर लीक पर धरने प्रदर्शन किए। सरकार पर हमला किया। इस आंदोलन की अगुवाई पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा कर रहे थे। उनके साथ पूर्व सीएम अशोक गहलोत थे। 

अब भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार राजस्थान से आरम्भ किया है और इसकी अगुवाई कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा कर रहे हैं। पिछली सरकार कांग्रेस की थी और उसके मुखिया अशोक गहलोत थे। उस समय शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा थे। उस सरकार के समय भी रीट सहित कई पेपर लीक हुए। अब भाजपा ने उन सबको ही मुद्दा बनाकर कांग्रेस को राजस्थान में घेरने की कोशिश की है।

कृषि मंत्री किरोड़ी बाबा फ्रंट पर:

गहलोत व डोटासरा के कार्यकाल के पेपर लीक का मुद्दा खुद कृषि मंत्री किरोड़ी बाबा ने उठाया है। जो पिछली सरकार के समय भी कांग्रेस के खिलाफ अनेक मुद्दे खड़े करते रहे हैं। किरोड़ी बाबा को भी कांग्रेस पिछले 2 महीने से कृषि विभाग के छापों, नकली खाद, बीज के मुद्दे पर विवादों में उलझाए हुए हैं। अब किरोड़ी बाबा को हमले का अवसर मिल गया है। वे फ्रंट फुट पर आ गए हैं।

पिछली सरकार की डिटेल ली:

किरोड़ी बाबा पिछली सरकार के समय हुए पेपर लीक की डिटेल जुटाकर अब कांग्रेस को घेरने की तैयारी कर रहे हैं। गहलोत सरकार के समय जितने भी पेपर लीक हुए, उसका ब्यौरा लेकर वे केंद्र सरकार के पास पहुंच गए हैं। उन्होंने उस समय की पूरी विगत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी है और कार्यवाही करने की मांग की है। शाह ने किरोडी  बाबा की दी हुई डिटेल का गहनता से अध्ययन करना भी आरम्भ कर दिया है। भाजपा जंतर मंतर के छात्र आंदोलन की हार से तिलमिलाई हुई है, इस कारण वह विपक्ष को घेरने का कोई अवसर नहीं छोड़ेगी। 


किरोड़ी - डोटासरा की जंग पुरानी:

राज्य की राजनीति में किरोड़ी लाल मीणा व गोविंद डोटासरा की राजनीतिक जंग पुरानी है। सदन व सदन के बाहर डोटासरा उन पर सदा हमलावर रहते हैं। कहने को तो वे उनको ' साढू भाई ' कहते हैं। मगर उन पर कोई भी राजनीतिक प्रहार का अवसर नहीं चूकते है।

अब मीणा को हमला करने का अवसर मिला है। क्योंकि जब रीट का पेपर लीक हुआ था तो शिक्षा मंत्री डोटासरा थे और उस समय उन्होंने कहा था कि रीट की परीक्षा शिक्षा मंत्री ने नहीं कराई, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कराई। उसी बयान को आधार बना मीणा कह रहे हैं फिर नीट में लीक पर कांग्रेस धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों मांग रही थी।

राहुल को घेरने की कोशिश:

जंतर मंतर की हार से तिलमिलाई भाजपा अब गहलोत - डोटासरा के जरिये राहुल को घेरने की रणनीति बना रही है। क्योंकि प्रधान का इस्तीफा लेकर भाजपा असहज है। कुल मिलाकर अब राजनीति के केंद्र में पेपर लीक व छात्र यानी युवा वर्ग आ गया है। इस राजनीतिक जंग में कौन जीतता है, यह आने वाला समय बतायेगा।