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भाजपा व अकाली दल फिर आ सकते हैं साथ, मिलकर लड़ेंगे चुनाव

 

RNE Network.

अगले पंजाब विधानसभा के चुनाव होने हैं और उसके लिए अभी से नए सियासी समीकरण बनने आरम्भ हो गए हैं। पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी की सरकार है, जिसे घेरने की कोशिश कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही कर रहे हैं।
 

किसान आंदोलन के समय अकाली दल केंद्र सरकार व एनडीए से अलग हो गयी थी। तीन कृषि कानूनों को जब एनडीए की सरकार लायी तो अकाली दल किसानो के साथ खड़ा हो गया। तब एनडीए छोड़ने का निर्णय हुआ था। बाद में विधानसभा चुनाव हुए और फिर लोकसभा चुनाव हुए, मगर दोनों चुनावों में अकाली दल और भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।
 

अब अगले साल विधानसभा चुनाव है और भाजपा व अकाली दल दोनों ही अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस वजह से दोनों एक बार फिर साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। इसके संकेत तब मिले जब पिछले दिनों सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
 

उस समय से ही पंजाब में नए सियासी समीकरण बनने की बात तय हो गयी। अब अकाली दल की सांसद हरसिमरत ने भी भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। भाजपा ने राजस्थान के नेता व राज्यसभा सदस्य सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया है। अब इस सियासी समीकरण को निष्कर्ष तक पहुंचाने का जिम्मा उनके पास रहेगा।