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Congress-BJP Allert : बीकानेर में निर्दलीयों ने बजाई खतरे की घंटी, 10 जीते…17 दूसरे नंबर पर!

बीकानेर : 10 निर्दलीय जीते, 10 ने कांग्रेस को जिताया; भाजपा को 20 सीटों का झटका
 

बीकानेर में 216 निर्दलीय मैदान में उतरे थे, 27 ने टॉप-2 में जगह बनाई और 10 जीत गए—यह आंकड़ा कांग्रेस-भाजपा के बीच छिपी तीसरी राजनीतिक जमीन का सबसे बड़ा संकेत है।

Rudra News Express Bikaner. 

बीकानेर। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस की 42 सीटों की बंपर जीत और भाजपा के 27 पर सिमटने के पीछे सिर्फ दोनों दलों की सीधी टक्कर नहीं थी। इस चुनाव में निर्दलीयों ने भी भाजपा के गणित को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया। 10 वार्डों में निर्दलीय खुद जीतकर पार्षद बने, जबकि 17 वार्डों में वे रनर-अप रहे। इन 17 में 10 वार्ड ऐसे रहे, जहां निर्दलीय दूसरे स्थान पर रहे और कांग्रेस उम्मीदवार जीत गया। इस तरह 10 निर्दलीय की जीत और 10 कांग्रेस की उन जीत को जोड़ें, जहां निर्दलीय रनर-अप रहा, तो 20 वार्ड ऐसे सामने आते हैं जहां निर्दलीय फैक्टर ने भाजपा के खिलाफ चुनावी तस्वीर बदलने में सीधी भूमिका निभाई।

बीकानेर के 80 वार्डों के नतीजे में कांग्रेस 42 सीटों के साथ बहुमत में पहुंची, भाजपा 27 पर सिमट गई, 10 निर्दलीय जीते और एक सीट RLP के खाते में गई।  इस आंकड़े का राजनीतिक संदेश सीधा है, भाजपा के लिए मुकाबला केवल कांग्रेस से नहीं था। कई वार्डों में पार्टी के सामने अपने ही इलाके के बागी, स्थानीय चेहरे और निर्दलीय उम्मीदवार खड़े थे, जिन्होंने वोटों का समीकरण बदल दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस को भी निर्दलीयों की मौजूदगी का लाभ मिला और 10 ऐसे वार्डों में जीत मिली, जहां निर्दलीय दूसरे नंबर पर रहा। यानी 20 वार्डों का यह आंकड़ा भाजपा के लिए सबसे बड़ा अलार्म है। \

08 वार्डों को छोड़ सभी में तीसरी ताकत : 

दरअसल बीकानेर के 80 वार्डों में से एक 69 में भाजपा की लीलादेवी निर्विरोध जीत गई। बाद में जिन 79 वार्डों में मुकाबला हुआ उनमें महज 07 वार्ड ऐसे थे जिनमें भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने रहे। यानी इन 07 वार्डों में दो ही प्रत्याशी रहे निर्दलीय या किसी भी अन्य दल का प्रभाव नहीं रहा। ऐसे में सीधी टक्कर वाले 07 और एक निर्विरोध वार्ड को अलग करें तो 72 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के अलावा को तीसरा मौजूद था। 

216 निर्दलीय मैदान में थे, 27 टॉप-2 में पहुंचे : 

बीकानेर के 79 वार्डों में 216 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। यानी कुल 373 प्रत्याशियों में आधे से ज्यादा उम्मीदवार निर्दलीय थे। इन 216 में से 10 निर्दलीय चुनाव जीतकर पार्षद बने और 17 दूसरे स्थान पर रहे। यानी 27 निर्दलीय उम्मीदवार ऐसे रहे जिन्होंने अपने-अपने वार्ड में कांग्रेस-भाजपा के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए चुनाव की अंतिम लड़ाई में जगह बनाई। ये 27 परिणाम 25 वार्डों में सामने आए, क्योंकि वार्ड 26 और 49 में तो पहले और दूसरे दोनों स्थान निर्दलीयों के नाम रहे। यानी यह सिर्फ 10 निर्दलीय पार्षदों की कहानी नहीं है। 216 उम्मीदवारों की पूरी फौज में से 27 का टॉप-2 में पहुंचना बीकानेर की स्थानीय राजनीति में निर्दलीय प्रभाव की गंभीर मौजूदगी को दिखाता है।

भाजपा को बड़ा नुकसान : 

इन 27 में भी भाजपा के लिए संकेत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। 10 वार्डों में निर्दलीय खुद जीते यानी इन वार्डों में भाजपा सीधे तौर पर निर्दलियों से हारी। इसके अलावा 17 वार्डों में निर्दलीय रनर-अप रहे। इन 17 में 10 जगह कांग्रेस जीती। मतलब यह कि 10 सीटों पर निर्दलिय आगे बढ़ते हुए भाजपा को धकेला। भले ही खुद नहीं जीत पाए लेकिन कांग्रेस जीत गई। ऐसे में भाजपा को सीधे तौर पर 20 सीटों का नुकसान निर्दलीय या बागियों से हुआ। हां,  6 जगह भाजपा भी निर्दलीय से जीती और एक जगह निर्दलीय बनाम निर्दलीय मुकाबला रहा। ऐसे में देखा जाए तो कांग्रेस को सीधे तौर पर 06 निर्दलियों ने रनर रहकर हराया और भाजपा को लाभ मिल। 

क्या बीकानेर में थर्ड फ्रंट का संकेत : 

इसलिए बीकानेर का 2026 नगर निगम चुनाव सिर्फ कांग्रेस की वापसी और भाजपा की हार का परिणाम नहीं है। इसके भीतर 216 निर्दलीयों की मौजूदगी, 10 जीत और 17 रनर-अप का आंकड़ा एक अलग राजनीतिक कहानी लिख रहा है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीकानेर में तीसरा मोर्चा तैयार हो गया है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि तीसरे विकल्प के लिए जमीन दिखाई देने लगी है। अगर ये स्थानीय चेहरे, बागी नेता और असंतुष्ट समूह भविष्य में किसी साझा मंच पर आते हैं, तो कांग्रेस और भाजपा दोनों के सामने मुकाबले का नया समीकरण खड़ा हो सकता है।