Dharmendra Pradhan Resignation: कॉकरोच जनता पार्टी, कांग्रेस के दबाव में धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दिया
RNE New Delhi.
देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफा पत्र में प्रधान ने ये लिखा:
अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य का विषय है। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उनका मन अत्यंत दुखी है और वे नहीं चाहते कि देश की युवा शक्ति किसी भ्रम या राजनीतिक टकराव में उलझे।
सरकार ने की थी त्वरित कार्रवाई:
प्रधान ने पत्र में कहा कि NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं के सामने आने के बाद सरकार ने तत्काल CBI जांच कराई, परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित कराई और 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न कराने का प्रयास किया। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों से वे व्यथित हैं। उन्होंने जंतर-मंतर और देशभर में बने हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई भी राष्ट्रविरोधी ताकत इस स्थिति का लाभ न उठा सके, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया।
जंतर-मंतर आंदोलन का बढ़ता दबाव:
पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र और युवा लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करना थी। आंदोलन को लेकर दिल्ली में कई बार तनाव की स्थिति बनी और पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़पें भी हुईं।
कांग्रेस ने भी बनाया बड़ा मुद्दा :
कांग्रेस ने भी NEET विवाद को संसद से लेकर सड़कों तक जोरदार ढंग से उठाया। कांग्रेस सांसदों ने संसद में लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, जबकि विभिन्न राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए। विपक्ष के लगातार दबाव और छात्र आंदोलन ने सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न :
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने खुशी जताई। कई छात्रों ने इसे आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया और नारेबाजी करते हुए जश्न मनाया। हालांकि आंदोलनकारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
राजनीतिक मायने :
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा राजनीतिक इस्तीफा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छात्र आंदोलन, जंतर-मंतर पर लगातार जारी प्रदर्शन और कांग्रेस सहित विपक्ष के बढ़ते दबाव ने सरकार को बड़ा निर्णय लेने के लिए मजबूर किया।