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हरीश चौधरी के बयानों से राज्य कांग्रेस में हलचल, गहलोत पर लगातार ईशारों में बोल रहे हैं चौधरी

चौधरी के बयान पर कोई नेता प्रतिक्रिया नहीं दे रहा
कोई बड़ी पटकथा लिखी गयी है शायद राज्य कांग्रेस पर
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.


राजस्थान कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं लगता। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोई नई पटकथा इसके लिए लिखी गयी है। उसके अनुसार ही धीरे धीरे कई राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं। यह बयान इस बात के द्योतक है कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है और उसको ही लागू करने के प्रयास अब शुरू हो रहे हैं। आलाकमान को पहले राज्यसभा के चुनाव की प्राथमिकता थी, वे चुनाव अब सम्पन्न हो चुके हैं।

पहले केरलम व उसके बाद कर्नाटक में कड़े फैसले लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश के दिग्गज कांग्रेस नेताओं को इस बात का संकेत दे दिया कि वे अब सख्त निर्णय ले रहे हैं और किसी भी दबाव में आने वाले नहीं है। हरियाणा में जब राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग हुई तो पहले की तरह विधायकों ने सोचा कि कुछ नहीं बिगड़ना है। नोटिस के बाद सब शांति हो जाएगी। क्योंकि क्रॉस वोटिंग करने वालों में वहां के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के समर्थक 2 विधायक भी थे। मगर राहुल ने सख्त निर्णय लेते हुए क्रॉस वोटिंग करने वाले पांचों विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह हुड्डा को स्पष्ट संकेत था कि अब अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

अब राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी में बड़े बदलाव करने वाले हैं। ठीक इसी तरह कई राज्यों में प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष भी बदलने की तैयारी है। राजस्थान में जिस तरह की बयानबाजी कांग्रेस नेताओं के मध्य हो रही है, उससे लगता है कि यहां भी बड़े बदलाव संभावित है। उसकी पूरी पठकथा लिखी जा चुकी है। पहले पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बयान, उसके प्रत्युत्तर में संयमित सचिन पायलट के बयान और फिर शीत युद्ध की स्थिति है। अब राहुल गांधी के निकटस्थ व मध्यप्रदेश के प्रभारी हरीश चौधरी का पूर्व सीएम गहलोत पर बयान से हमला, इस बात को पुष्ट कर रहा है कि राज्य में बहुत कुछ बदलने वाला है।

ये दिया था चौधरी ने बयान:

हरीश चौधरी ने एक धार्मिक आयोजन में बोलते हुए कहा कि मैं तो अपने उन सीएम का यहां नाम लेना भी ठीक नहीं समझता। इससे आगे वे भजनलाल सरकार के मंत्री के के विश्नोई की तरफ ईशारा करके बोले कि आपके तो अपने सीएम के साथ अच्छे संबंध है, मेरी तो लोकसभा चुनाव के बाद से उनसे बोलचाल भी नहीं। सांसद उमेदाराम उनके समाचार सुनाते हैं, तब सुन लेता हूं।

हरीश चौधरी के इस बयान के बाद राज्य के बड़े कांग्रेस नेताओं में सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई भी बोला नहीं। किसी ने भी बयान पर प्रतिक्रिया नहीं दी। सबको पता है कि चौधरी मध्यप्रदेश के प्रभारी है और राहुल की टीम में है।
 

बयान पर भी बयान दिया:

कांग्रेस सीडब्ल्यूसी के सदस्य हरीश  चौधरी के बयान पर किसी कांग्रेसी नेता ने तो कोई बयान नहीं दिया मगर मीडिया ने उनसे बयान पर सवाल पूछा। तब हरीश चौधरी ने एक बार फिर सनसनी पैदा करने वाला बयान देकर सियासत में हलचल पैदा कर दी है। इस बयान पर दिए बयान पर भी कांग्रेस के किसी भी राज्य के दिग्गज नेता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मीडिया के सवाल पर चौधरी बोले कि हां, मैंने ये कहा है। मैं जल्दी ही अपने इस बयान का खुलासा भी करूँगा। 

खुलासे की बात से चकित हैं सब:

हरीश चौधरी के जल्दी ही खुलासा करने के बयान ने तो कांग्रेस के भीतर की राजनीति को गर्म कर दिया है। ईशारों में सब एक - दूसरे से यह पूछते हैं कि हरीश चौधरी किस खुलासे की बात कर रहे हैं।

ऐसा कौनसा खुलासा है ? उस खुलासे में अभी की बातें हैं या पूर्ववर्ती सरकार के समय की। क्योंकि सचिन - पायलट की जंग तो पिछली सरकार के समय से है। यदि इस समय की है तो साफ है कि आलाकमान की कोई मंशा है। क्योंकि चौधरी तो आलाकमान की ही भाषा बोलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहले वाली नहीं, राहुल गांधी की कांग्रेस हैं। अब सबको हरीश चौधरी के खुलासे का इंतजार है। तब तक तूफान से पहले का सन्नाटा लग रहा है।

कुछ न कुछ हो तो रहा है भीतर:

हरीश चौधरी के बयान से यह बात स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर कुछ न कुछ तो हो रहा है। बड़े बदलाव की आंधी आना तय सा लगता है। कुछ सूत्र बताते हैं कि राज्य के एक और दिग्गज नेता को किसी दूसरे राज्य का प्रभारी बनाकर नई जिम्मेदारी दी जा रही है। उसकी कभी भी घोषणा हो सकती है।

ठीक इसी तरह राज्य में भी राहुल गांधी कमान बदल सकते हैं। यह भी यहां के नेताओं के अटपटे बयानों से साफ लग रहा है। राज्य कांग्रेस की जो पटकथा लिखी गयी है, शायद उसका ही एक पृष्ठ हरीश चौधरी का बयान हो।
 

अब खुलासे व पूरी पटकथा को जानने के लिए समय का तो इंतजार करना ही पड़ेगा। उस समय का आगमन कभी भी हो सकता है, सम्भवतः इस वजह से भी एक बार प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने बयानों पर लगाम लगा ली है।