कहा, पवित्र धार्मिक स्थल पर नाम नहीं लेना चाहता, लोकसभा चुनाव के बाद तो रामा - श्यामा भी नहीं
बदल रही प्रदेश की कांग्रेस राजनीति
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अचानक से सचिन पायलट के खिलाफ मोर्चा क्या खोला, अब चारों तरफ से घिरते नजर आ रहे हैं। हालांकि सचिन ने तो सीधे तौर पर उन पर विरोध में कुछ नहीं बोला, उलटे विनम्र जवाब दिए। यहां तक कहकर गहलोत को चुप्पी पे ला दिया कि वे तो मुझे अपने पुत्र वैभव की तरह समझते हैं।
गहलोत उसके बाद भाषा को लेकर नरम पड़े और सुर बदले। 17 जून को जब छात्रों व युवाओं से संवाद के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कोटा आये तो एक बार खुशनुमा तस्वीरें सामने आई। जिसमें गहलोत, पायलट व गोविंद डोटासरा आपस में बात करते हुए न केवल हंस रहे हैं अपितु ठहाके लगा रहे हैं। जैसे दोनों के बीच कोई टकराहट न थी और न है। सोशल मीडिया पर तस्वीर भी खूब वायरल हो रही है। एक अलग तरह का संदेश कांग्रेस की तरफ से दिया जा रहा है।
मगर इसके समानांतर थार की भूमि से कांग्रेस सीडब्ल्यूसी सदस्य और मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी का एक वीडियो भी खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में हरीश चौधरी का भाषण है जिसने एक नया बवंडर कांग्रेस के भीतर खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में हरीश चौधरी है, बाड़मेर के सांसद उमेदराम हैं, राज्य की भाजपा सरकार के मंत्री के के विश्नोई है। यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। विदित रहे कि एक समय में हरीश चौधरी पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बहुत निकट थे। वैसे वे राजनीति में राहुल गांधी की विश्वसनीय टीम के सदस्य भी है।
यह था थार में आयोजन:
बाड़मेर की राजनीति पिछले 5 साल से खासी गर्म है। यहां के नेताओं ने प्रदेश स्तर पर बड़ी धूम मचा रखी है। हरीश चौधरी के जिस वीडियो की बात हो रही है, वह यहीं का है। अवसर है एक धार्मिक आयोजन का। इस आयोजन में मंत्री के के विश्नोई, बाड़मेर सांसद उमेदराम व बायतु विधायक हरीश चौधरी शामिल थे। धार्मिक आयोजन था मगर बात निकलते निकलते राजनीति पर पहुंच गई।
बायतु विधायक व राहुल के खास हरीश चौधरी बोल गए कि के के विश्नोई जी के तो अपने मुख्यमंत्री से अच्छे संबंध है।
मैं तो अपने उस समय के मुख्यमंत्री का इस धार्मिक स्थल पर नाम भी नहीं ले सकता। चौधरी यहीं नहीं रुके। वे आगे बोले कि अब तो मेरी उनसे रामा - श्यामा भी नहीं है। अब तो उमेदराम जी जो हमारे सांसद उनके समाचार ले आते हैं, हमें सुना देते हैं और हम सुन लेते हैं। यह चौधरी का गहलोत पर बिना नाम लिए बड़ा कटाक्ष था। वे तो यहां तक कह गए कि हम उमेदराम को कांग्रेस में लाये, उनको सांसद बनाया। गहलोत पर सार्वजनिक रूप से हरीश चौधरी का यह पहला बड़ा कटाक्ष था।
बयान से राजनीति गर्मा गई:
हरीश चौधरी के इस बयान से कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर से उबाल खा गई। उनके इस बयान से कांग्रेस के भीतर एक हड़कम्प मच गया। गहलोत पर इतना तीखा राजनीतिक हमला पहले नहीं हुआ था। कांग्रेस में इसे बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है और कई कयास लगाए जा रहे हैं।
हरीश चौधरी के बयान पर किसी ने कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। मगर कांग्रेस का हर बड़ा नेता अंदरखाने इस बयान के अर्थ निकाल रहा है। क्योंकि चौधरी का ऐसा बोलना सामान्य बात नहीं। वे राहुल के खास है। एक समय में वे गहलोत के निकट थे। आजकल उनकी सचिन पायलट से नजदीकियां है। वे मध्यप्रदेश के प्रभारी है और पायलट उससे सटे छत्तीसगढ़ के। दोनों का पिछले दिनों साथ साथ भी खूब देखा गया है।
गहलोत से नाराजगी के कारण भी है:
हरीश चौधरी के गहलोत से राजनीति के अपने कई कारण है। जिस समय वे मध्यप्रदेश के प्रभारी थे और पार्टी विधानसभा चुनाव हारी, तब नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। मजबूरन गहलोत के निकटस्थ रघु शर्मा को भी मंत्री पद छोड़ना पड़ा, वे गुजरात के प्रभारी थे और वहां भी कांग्रेस हारी थी। गहलोत से बिना बात किये चौधरी ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। गहलोत व उनके मध्य दूरी वहीं से बढ़ी थी।
फिर एक प्रकरण के बाद बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन को एक कथित सीडी वॉयरल होने के बाद चौधरी के दबाव में पार्टी से निकाला गया। उमेदराम के विरोध के चलते अमीन खां को भी पार्टी से बाहर किया गया। उनको वापस पार्टी में आने से रोकने के लिए चौधरी ने पूरा जोर लगाया, मगर गहलोत उनको वापस कांग्रेस में लाने में सफल रहे। ये दोनों नेता गहलोत के निकटस्थ है। वो कशक चौधरी के मन में थी।
अब आलाकमान राज्य में कांग्रेस का चेहरा बदलने का प्रयास कर रही है तब भी गहलोत अलग विचार लिए खड़े दिखते हैं। उसी कारण चौधरी ने बड़ा राजनीतिक प्रतिरोध इस बयान से किया है।
इस बयान के कई मायने हैं:
हरीश चौधरी के इस बयान के कई मायने राज्य के सियासी गलियारे में निकाले जा रहे हैं। एक बात सभी मान रहे हैं कि चौधरी का ये बयान इस बात को स्पष्ट कर रहा है कि आने वाले समय में राज्य की कांग्रेस का चेहरा बदलेगा। बात निकली है तो दूर तलक तो जाएगी।