राजस्थान में भी शिक्षक नाराज हैं शिक्षा मंत्री से, तबादलों की आपाधापी से शिक्षकों में रोष
शिक्षिकाओं के मोबाइल चेक करने को बताया अशोभनीय
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आखिर छात्र आंदोलन के सामने झुककर इस्तीफा देना पड़ा। जब नीट का पेपर लीक हुआ तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह पेपर लीक देश के शिक्षा के इतिहास का बड़ा आंदोलन पैदा करने की वजह रहेगा। क्योंकि पहले भी अनेक बार पेपर लीक हुए थे और छात्र व विपक्ष थोड़ा बहुत विरोध प्रदर्शन कर शांत हो गए थे। सत्ता ने सोचा इस बार भी वैसा ही होगा।
सरकार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि कई राज्यों में भी पेपर लीक का सिलसिला रहा है और छात्रों का गुस्सा भी धीरे धीरे बढ़ रहा है। नीट पेपर लीक पर जब विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान का विरोध कर इस्तीफा मांगा तो उसे राजनीतिक गतिविधि के रूप में लिया गया। सरकार किसी भी सूरत में विपक्ष के सामने तो झुकने को तैयार ही नहीं थी। न झुकी और विपक्ष को इग्नोर किया।
मगर दुखद स्थिति तब शुरू हुई जब कुछ छात्रों ने पेपर लीक से आहत होकर आत्महत्या कर ली। कईयों के अभिभावकों ने कर्ज लेकर, जमीन बेचकर उनको पढ़ाया था। कष्ट उठाकर बच्चों का भविष्य बनाने की कोशिश की थी। उनसे यह हादसा झेला नहीं गया और वे हताशा में यह गलत कदम उठा बैठे।
विपक्ष इस मुद्दे को लेकर ज्यादा गंभीर हो गया। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एनएसयूआई को सक्रिय किया और इसको लेकर अपने स्तर पर सरकार का विरोध शुरू कर दिया। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी मैदान में आ गयी। इस युवा टीम ने सीधे ही दिल्ली में प्रदर्शन कर संकेत दे दिए कि हम अब पेपर लीक बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इन छात्रों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर डेरा डाला और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रख दी। आंदोलन को पहले सोनम वांगचुक का साथ मिला फिर तो सभी विपक्षी दल साथ आ गए। बॉलीवुड एक्टर, किसान यूनियन, कर्मचारी संगठन, सामाजिक संगठनों के समर्थन के साथ देश भर के छात्र इस आंदोलन से जुड़ गए। जबरदस्त आंदोलन देश व दिल्ली में खड़ा हुआ। जिसका अंत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से ही हुआ। 36 दिन के इस आंदोलन को सफलता मिली।
यह एक अलार्म है सत्ताओं के लिए:
छात्र आंदोलन व केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, सभी राज्य सरकारों के लिए एक अलार्म है। क्योंकि पेपर लीक से कम ही राज्य अछूते है। हर राज्य में यह घटना होती रहती है। अब छात्र आंदोलन ने राज्यों के छात्रों को भी एक रास्ता दिखा दिया है।
अब यदि किसी भी राज्य में पेपर लीक की घटना हुई तो उस राज्य के शिक्षा मंत्री को छात्रों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। अब आसान नहीं रहेगा शिक्षा मंत्रालय को चलाना। इस बात का आभाष सबसे पहले तेलंगाना को हुआ। वहां के मुख्यमंत्री रेवन्त रेड्डी ने ताबड़तोड़ शिक्षा व छात्रों को लेकर कड़े आदेश लागू कर दिए।
अब इसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, राजस्थान आदि को भी बढ़ना ही होगा। नहीं तो ये छात्र अब किसी को नहीं बख्शेंगे। वे भाजपा या कांग्रेस को नहीं देखेंगे, अब अपने बारे में सोचेगा।
राजस्थान के नेता भी सतर्क:
इस अलार्म से राजस्थान के नेता भी सतर्क हो गए हैं। पिछली अशोक गहलोत सरकार के समय भी पेपर लीक हुए थे, तब शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा थे। उस समय भी आरपीएससी के सदस्यों तक को इस जघन्य अपराध में शामिल होने के कारण पकड़ा गया। बर्खास्त किया गया। वर्तमान भाजपा सरकार सतर्क थी, हालांकि इस सरकार के समय भी यह गलती हुई है। अब छोटी सी गलती भी छात्रों को उद्वेलित कर देगी।
ठोस कानून केंद्र की तरह जरूरी:
केंद्र सरकार ने इस छात्र आंदोलन के बाद कड़े कानूनों का प्रावधान किया है। जिसमें पेपर लीक के दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। सजा के साथ आर्थिक दंड भी मिलेगा। त्वरित कार्यवाही करने के प्रावधान भी नए कानून में किए गए हैं। पेपर लीक को अक्षम्य अपराध माना गया है अब।
इसी तर्ज पर राज्य सरकारों को भी अपने यहां के वर्तमान कानूनों को बदलकर कड़ा करना होगा। राज किसी का भी हो, अब छात्रों के भविष्य के साथ भर्ती व अन्य परीक्षाओं में लापरवाही नहीं चल सकेगी। इस छात्र आंदोलन ने यह तो स्पष्ट कर दिया है।
शिक्षा में मनमर्जी नहीं चल सकेगी:
अब तक हर राज्य शिक्षा विभाग को सबसे बड़ी प्रयोगशाला मानता आया है। आनन फानन में पाठ्यक्रम बदल दिए जाते हैं। शिक्षकों व छात्रों के लिए सरकारें अपनी विचारधारा के अनुसार निर्णय लेती रहती है। शिक्षकों के तबादले भी करती रहती है। अब यह मनमर्जी नहीं चलेगी।
राजस्थान में भी इस समय अपने आदेशों के कारण शिक्षा मंत्री मदन दिलावर चर्चा में है।
इस बार के तबादलों को लेकर भी बवाल मचा हुआ है। पदोन्नति में चुन चुनकर शिक्षकों को सेवानिवृत्ति में कम समय होने के बाद भी दूर फेंका गया है। वर्तमान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर व पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा इसको लेकर आमने सामने भी है।