CM के बीकानेर दौरे से ठीक पहले देवीसिंह भाटी ने फिर उठाया, गोचर- ओरण का मुद्दा, सरकार से की बड़ी मांग
Rudra News Express Bikaner.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीकानेर दौरे से पहले पश्चिमी राजस्थान की राजनीति और जनभावनाओं से जुड़े गोचर, ओरण और सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पूर्व सिंचाई मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता देवीसिंह भाटी ने मुख्यमंत्री सहित राज्य के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर गोचर एवं चारागाह भूमि के संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की है।
भाटी की यह मांग ऐसे समय आई है, जब बीकानेर में गोचर भूमि के मास्टर प्लान में भू-उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को लेकर पहले बड़ा जनआंदोलन हो चुका है। हजारों लोग सड़क पर उतरे थे और गोचर भूमि को संरक्षित रखने की मांग उठी थी। वहीं, बीकानेर विकास प्राधिकरण यानी BDA के मास्टर प्लान में चकगरबी को स्पेशल जोन के रूप में चिह्नित किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस पूरे मामले में पूर्व में आश्वासन दे चुके हैं।
भाटी ने सीधे सरकार के आदेशों पर उठाए सवाल :
देवीसिंह भाटी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, मुख्य सचिव, राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री, प्रमुख शासन सचिव राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग तथा राजस्व मंडल के अध्यक्ष को पत्र भेजा है।
भाटी ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 103(ं)(पअ) और धारा 92 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए 23 सितंबर 2021 को ऐसा आदेश जारी किया गया, जो गोचर एवं चारागाह भूमि के संरक्षण की दृष्टि से चिंता का विषय है।
उन्होंने इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी 17 अप्रैल 2025 के आदेश और 1 सितंबर 2025 के स्पष्टीकरण आदेश की भी समीक्षा कर उन्हें विलोपित करने की मांग की है।
बीकानेर से पश्चिमी राजस्थान तक आंदोलन का मुद्दा :
गोचर और ओरण का सवाल बीकानेर तक सीमित नहीं है। पश्चिमी राजस्थान में इन जमीनों को पशुपालन, पर्यावरण और पारंपरिक ग्रामीण व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
बीकानेर में जब गोचर भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का प्रस्ताव सामने आया था, तब हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर सरकार और प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी दर्ज कराई थी। विधानसभा में भी गोचर भूमि और ओरण के संरक्षण का मुद्दा कई बार उठा है। अलग-अलग विधायकों ने सरकार से इन जमीनों को संरक्षित रखने की मांग की है।
ऐसे में भाटी का ताजा पत्र इस पुराने और संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकता है।
'गोचर सिर्फ पशुओं के चरने की जमीन नहीं'
भाटी ने कहा कि गोचर और चारागाह भूमि केवल पशुओं के चरने की जगह नहीं हैं। इनका सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन, पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीव संरक्षण से है।
उनके अनुसार चारागाह भूमि लगातार कम होने से ऊंट, भेड़, बकरी और दूसरे पशुधन के प्राकृतिक चराई क्षेत्र सीमित हो रहे हैं। इसका सीधा असर पशुपालकों की आजीविका और पशुधन पर पड़ रहा है।
विकास के लिए दूसरी जमीनों के इस्तेमाल की मांग :
भाटी ने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम और राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गोचर, ओरण, तालाब, पायतन, बावड़ी और तलाई जैसी पारंपरिक सार्वजनिक एवं पर्यावरणीय महत्व की जमीनों को संरक्षित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि विकास या जनहित के किसी काम के लिए भूमि की आवश्यकता है तो उपलब्ध अराजीराज अथवा निजी भूमि का नियमानुसार उपयोग या अधिग्रहण किया जाए। सदियों से पशुधन और पर्यावरण के लिए सुरक्षित रही गोचर भूमि को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला :
भाटी ने हाल में राजस्थान हाईकोर्ट के वन्य जीव सेवार्थ फाउंडेशन बनाम राजस्थान सरकार मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की भावना प्राकृतिक संसाधनों, वन्यजीव क्षेत्रों और सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण की रही है।
उन्होंने सरकार से कहा कि विकास के नाम पर गोचर, चारागाह, ओरण, तालाब और अन्य पारंपरिक सार्वजनिक जमीनों के उपयोग की व्यवस्था पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
PM मोदी के 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का भी जिक्र :
भाटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े संदेश तथा 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण, वन्यजीव, वृक्ष और गौवंश सहित समस्त जीव-जगत के संरक्षण के लिए प्राकृतिक एवं सार्वजनिक भूमि को बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
अब सरकार के रुख पर नजर :
देवीसिंह भाटी ने सरकार से 23 सितंबर 2021, 17 अप्रैल 2025 और 1 सितंबर 2025 के संबंधित आदेशों की विधि और जनहित की दृष्टि से पुनः समीक्षा कर उन्हें विलोपित करने की मांग की है।
साथ ही उन्होंने प्रदेशभर में गोचर, चारागाह, ओरण, तालाब, पायतन, बावड़ी और तलाई जैसी भूमि का संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की है।
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीकानेर आगमन से ठीक पहले भाटी ने यह मुद्दा फिर उठाया है। ऐसे में बीकानेर में पहले हो चुके गोचर आंदोलन, चकगरबी के स्पेशल जोन का मामला और विधानसभा में उठते रहे सवालों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।