मदन गोपाल मेघवाल व नवरत्न डागा के पुराने रिश्ते, मेघवाल पर राजस्थान पीसीसी का दबाव, जीत का कोई पहलू अधूरा नहीं छोड़ेंगे बीडी कल्ला, डोटासरा की बीकानेर पर नजर, BJP सुरेंद्र शेखावत के भरोसे
बीकानेर नगर निगम में यूं तो कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिल गया। 80 सीटों में से पार्टी ने 42 सीटें जीत ली। मगर कांग्रेस के लिए उन्हीं की पार्टी के वार्ड 50 के पार्षद नवरतन डागा ने पेच फंसा दिया है। उन्होंने बगावत करके मेयर के लिए अपने दो पर्चे दाखिल किए। एक पर्चा कांग्रेस की तरफ से था तो खारिज होना ही था। निर्दलीय के रूप में भरा पर्चा कायम है। उससे ही रोमांच बढा है।
मधु आचार्य 'आशावादी'
बीकानेर नगर निगम में मेयर का चुनाव अब रोमांचक स्थिति में पहुच गया है। कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है फिर भी वह सेफ नहीं है। बागी पार्षद नवरतन डागा का निर्दलीय के रूप में भरा गया पर्चा अब भी स्टैंड कर रहा है और उसके कारण ही कांग्रेस की परेशानी बढ़ी है। कांग्रेस के पास 80 के सदन में 42 पार्षद है, उस लिहाज से देखा जाए तो उसे जीतने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए, मगर डागा की बगावत ने चुनाव को उलझा दिया है।
दूसरी तरफ भाजपा के 27 पार्षद जीते हैं और बहुमत के लिए 41 चाहिए। इस सूरत में भाजपा को 14 अन्य पार्षदों का साथ जरूरी है। जो सभी निर्दलीयों के साथ आने पर भी पूरा नहीं होता। यह बहुमत का आंकड़ा तो तब पूरा होता है जब कांग्रेस के कुछ वोट भाजपा को मिले। डागा की दावेदारी को कांग्रेस के वोट कम करने की रणनीति के रूप में ही देखा जा रहा है।
पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला भी परिपक्व राजनेता है और 10 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं, उनकी पकड़ भी बीकानेर की राजनीति पर काफी मजबूत है। वे बाजी यूं हाथ से जाने नहीं देंगे, यह सभी को भरोसा है। इसके विपरीत भाजपा के पास इस जोड़ का कोई नेता मेयर चुनाव में सक्रिय नहीं दिख रहा है। मगर मेयर का चुनाव रोचक स्थिति में जरूर पहुंच गया है।
शहर अध्यक्ष मेघवाल पर डागा के लिए दबाव
वार्ड 50 का टिकट नवरतन डागा को शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल के हस्तक्षेप से ही मिला था। उस समय अन्य दावेदारों का आरोप था कि मेघवाल ने उनके साथ अन्याय किया और इस वार्ड के टिकट को लेकर पिटाई प्रकरण भी हुआ। उस समय एक पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष की एक कथित ऑडियो भी वायरल हुई, वो सही थी या गलत, ये तो जांच में सामने आएगा, मगर उसमें भी स्पष्ट था कि डागा को टिकट मेघवाल के हस्तक्षेप से मिला।
उसी टिकट का यह मेयर चुनाव में झमेला खड़ा हुआ है। डागा ही बगावत करके निर्दलीय खड़े हुए हैं। यह सर्वविदित है कि डागा व मेघवाल के अच्छे संबंध है। इस कारण प्रदेश कांग्रेस का शहर अध्यक्ष मदन मेघवाल पर दबाव है कि वे आज डागा का पर्चा उठवाये और उनको पार्टी के साथ खड़ा करे।
डोटासरा की अब हुई एंट्री
मेयर चुनाव में अब पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा की एंट्री हो गयी है। उन्होंने सीधे हस्तक्षेप किया है और पार्टी संगठन को डागा मामले में सक्रिय होने के लिए कहा है। देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग, शहर कांग्रेस कोषाध्यक्ष मनीष पुरोहित ' नटसा ' को भी डोटासरा ने सक्रिय किया है।
आज नाम वापस लेने का आखिरी दिन है, इस कारण राजनीतिक गतिविधियां तेज है। आज अगर डागा नाम वापस ले लेंगे तो भाजपा का किला धराशायी हो जायेगा, यदि नाम वापस नहीं लेते हैं तो कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ेगी। डोटासरा बीकानेर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
भाजपा की रणनीति सुरेंद्र व टीम सुरेंद्र के हाथ में
मेयर पद के लिए भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह शेखावत व उनकी टीम ही पूरा दमखम लगाए हुए हैं। उनको छात्र संघ चुनाव के समय से इस तरह की स्थितियों से गुजरने का अनुभव है और उनके पास उनकी अपनी एक टीम है, वही पूरी चुनाव की कमान संभाले हुए हैं। भाजपा को बहुमत नहीं मिलने के बाद अधिकतर नेता तो किनारे हो लिए, अब खुद उम्मीदवार व उनकी टीम मैदान में उतरी हुई है। जिसने चुनाव को रोचक बना दिया है।
अनिल के साथ खड़ी है पूरी पार्टी
कांग्रेस के महापौर के प्रत्याशी अनिल कल्ला चूंकि आरम्भ से ही राजनीति का ककहरा संगठन के साथ रहकर पढ़ा है, इस कारण वे संगठन के अनुसार ही चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि उनकी भी एक अपनी टीम है जो पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की मदद कर रही है। उसने भी कुछ निर्दलीयों को भेदा है। इसी वजह से भाजपा के लिए कांग्रेस की रणनीति को शिकस्त देना इतना आसान नहीं।
अभी तो दोनों ही तरफ से सामने वाले दल के भीतर सेंधमारी के बड़े प्रयास चल रहे हैं। कुछ हलचल इस वजह से कांग्रेस की तरह भाजपा में भी चल रही है। वहां भी यह दावा बेमानी है कि सब ठीक ठाक है।
कांग्रेस पार्षद मनोज विश्नोई को उनकी होटल को लेकर मिला नोटिस भी गुल खिला सकता है, कांग्रेस ने इसे गम्भीरता से लिया है। इस पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत, गोविंद डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली तक ने टिप्पणी की है, कांग्रेस इस वजह से थोड़ी आक्रामक भी हुई है।