डूडी दुनिया में नहीं, चुनाव उन्हीं के नाम पर! पुण्यतिथि की सभा से फूंका पंचायत चुनाव का बिगुल!
प्रदेश कांग्रेस मान रही डूडी का वजूद, स्थानीय नेता भी इसी नाम के भरोसे, देहात कांग्रेस के हाथ में रहेगी चुनाव की पूरी डोर
3 अक्टूबर को दिग्गज नेता व किसान केसरी स्व रामेश्वर डूडी की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में यह साफ हो गया कि इस बार भी बीकानेर में पंचायत राज चुनाव पूरी तरह से डूडी के नाम पर लड़ें जायेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने भी साफ कह दिया कि इस चुनाव में कांग्रेस को जीताकर ही हम डूडी को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
मधु आचार्य ' आशावादी '
बीकानेर के पंचायत राज चुनाव की 3 दशक की कहानी दिग्गज नेता, किसान केसरी स्व रामेश्वर डूडी के बिना पूरी ही नहीं होती। पूरा राजस्थान जानता है कि 30 साल तक बीकानेर के पंचायत राज पर केवल डूडी का ही वर्चस्व रहा। राज्य में सरकारें बनती रही, बदलती रही, मगर बीकानेर पंचायत राज में डूडी का दबदबा तीन दशक तक कायम रहा। राज से टकराना डूडी का स्वभाव था, टकराहट के बाद भी वे ग्रामीण क्षेत्र में विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकार से बजट लाते।
30 साल से पंचायत समितियों में प्रधान व जिला प्रमुख वही लोग बने जिन पर डूडी ने हाथ रखा। आजकल पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के एक जुमले का बहुत प्रयोग होता है जिसमें उन्होंने कहा था कि राजस्थान में तो हाईकमान अशोक गहलोत है। उनके जुमले को तो लोगों ने पलटते हुए देख लिया। मगर बीकानेर में प्रचलित यह जुमला कि डूडी जिसे चाहेंगे वही प्रमुख बनेगा, आज भी कायम है। जब वो जीवित थे तब इस जुमले को सच साबित किया, अब वे दुनिया में नहीं मगर उनके समर्थक इस जुमले को सही साबित करने में लगे हुए हैं। भाजपा बीकानेर में अपना जिला प्रमुख बनाने के लिए तरसती ही रही है। इस बार के चुनाव में उसकी प्यास बुझेगी या प्यासा ही रहना पड़ेगा, यह तो समय बता ही देगा।
पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा से चुनावी हुंकार :
3 सितम्बर को स्व रामेश्वर डूडी की प्रथम पुण्यतिथि पर देहात कांग्रेस ने एक बड़ी श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। देहात कांग्रेस अध्यक्ष व डूडी के निकटस्थ बिसनाराम सियाग व नोखा विधायक तथा डूडी की धर्मपत्नी सुशीला रामेश्वर डूडी ने इसके लिए पूरी तैयारियां की और जिले के सभी गांवों तक अपील पहुंचाई। कई जगह खुद गए और कई जगहों पर सम्पर्क किया। बीकानेर देहात से बड़ी संख्या में डूडी के समर्थक, चाहने वाले इस सभा में पहुंचे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली भी इस सभा में भागीदारी के लिए आये। डूडी के साथ रहे और कई मुस्लिम, जाट विधायक भी उनको प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। जिले के नेता डॉ बी डी कल्ला, गोविंद मेघवाल, मंगलाराम गोदारा आदि भी आयोजकों के साथ थे। चूंकि 3 को ही पंचायत राज चुनाव की राज्य सरकार ने घोषणा की थी तो यह श्रद्धांजलि सभा चुनावी हुंकार भी बन गयी।
सभी वक्ताओं ने कहा कि स्व रामेश्वर डूडी को सच्ची श्रद्धांजलि तो तभी होगी जब इस चुनाव में हम कांग्रेस को पंचायतों व जिला परिषद में चुनाव जिताएं। जैसे अपने जीवन काल मे डूडी कांग्रेस का परचम फहरा के भाजपा को शिकस्त दिया करते थे, वैसी ही शिकस्त हम इस बार उनको दें। सभी वक्ताओं ने इसका संकल्प लेने का भी आग्रह किया। कुल मिलाकर इस श्रद्धांजलि सभा से कांग्रेस ने बीकानेर में पंचायत राज चुनाव की हुंकार भर दी।
प्रदेश के नेता डूडी के ही भरोसे दिखे :
इस श्रद्धांजलि सभा में पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली ने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस बीकानेर में इस बार भी पंचायत राज चुनाव में डूडी के नाम के ही भरोसे है। इस तरह के राजनीतिक संकेत सभी नेताओं के संबोधन से मिले। डोटासरा ने इशारों में डूडी समर्थकों से टकराहट लिए हुए पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल को भी संकेत दे दिया कि डूडी के नाम से ही पंचायत चुनाव जीता जा सकता है। इस बात को ध्यान रखें।
प्रदेश कांग्रेस को डूडी के वर्चस्व का पता है। उनके कट्टर समर्थक हर गांव, हर ढाणी में है। जिनकी लड़ाई डूडी ने सदा लड़ी थी। निर्लिप्त भाव से वे गांव व ढाणी की 36 कौम के सदा साथ रहे। अपने रहते हुए ही उन्होंने पार्टी की कमान अपने निकटस्थ बिसनाराम सियाग को सौंप दी थी और खुद उनको थे तब तक निर्देशित कर तैयार किया। उसी का परिणाम था कि पार्टी ने फिर से देहात कांग्रेस की कमान बिसनाराम को सौंपी। इस श्रद्धांजलि सभा में गांवों से जो नेता आये और जो पंचायत राज चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, उनकी बातों से स्पष्ट हो गया कि वे डूडी के नाम के भरोसे ही चुनावी समर में उतरना चाहते हैं।
देहात कांग्रेस यानी डूडी के हाथ में ही है चुनावी कमान :
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस सभा में स्पष्ट कर दिया कि बीकानेर में इस बार भी पंचायत राज चुनाव की कमान डूडी यानी देहात कांग्रेस कमेटी के ही हाथ में रहेगी। क्योंकि देहात कांग्रेस के पास ही वो जानकारी है जो डूडी रखते थे, मतलब किस जगह से कौन जीत सकता है। यह दूसरा कोई नहीं जानता। डूडी के कट्टर समर्थकों को भी देहात अध्यक्ष बिसनाराम व नोखा विधायक सुशीला डूडी ही जानती है। इस कारण प्रदेश कांग्रेस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। उसने चुनाव की पूरी कमान देहात कांग्रेस को राहुल गांधी की भावना के अनुरूप दे दिया है।
अब सुशीला डूडी जी व बिसनाराम का यह दायित्त्व है कि वे किसी भी डूडी समर्थक यानी असली और निष्ठावान कांग्रेसी के साथ अन्याय न होने दे। डूडी की तरह वाजिब व्यक्ति को उसका हक देने में कोताही न बरते।