कोर कमेटी के बैठक में राजे के अलग ही तेवर नजर आये, कार्यकर्ता को तरजीह देने का कह भाजपा कार्यकर्ताओं का दिल जीता
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
राज्य की राजनीति में हाशिये पर आने के बाद भी वसुंधरा राजे अब भी भाजपा कार्यकर्ताओं की पहली पसंद बनी हुई है। हालांकि पार्टी ने उनको तीसरी बार सीएम बनने का अवसर नहीं दिया मगर कार्यकर्ताओं और नेताओं में उनका क्रेज कम नहीं हुआ है। वे अभी भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है, मगर राजस्थान में उनकी पकड़ सभी जिलों में समान रूप से है। ये बात पार्टी नेतृत्त्व को भी पता है। इस कारण उनका हर बयान एक महत्त्व रखता है और उस पर सबकी नजर रहती है।
पिछले दो साल से उनके हर बयान ने सुर्खियां बटोरी है। आजकल वे सत्ता व अफसरों पर तंज करने से भी नहीं चूकती। इसके अलावा अपनी ही पार्टी के नेताओं को सलाह देने व निर्देश देने से भी नहीं चूकती। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ व मुख्यमंत्री भजनलाल उनके बयानों को गंभीरता से लेते है। पार्टी को अब तय करना है कि उनकी क्या भूमिका रहेगी ? उनको राजस्थान में नजरअंदाज करना आसान नहीं।
वे राज्य भाजपा की अकेली ऐसी नेता है जिनके साथ सांसद, विधायक के अलावा संगठन के पदाधिकारी भी है। हर जिले में राजे के समर्थक मिलेंगे। इसके अलावा जनता में भी उनकी अत्यधिक पॉपुलिटी है। अब भी वे जब किसी भी जिले के दौरे पर जाती है तो कारों का एक बड़ा काफिला उनके साथ होता है। दो दिन पहले के अपने बयान से राजे फिर चर्चा में है। इस बार पार्टी का बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक का कार्यकर्ता उनके बयान से सहमत है।
राजे का ये था बयान:
शनिवार को जयपुर में भाजपा कोर कमेटी की बैठक थी। जिसमें राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी एल संतोष, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, सीएम भजनलाल भी थे। उस बैठक में राजे ने कार्यकर्ताओं की भावना के अनुरूप कहा कि भाजपा नेताओं के फोन नहीं उठाने वाले अफसरों को परिणाम भुगतने होंगे।
अपनी ही पार्टी के नेताओं , सीएम व मंत्रियों को सुनते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता रीढ़ की हड्डी है और वही हमें सत्ता तक पहुंचता है। बूथ से लेकर जिला स्तर के कार्यकर्ताओं की मेहनत से ही पार्टी का इतना विस्तार हुआ है। राजे ने एक तरह से सत्ता व ब्यूरोक्रेशी को चेतावनी दी कि कार्यकर्ता की नहीं सुनी गई तो परिणाम भुगतने होंगे।
पार्टी कार्यकर्ताओं का दिल जीता:
वसुंधरा राजे का ये तेवर पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं को खूब पसंद आया। बयान पर चर्चा शुरू हो गयी और हर छोटे से बड़ा पदाधिकारी राजे की तारीफ करने लगा। यह उनके मन की बात थी।
दरअसल, मंत्रियों की जन सुनवाई, सीएम की संभागवार बैठको में कार्यकर्ता यही कहते नजर आए कि मंत्री कार्यकर्ताओं की नहीं सुनते। ठीक इसी तरह प्रभारी मंत्री जब अपने प्रभार के जिले में जाते है तो वहां भी कार्यकर्ता व पदाधिकारी अफसरों, मंत्रियों के बारे में यही कहते नजर आते है। इस कारण राजे ने इसी दुखती रग पर हाथ रखा और हर कार्यकर्ता उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ गया।