राजे की दिल्ली में नेताओं से मुलाकात के सियासी मायने हैं, राजेन्द्र राठौड़ को भी एडजस्ट करना अभी शेष
भाजपा में राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
भाजपा में इन दिनों सियासी गतिविधियां काफी तेज है। राष्ट्रीय स्तर पर कई मोर्चों पर पार्टी में हलचल है। एक तरफ जहां मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होना है वहीं दूसरी तरफ नये बने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी अपनी टीम बनाने में जुटे हैं। आगामी समय में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा सहित कुछ राज्यों में विधानसभा के चुनाव है, उनको जीतने की गणित के साथ ही दोनों जगह बदलाव किया जा रहा है।
देश में बड़े स्तर पर राजनीतिक दलबदल हुआ है। इससे भाजपा ने लोकसभा व राज्यसभा में अपनी ताकत को मजबूत किया है और बहुमत को वो दो तिहाई तक ले जाना चाहती है। उसके लिए चल रही गतिविधियों से लगता है कि भाजपा कुछ बड़े निर्णय बहुमत लेकर करना चाहती है। क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में उसे अपने बूते बहुमत नहीं मिल सका था, जिसका पार्टी को मलाल है। उस कमी को वो अब पूरा करना चाहती है। बहुमत बना लेने के बाद वो क्या निर्णय करना चाहती है, यह भविष्य के गर्भ में है।
बंगाल में टीएमसी को विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त देने के बाद ही भाजपा ने अपनी इन गतिविधियों को तेज किया। सबसे पहले ममता बनर्जी की टीएमसी टूटी है। उसके 20 लोकसभा सदस्य पार्टी से अलग हुए हैं और उन्होंने एनडीए यानी भाजपा सरकार को समर्थन का निर्णय किया है। चार राज्यसभा सदस्य भी टीएमसी व सदस्यता छोड़ चुके हैं। उन खाली सीटों पर भाजपा के ही उम्मीदवार जीतेंगे। ठीक इसी तरह विधायक दल भी पूरी तरह बिखर गया है। इस कारण विधानसभा के साथ राज्यसभा में भी भाजपा मजबूत हुई है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सदस्यों ने भी पार्टी छोड़ी और अपना विलय भाजपा में कर लिया। फिर नम्बर लगा शिव सेना उद्धव का उसके भी 6 लोकसभा सदस्य एकनाथ शिंदे यानी एनडीए में शामिल हो गए। अब एनसीपी शरद भी निशाने पर ही है। मंत्रिमंडल व भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अब इन लोगों को खपाने का काम भी भाजपा को करना ही पड़ेगा।
कुछ मंत्री भी बनेंगे:
जो अन्य दलों को छोड़कर भाजपा में आये हैं उनमें से कुछ को तो मंत्रिमंडल में जगह देनी ही पड़ेगी। जाहिर है उस सूरत में कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा भी जा सकता है। क्योंकि भाजपा का बड़ा ध्येय अपने संगठन को मजबूत करना है। दो मंत्रियों बिट्टू व कुरियन को राज्यसभा टिकट नहीं मिला, इन स्थानों को दलबदल के आये नए लोगों से भरा जायेगा। भाजपा अपने कई मंत्रियों को आगामी दिनों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए संगठन में भेजने की रणनीति पर भी काम कर सकता है। किसको क्या मिलता है, यह तो आने वाला समय बतायेगा।
राजे की क्या रहेगी भूमिका:
भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भूमिका क्या रहेगी, यह भाजपा के नेताओं व कार्यकर्ताओं में बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री उनको इस बार बनाया नहीं गया, जाहिर है उनके लिए अब पार्टी संगठन में ही कोई सम्मानजनक स्थान तलाशा जायेगा। बुधवार को राजे ने दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन व संगठन महामंत्री बी एल संतोष से मुलाकात की। जिससे यह आभाष होता है कि पार्टी नेतृत्त्व उनको लेकर कुछ निर्णय कर रहा है। उनको संगठन में जगह व उनके समर्थक विधायकों को राज्य मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राजेन्द्र राठौड़ पर भी निर्णय लंबित:
राजस्थान भाजपा के दिग्गज नेता राजेन्द्र राठौड़ को लेकर भी कार्यकर्ताओं के मन में राजे की तरह सवाल है कि उनको कहां समायोजित किया जायेगा। इस बार वे तारानगर से विधानसभा का चुनाव नेता प्रतिपक्ष रहते हुए हार गए थे।
पहले उनको लोकसभा चुनाव लड़ाने की बात चली, वो सिरे नहीं चढ़ी। फिर उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात हुई मगर मदन राठौड़ को अध्यक्ष बनाया गया। फिर उनको राज्य में मनोनयन की बात हुई, मगर सरकार का आधा कार्यकाल निकलने के बाद भी मनोनयन नहीं हुआ। उसके बाद उनको राज्यसभा भेजने की बात उठी, मगर वो भी पूरी नहीं हुई। प्रदेश अध्यक्ष के लिए तो राठौड़ ने खुद कह दिया कि मैं अपने को योग्य नहीं मानता। अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उनको बड़ी जिम्मेवारी मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। समय ही इस बात का भी भी निर्णय करेगा।
राज्य के कुछ और नेताओं के नाम:
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में राजस्थान को अच्छा प्रतिनिधित्व मिलेगा, यह तो अब लगने लग गया है। राजस्थान के नेताओं ने हरियाणा, बिहार, असम और बंगाल विधानसभा चुनावों में अच्छा काम करके यह तो साबित कर दिया कि उनमें सांगठनिक क्षमता है। जिसका पार्टी उपयोग अवश्य करेगी। इस सूरत में राज्य के कई नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दिख सकते हैं।
कुछ दिनों में होगा स्पष्ट:
भाजपा के भीतर बदलाव, पुनर्गठन व एडजेस्टमेंट को लेकर चल रही गतिविधियों का पटाक्षेप इस महीने के अंत या अगले महीने के प्रथम सप्ताह में होने के कयास है। तब पूरी तस्वीर सामने आ जायेगी।