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विधानसभा पहुंची, ढ़ाई घन्टे रही, सदन में केवल 20 मिनट, भाजपा के कुछ विधायकों से मिलने में बिताया समय

शिव के निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह से मुलाकात चर्चा में
प्रदेश में लगातार कर रही है दौरे, भाषणों में भी तंज
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.

राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे यूं तो काफी समय से सत्ता के हाशिये पर है। उनको इस बार सत्ता में आने पर भी पार्टी ने नेतृत्त्व नहीं दिया। पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया। तबसे ही राजे के राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह तरह के कयास लगाये जाने लगे। कभी कुछ तो कभी कुछ जिम्मेदारी देने की चर्चाएं चली, पर वे केवल चर्चाएं ही बनी रही।

सब जानते है, वसुंधरा के साथ कई सांसद है और विधायक भी। राज्य में जनता के बीच भी उनका आधार कम नहीं। हर जगह उनके समर्थक मौजूद है। कुछ समय तो राजे चुप रही। अपनी गतिशीलता को विराम लगा दिया। उनके समर्थक विधायक भी मौन हो गए। कई विधायक मंत्री पद का अनुभव रखते थे और दावेदार भी थे, मगर वे मंत्री नहीं बनाए गए। उनके मंत्री न बनाये जाने की वजह तो पार्टी जानती है, मगर वे राजे समर्थक थे, यह आम जनता भी जानती है। 
 

एक साल तक वसुंधरा राजे व उनके समर्थक विधायक चुप रहे। फिर विधायकों ने जन मुद्धों पर विधानसभा में मंत्रियों को घेरना आरम्भ कर दिया। वहीं दूसरी तरफ खुद राजे भी जनता के बीच निकल पड़ी। उनको जो जन समर्थन मिला, उससे उनमें जबरदस्त उत्साह का संचार हो गया।

राजे पहुंची सदन की कार्यवाही में:

अब लगातार सक्रिय हो चुकी वसुंधरा राजे विधानसभा भी पहुंची है। नहीं तो यह तय धारणा थी कि राजे और गहलोत विधिक रूप से जितना आवश्यक होता है, उतना ही विधानसभा में आते थे। इस बार राजे ने उस भ्रम को तोड़ा।

बीते मंगलवार को वे अचानक विधानसभा पहुंची। ढाई घन्टे तक वहां रही। सदन में तो केवल 20 मिनट ही बैठी, बाकी समय विधायकों से मिलने में बिताया। सभी विधायकों से मिली। उनसे उनके व क्षेत्र के हालचाल जाने। अनोपचारिक राजनीतिक चर्चा भी की। 
 

अपने चिरपरिचित अंदाज में हल्की फुल्की मजाक भी विधायकों से करती रही। विधानसभा के मानसून सत्र में भी वे इसी तरह अचानक विधानसभा पहुंची थी। उस वक्त सदन में नहीं गयी। केवल विधायकों से मेल मुलाकात की। उस समय कुछ नए विधायक भी उनके नजदीक दिखे। ये वे विधायक थे जिनके राज होते हुए भी काम नहीं हो रहे। राजे का इस तरह विधानसभा आना और चुनिंदा विधायकों से मिलना, सामान्य या संयोग तो नहीं हो सकता। ये हर राजनीति का जानकार जानता है।

शिव विधायक से भी मुलाकात:

वसुंधरा राजे की विधायकों से बात - मुलाकात वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में सामान्य तो नहीं होती, यह तय है। इससे ऊपर जब राजे अलग से शिव से विजयी निर्दलीय राजपूत विधायक रवींद्र सिंह भाटी से भी मिली। दोनों के बीच जब बातचीत हुई तो कोई अन्य पास नहीं था। 

इस तरह की मुलाकात के यदि राजनीतिक अर्थ निकाले जाते है तो गलत भी नहीं है। अब इन दोनों की मुलाकात को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे है। राजे के इन दोनों अवसरों पर निर्दलीय विधायक व एक समय में राजे के खास रहे यूनुस खान उनके स्वागत को गेट पर ही तैयार मिले। ये घटनाएं कुछ राजनीतिक संकेत तो देती ही है।

प्रदेश में भी हो रहे दौरे:

पिछले 8 महीने से राजे लगातार प्रदेश में दौरे भी कर रही है। चाहे मांगलिक अवसर हो या गमी, वो तत्काल पहुंच रही है। चाहे नेता पक्ष का हो या विपक्ष का, वे निःसंकोच पहुंच रही है। जहां भी वे जाती है, सड़क मार्ग से जा रही है। रास्ते मे लगातार स्वागत, कारों का काफिला और भारी भीड़, यह सब उनके राजनीतिक रुतबे को तो दिखाते है। 

राजे के भाषण भी इन दिनों खूब चर्चा बटोर रहे है। उनके भाषणों में इन दिनों विशेष तीखापन है और भीतर तक हिला देने वाले तंज भी। जैसे एक जैन समाज के कार्यक्रम में वे बोली कि किसी का दिल दुखाना भी हिंसा है। आजकल उनके भाषणों पर राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। लगता है,  अंदरखाने कुछ हलचल ज्यादा है।