सचिन ने कहा कि गहलोत मुझे अपने बेटे वैभव की तरह मानते हैं, इस बयान के बाद गहलोत के पास तरकश में तीर नहीं
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
अशोक गहलोत - सचिन पायलट के प्रकरण में हर दिन नया मोड़ आता दिख रहा है। अपनी शालीन भाषा व संयमित बोल के कारण सचिन ने गहलोत के तरकश के सारे तीर ही समाप्त कर दिए। पिछले 3 दिन गहलोत ने जिस तरह से सचिन पर ताबड़तोड़ आक्रमण किये उससे लगता था कि अब सचिन भी प्रहार करेंगे। सचिन के सहयोगियों मुकेश भाकर, हेमाराम चौधरी, मुरारीलाल मीणा, रमेश मीणा आदि ने तो गहलोत के आरोपों पर जवाब भी दिए और गहलोत को एक्सपोज करने की कोशिश भी की।
मगर इस वाक्य युद्ध के बीच से सचिन पायलट ने जरूर अपने को संयमित रखा और शालीन व्यवहार किया। वे अपनी राजनीतिक सौम्यता को पूरी तरह से बचाये रहे और जरा सा भी प्रतिक्रिया में नहीं बोले। दूसरी तरफ जब आलाकमान ने गहलोत सरकार के विधायक दल की बैठक बुलाई मगर उनके समर्थक विधायक आये नहीं। उलटे विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी को अपने इस्तीफे सौंप दिए। आलाकमान की पूरी तरह से बेईज्जती की। मल्लिकार्जुन खड़गे व अजय माकन को बैरंग लौटना पड़ा।
गहलोत ने राजनीतिक जादूगीरी को दिखाते हुए विधायकों के व्यवहार के लिए माफी मांगी, मगर तब तक तीर गहलोत के कमान से निकल चुका था। उस समय खड़गे व माकन के पास गहलोत के दूत बनकर विधायकों का पक्ष रखने सी पी जोशी, शांति धारीवाल व प्रताप सिंह खाचरियावास पहुंचे थे। मगर अभी उनमे से एक भी नेता गहलोत के पक्ष में बोलने के लिए सामने नहीं आया है। सब बातें गहलोत को ही बोलनी पड़ रही है और सचिन चुप है, मामला आलाकमान के सामने खुलता ही जा रहा है। यूँ कहा जाए कि एकतरफा गहलोत ही आरोप लगा रहे हैं सचिन पर, सचिन कोई जवाब ही नहीं दे रहे। सौम्यता के व्यवहार के साथ गहलोत के हर आरोप को टाल रहे हैं और शालीनता ओढ़े हुए हैं।
सचिन ने चलाया ब्रह्मास्त्र:
स्व राजेश पायलट की याद में हुई सर्वधर्म सभा मे सचिन पहुंचे। उनके समर्थक विधायक, सांसद भी पहुंचे। भारी भीड़ जुटी। पूरी ताकत से सचिन समर्थकों ने लोगों को बुलाकर अपना तकड़ा शक्ति प्रदर्शन किया।
इससे पहले जब सचिन ट्रेन से पहुंचे तो उनकी अगवानी के लिए रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ पहुंची। ' सचिन आई लव यू ' के नारों से आकाश गुंजा दिया गया। यह नारा फिर से जीवित हुआ है। जबरदस्त स्वागत पूरे रास्ते मे हुआ। लोगों का मानना है कि पहली बार इस तरह का दमदार स्वागत हुआ। यह सचिन पर हो रहे राजनीतिक हमले का एक तरह से राजनीतिक जवाब था। लोगों के जरिये जवाब दिया गया। सचिन प्रकरण पर कुछ नहीं बोले।
कार्यक्रम के बाद सचिन पायलट ने ब्रह्मास्त्र चलाया। बहुत ही सोची समझी कूटनीति के तहत। उन्होंने मीडिया के सामने जुबान खोली। जब पत्रकारों ने उनसे गहलोत के बयानों के बारे में पूछा तो उन्होंने बहुत ही शालीनता से कहा - वो हमारे बुजुर्ग है। मैं तो केवल इतना कह सकता हूँ कि उन्होंने मुझमे और वैभव गहलोत में कभी फर्क नहीं समझा। यही ब्रह्मास्त्र था। इससे आगे कुछ नहीं कहा उन्होंने। मैसेज गहलोत व आलाकमान तक पहुंच गया और सचिन एक बार फिर विवाद के बोल से बच गए।
गहलोत के तरकश और तीर !
सचिन पायलट ने जब यह कहा कि गहलोत मुझमें और वैभव में कोई फर्क नहीं समझते तो मीडिया ने इस बयान को हाथों हाथ लिया। जयपुर में बैठे गहलोत सोच रहे थे कि पायलट उनके बयानों को लेकर उन पर हमला करेंगे और वे जवाब देकर इस मसले को जिंदा रखेंगे। गहलोत को सचिन के इस तरह के बयान की अपेक्षा ही नहीं थी।
यह बात उनकी प्रितिक्रिया से अभिव्यक्त हुई। उनकी स्क्रिप्ट अलग थी मगर सचिन ने नई पटकथा को ही खड़ा कर दिया। गहलोत ने जवाब में अटपटे तरीके से अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि मैने भी तो पहले यही कहा था। इनके घर हमारा आना जाना था। कोई गलत नहीं कहा मैने। मीडिया से भी उन्होंने सवाल किया कि आप बताओ सचिन ने गलत कहा क्या ? इससे लगता है तरकश के तीर मौन हो गए।