सीएम संभागवार बैठक कर ले चुके फीडबैक, संगठन में भी नियुक्तियां इन चुनावों को ध्यान में रखकर हुई
अधिकतर कांग्रेस का वर्चस्व रहता है इन चुनावों में
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Network.
पंचायत राज चुनाव के लिए अब चौसर पूरी तरह से बिछ चुकी है। भाजपा और कांग्रेस ने अपनी तरफ से तैयारियों को अंतिम रूप देना आरम्भ कर दिया है। दोनों राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। क्योंकि अधिकतर इन चुनावों में कांग्रेस को ही बड़ी सफलता मिलती रही है। कांग्रेस को जहां अपनी साख बचाने की चिंता है तो भाजपा को भी इस बार बेहतर प्रदर्शन की चुनोती है।
पंचायत राज चुनावों में एक तरफ जहां भाजपा सरकार व संगठन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस संगठन की प्रतिष्ठा का पैमाना भी इन चुनावों से मापा जायेगा। दोनों दल अब तो चुनाव आयोग की तरफ से पंचायत राज चुनावों की तारीखों की घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे है।
भाजपा ने काफी सूक्ष्मता व गहनता से अपने वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से पंचायत राज के परिसीमन का काम कराया है, इस कारण उसे इस बार बेहतर नतीजों की उम्मीद भी है। भाजपा की मनमानी का कांग्रेस ने विरोध किया और उसके आधार पर चुनावी जमीन ग्रामीण क्षेत्र में तैयार की।
सीएम कर चुके संभागवार बैठकें:
भाजपा सरकार व संगठन के लिए पंचायत राज चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है, इस कारण चुनाव की तारीखें तय होने से पहले ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संभागवार बैठकें ले ली है। जिसमें संगठन के पदाधिकारियों के अलावा विधायक, सांसद व प्रमुख नेताओं को बुलाया गया।
सीएम ने उनसे स्थितियों पर चर्चा की। उनके क्षेत्र की समस्याओं व जातिगत समीकरणों के बारे में विस्तार से जाना। फिर मंत्रियों को हिदायत दी कि वे अपने अपने प्रभार के जिलों में जायें। वहां की समस्याओं का निदान प्राथमिकता से कराएं। कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी को दूर करें कि मंत्री उनसे मिलते नहीं है।
सीएम ने सभी संभागों की स्थिति व जातिगत समीकरणों को समझने के बाद पंचायत चुनाव को लेकर रणनीति भी बनाई है। उसी कारण पंचायतों के परिसीमन में भी थोड़ा ज्यादा समय लगा।
पार्टी संगठन की भी रणनीति:
सरकार की तरह भाजपा संगठन ने भी अपनी रणनीति पंचायत राज चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई है ताकि पहले से बेहतर परिणाम प्राप्त किये जा सकें। संगठन ने एक मजबूत व चुनावी दृष्टि से उपयोगी नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति में लिया है ताकि उनका लाभ मिल सके। शहरी क्षेत्र से प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाते समय निकाय चुनाव को ध्यान में रखा गया है तो देहात से बनाते समय पंचायत राज चुनाव केंद्र में रहा है। अब इन नियुक्तियों का कितना लाभ मिलेगा, यह तो समय आने पर ही पता चलेगा।
भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा है:
पंचायत राज चुनाव भाजपा के लिए एक बड़ी अग्नि परीक्षा से कम नही। क्योंकि एक तो इन चुनावों में हमेशा से ही भाजपा का प्रदर्शन उल्लेखनीय नहीं रहता। दूसरे भाजपा पर शहरी पार्टी होने का भी एक ठप्पा विपक्ष ने लगा रखा है। इसे नकार कर अच्छा प्रदर्शन करना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं।
कांग्रेस भी है पूरी तरह तैयार:
पंचायत राज चुबावों के लिए कांग्रेस भी पूरी तरह से तैयारी कर चुकी है। गोविंद डोटासरा पंचायती राज सशक्तिकरण सम्मेलन कर चुके है। मनरेगा के नाम व नियम बदलने का मुद्दा गांव गांव तक ले जा चुके है। कांग्रेस ने विवाद से बचने के लिए जिला कार्यकारिणी तय होने के बाद भी एकबारगी रोक दी है। पंचायत राज चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबला होना तय है।