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17 से कर रहे युवा संवाद कार्यक्रम की राज्य से शुरुआत, बदलेंगे राज्य में कांग्रेस की पूरी तस्वीर, नया नेतृत्त्व सम्भव

भाजपा से भी सम्बन्ध रखने वालों को दिखाएंगे बाहर का रास्ता
राजनीतिक स्क्रिप्ट तैयार, किरदार भी तैयार
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Network.
 

कांग्रेस में ताबड़तोड़ फैसले लेकर अपनी सख्ती दिखा चुके लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की निगाहें अब राजस्थान की तरफ है। इस राज्य की गुटबाजी 5 साल से चरम पर है। पहले जब कांग्रेस में दो फाड़ हुए तो एक अशोक गहलोत का व दूसरा सचिन पायलट का गुट बना।

खींचतान व गुटबाजी इतनी तीव्र थी कि आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस आलाकमान को भी राज्य के गहलोत गुट ने नीचा दिखा दिया। जब आलाकमान ने नेतृत्त्व परिवर्तन के लिए दो पर्यवेक्षक अभी के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व कोषाध्यक्ष अजय माकन को जयपुर भेजा। पार्टी के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब पर्यवेक्षक बैठे रहे, मगर विधायक नहीं आये। खड़गे व माकन को बैरंग लौटना पड़ा।

हद तो तब हुई जब गहलोत के खास व राज्य के स्वायत्त शासन मंत्री ने यहां तक कह दिया कि राजस्थान में तो आलाकमान केवल अशोक गहलोत है, दूसरा कोई नहीं। आलाकमान के मन में तब से यह बयान फांस की तरह अटका हुआ है। गहलोत ने अपने विधायकों के व्यवहार पर माफी भी मांगी, मगर उस घटना को न तो राहुल भूले और न ही सोनिया गांधी। तब से गहलोत की आलाकमान से नजदीकियां धीरे धीरे बहुत ही कम रह गयी है।

इस बीच आलाकमान ने गोविंद डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया, उन्होंने गहलोत से नजदीकियां कायम रखते हुए अपना ही गुट खड़ा कर लिया। इतना ही नहीं गहलोत की तरह सचिन के समर्थकों को किनारे भी करीने से लगाना आरम्भ कर दिया।

सूत्र बताते हैं कि अब इस स्थिति से खड़गे नाराज है और उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस के सामने नाराजगी भी जता दी है। गहलोत के बारबार मानेसर प्रकरण को उठाने से भी आलाकमान नाराज हैं और राहुल अब राज्य को लेकर सख्त हो गए हैं। शीघ्र ही यह सख्ती अब पार्टी के निर्णयों में भी दिखेगी। मध्यप्रदेश की तरह बड़े विकेट भी उखड़ने तय है। जिसकी स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है और अब उस पर क्रियान्विति होनी ही शेष है।

17 के दौरे के बाद परिवर्तन की नींव:

राहुल गांधी युवा संवाद का राष्ट्रीय कार्यक्रम आरम्भ कर रहे हैं और उसकी शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में पार्टी नेतृत्त्व में परिवर्तन की नींव भी इसी दिन से पड़ जाएगी। स्क्रिप्ट तो पहले से ही तैयार है। अब राज्यसभा के चुनाव भी पूरे हो चुके। अब संगठन को दुरस्त करने का काम राहुल शुरू कर चुके हैं।


बदल जाएगी राज्य की पूरी तस्वीर ?

जानकारों का मानना है कि अब संगठनात्मक स्तर पर राज्य कांग्रेस की पूरी तस्वीर को ही राहुल गांधी बदल रहे हैं। उनके पास अन्य राज्यों की तरह यहां के भी उन नेताओं की लिस्ट है जो भाजपा के प्रति सॉफ्ट है और उसके नेताओं से उनका तालमेल है।

राज्य में भी अनेक नेता भाजपा के कुछ नेताओं की तारीफ में सार्वजनिक बयान देने से भी नहीं चूकते है। उसका पूरा ब्यौरा राहुल व खड़गे के पास है और उसी की छांव में नेतृत्त्व बदला जाएगा। मध्यप्रदेश में इसी तरह भाजपा के नेताओं की तारीफ करने वाले एक पुराने नेता को राहुल बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं।

इस स्थिति को कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बहुत पहले भांप लिया था। इस कारण ही मानेसर के बहाने उन पर हुए कड़े प्रहार व बदली भाषा के बयानों के बाद भी उन्होंने संयम रखा और मर्यादा को नहीं छोड़ा। इस पूरे प्रकरण की रिपोर्ट भी आलाकमान के पास पहुंची हुई है।