इस बार ठोक बजाकर बनाये जाएंगे पदाधिकारी, जातीय संतुलन को बनाने की रहेगी कोशिश
भाजपा के प्रति सॉफ्ट लोगों को तरजीह नहीं
मधु आचार्य ' आशावादी '
RNE Special.
राज्य में 50 में से अब तक 49 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति संगठन सृजन अभियान के तहत हो चुकी है। प्रदेश में केवल राजसमंद ही ऐसा जिला बचा है जहां कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बन सका है। वहां की स्थानीय राजनीति में टकराहट के कारण सर्व सम्मति नहीं बन सकी है और अध्यक्ष का निर्णय टल गया।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने जो जिला अध्यक्षों की पहली सूची जारी की, उसमें बीकानेर शहर व देहात अध्यक्षों के नाम शामिल थे।
बीकानेर में टकराहट नहीं रही:
बीकानेर में शहर व देहात अध्यक्षों के नाम तय करने में टकराहट नहीं रही। नेताओं में आपसी तालमेल जल्दी हो गया और सर्व सम्मति भी बन गयी। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने स्वयं भी बीकानेर संगठन के लिए सक्रियता दिखाई थी।
बीकानेर दिग्गज नेताओं डॉ बी डी कल्ला, गोविंद मेघवाल, भंवर सिंह भाटी, वीरेंद्र बेनीवाल, मंगलाराम गौदारा का जिला है। राज्य के कद्दावर नेता रामेश्वर डूडी के निधन के बाद उनकी विरासत को संभालने का काम उनकी पत्नी व नोखा विधायक सुशीला डूडी व देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग कर रहे है। डूडी के निधन के बाद यहां आरएलपी के हनुमान बेनीवाल भी सक्रिय हुए है।
इस बात का अहसास प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को भी है। उस वजह से ही श्रीमती सुशीला डूडी की सहमति के बाद डूडी के निकटस्थ बिसनाराम सियाग को देहात कांग्रेस की कमान फिर से सौंपी गई। वे सक्रिय भी तुरंत हो गए ताकि आरएलपी के विस्तार को सीमित कर सके। इस बार फिर से बीकानेर देहात अध्यक्ष बिसनाराम के बनने का कोई बड़ा विरोध वीरेंद्र बेनीवाल, मंगलाराम गौदारा, गोविंद मेघवाल व भंवर सिंह भाटी की तरफ से नहीं हुआ। बिसनाराम भी इन सब नेताओं से तालमेल कर इस बार सक्रिय है, उनको नोखा विधायक सुशीला डूडी व पीसीसी चीफ डोटासरा का साथ है ही।
शहर कांग्रेस में दिग्गज डॉ बी डी कल्ला के अलावा सक्रियता डॉ तनवीर, यशपाल गहलोत, मकसूद अहमद, जिया उर रहमान आरिफ की ही। इनके अलावा आईपीएस की नोकरी छोड़ लोकसभा चुनाव लड़े मदन मेघवाल की ही सक्रियता है। पार्टी ने पिछली बार ओबीसी के यशपाल को कमान दी तो इस बार सबको चकित करते हुए मदन मेघवाल को कमान पकड़ाई। मेघवाल को उनके अनुभव व बड़े वोट बैंक का फायदा मिला। उनके नाम से शहर का कोई भी नेता नाराज नहीं था। मेघवाल ने भी काम संभालते ही अनुभवी क्षमता को दिखाया। संगठन में जान फूंकने में लग गए। पहली बार शहर व देहात कांग्रेस में इस तरह का सुगठित तालमेल दिख रहा है।
अब पदाधिकारियों पर मेहनत:
प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर अब मेघवाल व सियाग अपनी अपनी टीम बनाने के लिए मेहनत कर रहे है। मेहनत इस कारण है, क्योंकि आने वाले समय में स्थानीय निकाय व पंचायत राज के चुनाव है। मदन मेघवाल की परीक्षा स्थानीय निकाय चुनाव में होगी तो बिसनाराम सियाग का मूल्यांकन पंचायत राज चुनावों में होगा।
स्थानीय निकाय चुनाव में पिछली बार कांग्रेस ज्यादा पिछड़ी नहीं थी भाजपा से, इस बार मेघवाल के अध्यक्ष बनने से कुछ वार्डों में कांग्रेस को अतिरिक्त फायदा मिलेगा। कल्ला, मकसूद, मालावत, आरिफ, यशपाल व मेघवाल की टीम मिलकर बेहतर परिणाम हासिल कर सकती है।
बिसनाराम सियाग के पास रामेश्वर डूडी की विरासत का अनुभव तो है ही, साथ मे नोखा विधायक सुशीला डूडी भी है। वीरेंद्र बेनीवाल, गोविंद मेघवाल, भंवर सिंह, राजेन्द्र मुंड, मंगलाराम से टकराहट भी नहीं। पहले संगठन का सियाग के पास अनुभव भी है।
पदाधिकारियों पर काम हो गया:
इस बार शहर व देहात में पार्टी पदाधिकारी बनाने के लिए मदन मेघवाल व बिसनाराम सियाग ने पूरी कसरत कर ली है। ठोक बजाकर पदाधिकारी बनाये जा रहे है, क्योंकि दोनों अध्यक्षों को बेहतर परिणाम देने है। जातीय संतुलन बनाते हुए दोनों ने अपनी टीम को अंतिम रूप दिया है। इस बार मेघवाल व सियाग ने सिफारिश को नहीं, बैकग्राउंड को देखा है। इस तरह के निर्देश भी पीसीसी से है। शहर में कई पदाधिकारी भाजपा को लेकर सॉफ्ट है, उनको मेघवाल ने चिन्हित भी किया है। उनको इस बार तरजीह नहीं मिलेगी। यही कसरत देहात कांग्रेस में भी हुई है।