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TMC West Bengal : ममता बनर्जी की TMC में बगावत, निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने 59 विधायकों के समर्थन का किया दावा

 

RNE Kolkata. 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें विधानसभा में पार्टी के 59 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में संभावित सियासी उठापटक और TMC में अंदरूनी कलह को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक उन्हें विधानसभा में नए विपक्ष के नेता के रूप में पेश करने की तैयारी में जुटे हैं। उनके अनुसार कई विधायक उनके साथ संपर्क में हैं और विधानसभा में शक्ति प्रदर्शन की रणनीति बनाई जा रही है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा पहुंचे और उनके समर्थन में कुछ अन्य विधायक भी वहां मौजूद रहे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है।

क्या TMC में पड़ सकती है फूट?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऋतब्रत बनर्जी का दावा सही साबित होता है और उनके साथ वास्तव में बड़ी संख्या में विधायक खड़े होते हैं, तो तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर विवाद पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में पार्टी के संगठन, चुनाव चिह्न और वास्तविक नेतृत्व को लेकर भी कानूनी एवं राजनीतिक लड़ाई छिड़ सकती है। हालांकि, किसी भी दल में टूट की स्थिति का निर्धारण केवल दावों से नहीं बल्कि विधानसभा में वास्तविक संख्या बल और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर होता है।

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी?

ऋतब्रत बनर्जी का राजनीतिक सफर वामपंथी राजनीति से शुरू हुआ था। वे वर्ष 2014 में सीपीआई (एम) की ओर से राज्यसभा सदस्य बने थे। बाद में पार्टी से निष्कासन के बाद उन्होंने निर्दलीय सांसद के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और पार्टी नेतृत्व के भरोसे के साथ सक्रिय राजनीति में नई भूमिका निभाई।

TMC की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया : 

इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और विधायकों की वास्तविक स्थिति से ही यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक दबाव की रणनीति है या फिर बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी के दावों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है और सबकी नजरें अब TMC नेतृत्व की अगली चाल पर टिकी हैं।