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Haryana Roadways : 16 जून को प्रदेश में रोडवेज बसें रहेगी बंद! 15 दिन के लिए टला चक्का जाम

हिसार रोडवेज डिपो में आधी रात को हुआ समझौता महज एक टेंपरेरी सीजफायर है। कर्मचारियों ने नरमी अपनाने की बजाय महाप्रबंधक के खिलाफ मोर्चा और मजबूत कर दिया है।
 

हिसार रोडवेज डिपो में आधी रात को हुआ समझौता महज एक टेंपरेरी सीजफायर है। कर्मचारियों ने नरमी अपनाने की बजाय महाप्रबंधक के खिलाफ मोर्चा और मजबूत कर दिया है। भले ही मुख्यालय के दखल के बाद बसों के पहिए थमने से बच गए हों लेकिन अब असली लड़ाई जीएम की वर्किंग स्टाइल पर आकर टिक गई है।

डिपो के गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि चंडीगढ़ से आने वाली जांच कमेटी के निशाने पर कौन-कौन से अधिकारी होंगे। आधी रात को हुए समझौते के बाद शनिवार को बसों का संचालन नियमित रहा। हड़ताल समाप्त होने पर यात्रियों ने भी राहत की सांस ली।

सांझा मोर्चा के रणनीतिकारों ने साफ कर दिया है कि रूट पर बसें भेजने का मतलब यह कतई नहीं है कि गुस्सा शांत हो गया है। नेताओं ने कहा हमने यात्रियों की परेशानी को देखते हुए और जॉइंट डायरेक्टर की साख पर 15 दिन की मोहलत दी है। लेकिन हमारा टेंट लगा रहेगा। अगर जांच निष्पक्ष नहीं हुई और हमारे साथियों की जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो 16वें दिन पूरे हरियाणा का चक्का जाम होना तय है।

रात के समझौते के बाद अब क्या हैं 3 नए समीकरण?

पहली बार बैकफुट पर मैनेजमेंट : 23 दिन से अड़े कर्मचारी कल तक सिर्फ मांगें पूरी करने की बात कर रहे थे लेकिन अब वे सीधे जीएम के तानाशाही रवैये पर विभागीय कार्रवाई की गारंटी लेकर उठे हैं। यानी अब गेंद पूरी तरह सरकार और मुख्यालय के पाले में है।

धरना जारी रखना रणनीति : हड़ताल टलने के बावजूद धरना जारी रखने का फैसला रणनीतिक है। कर्मचारी नेता हर दिन की प्रशासनिक गतिविधियों और वादों की प्रोग्रेस पर नजर रखेंगे, ताकि अफसर 15 दिन का समय बीतने के बाद बहानेबाजी न कर सकें।

लोकल इंटेलिजेंस भी अलर्ट : इस विवाद के चलते पूरे हरियाणा की बसें रुकने का खतरा पैदा हो गया था। गृह विभाग और लोकल इंटेलिजेंस भी इस बात की रिपोर्ट चंडीगढ़ भेज रही है कि अगर 15 दिन में समाधान नहीं हुआ, तो यह प्रदेशव्यापी संकट बन जाएगा।

इन 15 दिनों में क्या बदलेगा?

समय (टाइमलाइन) क्या होना है? क्या है रिस्क फैक्टर ?

अगले 3 से 5 दिन मुख्यालय स्तर पर जांच कमेटी का गठन और हिसार आगमन। अगर कमेटी ने लीपापोती की, तो कर्मचारी बीच में ही आंदोलन भड़का सकते हैं। 10वां दिन लंबित प्रशासनिक फाइलों और कर्मचारियों के वित्तीय क्लेम का निपटारा। 

अधिकारियों की सुस्ती आंदोलन को दोबारा चक्का जाम की तरफ धकेलेगी। 15वां दिन अल्टीमेटम की डेडलाइन। समाधान न होने पर पूरे हरियाणा रोडवेज का "चक्का जाम' तय।