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हरिद्वार के घाटों पर गैर - हिंदुओं का प्रवेश रोकने की तैयारी, ऋषिकेश व हरिद्वार घोषित हो सकते है पवित्र शहर

 

RNE Network.

उत्तराखंड सरकार धार्मिक नगरी हरिद्वार में हर की पौड़ी की पवित्रता व सनातन प्रकृति की मर्यादा के लिए 105 घाटों पर गैर - हिन्दू के प्रवेश पर प्रतिबंध की तैयारी कर रही है।
 

साथ ही ऋषिकेश व हरिद्वार को ' सनातन पवित्र शहर ' भी घोषित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर की पौड़ी का रखरखाव करने वाली प्राचीन संस्था गंगा सभा और कई संतों की मांग पर यह संकेत दिया है। धामी ने कहा कि देवभूमि की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।
 

प्राप्त जानकारी के अनुसार गैर - हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने के लिए 110 साल पहले अंग्रेज सरकार व गंगा सभा संस्थापक पं मदनमोहन मालवीय के बीच हुए समझौते को आधार बनाया जा सकता है। राज्य सरकार ने इस समझौते की जानकारी व कागजात जुटाना शुरू कर दिया है। 
 

120 वर्ग किमी क्षेत्र आयेगा दायरे में
 

हरिद्वार - ऋषिकेश कुम्भ क्षेत्र में यह पाबंदी लागू हुई तो हरिद्वार से ऋषिकेश तक लगभग 45 - 50 किमी तक गंगा नदी के किनारे पर यह पाबंदी रहेगी। गंगा नदी के किनारे नगर निगम क्षेत्र और प्रमुख तीर्थ स्थलों, मठ , आश्रम, धर्मशाला व अखाड़े भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे। 
 

110 साल पुराना ये समझौता... 
 

अंग्रेजो व गंगा सभा के प्रथम अध्यक्ष मदनमोहन मालवीय में 1916 में हुए समझौते में गंगा के निर्बाध प्रवाह को बनाये रखना व तीर्थ नगर की पवित्रता को संरक्षित करना शामिल था। इसी समझौते में गंगा घाटों पर गैर - हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल था।
 

इसमें यह भी कहा गया था कि गैर - हिंदुओं को दोनों धार्मिक नगरों ( ऋषिकेश व हरिद्वार ) में स्थायी निवास करने की अनुमति नहीं होगी। वे केवल काम के लिए आ सकते है और अपना काम पूरा करके वापस जा सकते है।