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Bikaner Division Railway:  एक दिन में रिकॉर्ड 182 ट्रेनें गुजरी, 96 ट्रेनें मंडल में आईं, 86 आगे रवाना हुईं
 

5 अगस्त का 172 ट्रेनों का पिछला रिकॉर्ड भी टूटा
 
 

Rudra News Express Bikaner.

बीकानेर रेल मंडल में 27 सितंबर का दिन रेलवे के लिए रिकॉर्ड बनाने वाला रहा। मंडल ने एक ही दिन में 182 ट्रेनों का इंटरचेंज कर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। इनमें 96 ट्रेनें मंडल में रिसीव हुईं, जबकि 86 ट्रेनें मंडल से पास आउट हुईं।

ऐसे में अगर 27 सितंबर के 24 घंटे में 182 ट्रेनों का मतलब औसतन हर 8 मिनट के आसपास एक ट्रेन का इंटरचेंज बैठता है। हालांकि वास्तविक इंटरचेंज समान अंतराल पर नहीं होते, लेकिन यह आंकड़ा बताता है कि एक दिन में परिचालन का दबाव कितना बड़ा था।

आखिर इंटरचेंज होता क्या है?

रेलवे की भाषा में इंटरचेंज का मतलब है किसी ट्रेन का एक रेल मंडल की सीमा से निकलकर दूसरे मंडल की सीमा में प्रवेश करना। रेलवे का नेटवर्क अलग-अलग मंडलों में बंटा हुआ है। जब कोई ट्रेन एक बार मंडल की सीमा पार करती है तो वह दूसरे मंडल के परिचालन क्षेत्र में प्रवेश करती है। इस प्रक्रिया को ट्रेन इंटरचेंज कहा जाता है।


182 ट्रेनों का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है?

एक दिन में 182 ट्रेनों का इंटरचेंज होना केवल रेलवे के रिकॉर्ड में एक संख्या बढ़ना नहीं है। प्रत्येक ट्रेन के निर्बाध आवागमन के पीछे कई विभागों का समन्वय काम करता है।
ट्रेन के संचालन के साथ इंजीनियरिंग, विद्युत, सिग्नल एवं दूरसंचार, यांत्रिक, वाणिज्य और सुरक्षा विभाग समेत कई टीमें अपनी-अपनी भूमिका निभाती हैं। ट्रेनों का समय पर आना-जाना, सिग्नल व्यवस्था, ट्रैक की उपलब्धता, परिचालन नियंत्रण और सुरक्षा—इन सभी के बीच तालमेल जरूरी होता है।

5 अगस्त का रिकॉर्ड भी टूटा :
बीकानेर मंडल ने 5 अगस्त 2026 को 172 ट्रेनों का इंटरचेंज कर अपना पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया था। अब 27 सितंबर को 182 ट्रेनों के साथ मंडल ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।
ट्रेनों का इंटरचेंज जितना सुचारु होगा, उतना ही रेलवे के बड़े नेटवर्क में ट्रेनों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। किसी एक स्थान पर परिचालन में देरी का असर आगे चलकर कई ट्रेनों पर पड़ सकता है।

DRM गोविल ने दी बधाई: 

बीकानेर मंडल की इस उपलब्धि को मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल के निर्देशन, विभिन्न विभागों के समन्वय और रेल कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया गया है। गोविल ने इस उपलब्धि पर मंडल के सभी रेल कर्मचारियों को बधाई दी है।

इतना बड़ा है बीकानेर रेल मंडल: 

बीकानेर मंडल की खास बात यह है कि इसका नेटवर्क राजस्थान से निकलकर हरियाणा तक जाता है और पंजाब की सीमा से जुड़े हिस्से को भी छूता है। इसके प्रमुख रेल मार्गों में बीकानेर–रेवाड़ी, जोधपुर–बठिंडा, हिसार–सादुलपुर, सूरतगढ़–श्रीगंगानगर–सादुलपुर और रतनगढ़–सरदारशहर जैसे सेक्शन शामिल हैं। 
इनमें बीकानेर, हनुमानगढ़, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर, रतनगढ़, चूरू, सादुलपुर, हिसार, भिवानी और सिरसा जैसे स्टेशन मंडल के प्रमुख परिचालन केंद्रों में गिने जाते हैं
इस मंडल का रेल नेटवर्क करीब 1,780 रूट किलोमीटर में फैला है और ट्रैक की कुल लंबाई करीब 2,234 किलोमीटर है।