Rail Line New Bypass : रेल लाइन का नया बाईपास बनकर हुआ तैयार, दिल्ली व राजस्थान से आने वाली ट्रेन भरेगी फर्राटा
रेवाड़ी जंक्शन पर ट्रेनों के भारी दबाव और मालगाड़ियों के कारण होने वाली देरी को कम करने के लिए रेलवे ने तैयारी कर ली है। इसके लिए उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल द्वारा निर्माणाधीन रेवाड़ी-सादुलपुर रेल लाइन नए बाईपास का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। लगभग 64.56 करोड़ की लागत से 4.83 किलोमीटर लंबा यह बाईपास महेंद्रगढ़ रोड से रेवाड़ी लोको हेरिटेज के समीप तक बनाया जा रहा है। इसका करीब 100 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। रेलवे लाइन नया बाईपास शुरू होने के बाद दिल्ली व राजस्थान की तरफ से आने वाली ट्रेन बिना किसी बाधा के फर्राटा भरेंगी।
वर्तमान में परियोजना का अधिकांश सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है और अब केवल सुरक्षा संबंधी जांच (सेफ्टी इंस्पेक्शन) और विद्युतीकरण से जुड़े कुछ तकनीकी कार्य सहित विभिन्न ट्रायल ही शेष रह गए हैं। जिन्हें जून-जुलाई माह में किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे बाईपास की कमीशनिंग रेवाड़ी यार्ड के सिग्नलिंग ईआई (इलेक्ट्रॉनिक इंटरचेंज) कार्य के साथ अगस्त 2026 में किए जाने की योजना है।
इसके शुरू होते ही सादुलपुर और हिसार लाइन के आपस में जुड़ने से इन रुट की ओर जाने वाली मालगाड़ियां रेवाड़ी जंक्शन पर आए बिना ही सीधे अपने गंतव्य की ओर निकल सकेंगी, जिससे जंक्शन के ट्रैक यात्री ट्रेनों के लिए खाली रहेंगे। इससे न केवल जंक्शन पर यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि माल ढुलाई में लगने वाले समय में भी महत्वपूर्ण बचत होगी। इस बाईपास के शुरू होने से भविष्य में उन गाड़ियों को विशेष लाभ मिलेगा, जो सादुलपुर और हिसार रूट पर चलती हैं लेकिन रेवाड़ी स्टेशन पर नहीं रुक्ती, क्योंकि अब उन्हें सीधे इस बाईपास से निकाला जा सकेगा।
ट्रैक खाली होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा
इस बाईपास के चालू होने से रेवाड़ी जंक्शन पर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। सबसे बड़ा लाभ उन मालगाड़ियों को होगा जो - हिसार और सादुलपुर रूट पर विभिन्न पावर प्लांट में कोयला ले जाते हुए चलती हैं, क्योंकि उन्हें अब जंक्शन के भीतर आकर इंजन बदलने या ट्रैक खाली होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे माल ढुलाई में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
जब मालगाड़ियां बाईपास पास से से गुजरेंगी, तो जंक्शन के प्लेटफार्म और ट्रैक यात्री ट्रेनों के लिए हर समय उपलब्ध रहेंगे। इससे सादुलपुर और हिसार की ओर से आने वाली सवारी गाड़ियों को आउटर पर रुकना नहीं पड़ेगा और उनका परिचालन अधिक समयबद्ध और तीव्र हो सकेगा। साथ ही भविष्य में उन एक्सप्रेस ट्रेनों को भी सीधा रास्ता मिल सकेगा, जिनका रेवाड़ी में ठहराव नहीं है। बाईपास को रेवाड़ी यार्ड के आधुनिक सिग्नल सिस्टम यानी ईआई से जोड़ा जाएगा, ताकि परिचालन पूरी तरह सुरक्षित और हाइटेक हो सके।
2013 में शुरू हुआ था यह पूरा प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट करीब 64.56 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। जिसकी कुल लंबाई 4.83 किलोमीटर है। इस बाईपास लाइन का निर्माण महेंद्रगढ़ रोड से शुरू होकर रेवाड़ी लोको हेरिटेज के समीप तक किया गया है। परियोजना की शुरुआत 2012-13 में की गई थी। इस प्रोजेक्ट में 3 अंडरपास (आरयूबी) भी बनाए गए हैं, जिनमें पहला कालुवास, दूसरा आईओसीएल डिपो और तीसरा चांदावास में स्थित है।
रेल यातायात होगा अधिक व्यवस्थित : सीपीआरओ
उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि रेवाड़ी-सादुलपुर बाईपास लाइन का लगभग कार्य पूरा हो चुका है। अब हम फिनिशिंग व सेफ्टी से जुड़े कार्यों पर ध्यान दे रहे हैं। इससे मालगाड़ियों का रूट डायवर्ट होगा, जिससे जंक्शन पर सवारी गाड़ियों को प्राथमिकता मिलेगी और रेल यातायात अधिक व्यवस्थित व बाधा रहित होगा।