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Train Ac Failed : 46 डिग्री पारे में रेलवे का सिस्टम फेल, एसी कोच में भी यात्रियों का निकल रहा पसीना

 

भीषण गर्मी और रेलवे के लचर सिस्टम ने एसी के सफर में यात्रियों का पसीना निकाल दिया है। लगातार कम कूलिंग की शिकायतें हो रही हैं, लेकिन सुधार नहीं हो रहा है। जिससे यात्रियों के पास हजारों रुपए में टिकट बुक करने के बाद कोच में गर्मी सहने के सिवाए कोई विकल्प नहीं रह गया है।

फिलहाल पारा 46 डिग्री से अधिक हो गया है। इसी के साथ भारतीय रेलवे की एयर कंडीशनिंग व्यवस्था भी दम तोड़ती नजर आ रही है। ट्रेनों के एसी कोच अब कूलिंग चैंबर नहीं बल्कि हॉट चैंबर बन गए हैं। कोच के अंदर 30 से 35 डिग्री तक तापमान में यात्रियों को सफर करना पड़ रहा है।

ऐसे में सिटी जंक्शन से गुजरने वाली वातानुकूलित श्रेणी की 69 ट्रेनों में से अधिकतर में कम कूलिंग की शिकायत आ रही है। पिछले 8 दिनों में 24 ट्रेनों में यात्रियों ने कम कूलिंग की शिकायत की है। जिसमें यात्रियों की तरफ से कूलिंग 30 से 35 डिग्री तक रहने की बात कही है।

इसलिए फेल हो रही है कूलिंग

क्षमता से अधिक यात्रियों के एसी कोच में घुसने से हीट लोड बढ़ रहा है। एक कोच 72 लोगों के लिए बना है, लेकिन वहां 100 लोग होने पर एसी काम करना बंद कर रहा है।

भीषण गर्मी में कंडेंसर की सफाई और गैस चार्जिंग की ज्यादा जरूरत होती है, जो अक्सर नहीं हो पा रही है। बार-बार स्टेशन आने और पैंट्री स्टाफ की आवाजाही से ठंडी हवा बाहर निकल जाती है।

यात्रियों ने की शिकायत, टीटीई से एसी फेलियर के सर्टिफिकेट मांग रहे

नांदेड अमृतसर सुपरफास्ट ट्रेन से अमृतसर जा रहे यात्री राजेश प्रजापति ने बताया कि थर्ड एसी का टिकट लिया था, ताकि सुकून से जा सकूं। लेकिन कोच में इतनी उमस है कि पसीना नहीं रुक रहा। कोच अटेंडेंट से कहो तो वह कहता है कि बाहर गर्मी ज्यादा है। इसलिए मशीन लोड नहीं ले रही।

अवध आसाम से लखनऊ जा रहे यात्री इमरान सिद्दीकी ने कहा कि ट्रेन में ठंडक का बिल्कुल भी अहसास नहीं हुआ। कुछ समय में कपड़े पसीने से भीग गए। रेलवे एसी का किराया लेकर गर्मी में सफर करा रहा है।

रोहतक स्टेशन सुपरिंटेंडेंट बलवान मीणा ने कहा कि अगर सफर के दौरान कूलिंग बिल्कुल नहीं है तो टीटीई से एसी फेलियर सर्टिफिकेट मांगें। इसके आधार पर यात्री गंतव्य पर पहुंचने के बाद एसी और स्लीपर क्लास के किराए के अंतर का रिफंड क्लेम कर सकता है।

एसी का काम देखने के लिए ट्रेन में अटेंडेंट रहता है। इसमें यात्री अपने हिसाब से समस्या बताते हैं। अटेंडेंट यात्रियों के हिसाब से कूलिंग को नियंत्रित भी करता है।