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Central Govt Scheme : यूरिया खाद का फर्जीवाड़ा रोकेगी केंद्र सरकार, किसानों को लेकर ला रही नई योजना 

देश में उर्वरक सब्सिडी में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी तैयारी की है

 

देश में उर्वरक सब्सिडी में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी तैयारी की है। किसानों को अब डिजिटल आइडी के माध्यम से यूरिया व अन्य खाद की बिक्री की जाएगी। इसके साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की सिफारिशों के आधार पर उर्वरक बिक्री सीमा भी तय हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्रालय के मुताबिक यह योजना अभी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होगी, जिसमें चुनिंदा जिलों में यूरिया बिक्री को एग्री स्टैंक से जोड़ा जाएगा। पहले चरण में उन सात जिलों को चुना जाएगा। यहां किसान आइडी के आधार पर ही उर्वरक बेचे जाएंगे, ताकि किसानों को ही खाद मिले।

खाद की मात्रा फसल, भूमि का आकार, सिंचाई की उपलब्धता जैसे कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। एग्री स्टैंक डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन का हिस्सा है, जो किसानों की डिजिटल पहचान, भूमि व फसल डेटा को एकीकृत करेगा। यह योजना किसानों को लाभ होगा और सब्सिडी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

7.67 करोड़ किसान आइडी बनी

राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत कृषि प्रधान राज्यों में किसान रजिस्ट्री आइडी बनाने का कार्य चल रहा है। 4 दिसंबर, 2025 तक 7.67 करोड़ किसान आइडी बन चुकी हैं। वित्त वर्ष 26 में 9 करोड़ और बनाने का लक्ष्य है। सितंबर 2024 में मिशन के लिए 2,817 करोड़ रुपए दिए थे। सरकारों को डिजिटल सर्वेक्षण कर 2026 खरीफ सीजन तक किसान रजिस्ट्री आइडी बनाने का कार्य
पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। 

अधिक खपत

वित्त वर्ष 2025-26 में यूरिया की खपत अप्रैल-दिसंबर तक 31.15 मिलियन टन पहुंच गई है, जो बजट अनुमान से 4% ज्यादा है। उर्वरक सब्सिडी वित्त वर्ष 26 में 1.91 ट्रिलियन रुपए को पार करने की आशंका है, जबकि बजट अनुमान 1.68 ट्रिलियन था।